हल्द्वानी।उत्तराखण्ड में खेती-किसानी को एक नई रफ्तार देने और अन्नदाताओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चल रहे ‘समृद्ध किसान, सशक्त उत्तराखण्ड’ अभियान ने तराई के बड़े केंद्र हल्द्वानी में दस्तक दे दी है। विभिन्न जनपदों का सफर तय करते हुए रविवार को यह विशेष कृषक रथ जैसे ही हल्द्वानी पहुँचा, स्थानीय किसानों में भारी उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खेती की पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का तालमेल बिठाते हुए किसानों की आय को दोगुना करना और उन्हें सरकार की डिजिटल योजनाओं से सीधे जोड़ना रहा।
प्राकृतिक खेती: समय की सबसे बड़ी जरूरत
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि बंशीधर भगत ने किसानों को संबोधित करते हुए केमिकल और रासायनिक खादों से दूर रहने की नसीहत दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में भूमि की कम होती उर्वरता और बिगड़ती सेहत को बचाने का एकमात्र कारगर उपाय प्राकृतिक खेती ही है। रासायनिक उर्वरक न केवल हमारी जमीन की उपजाऊ क्षमता को खत्म कर रहे हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहे हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने से न केवल लागत कम आती है, बल्कि उत्पाद की बाजार में बेहतर कीमत भी मिलती है। सरकार का यह रथ इसी संदेश को घर-घर पहुँचाने का काम कर रहा है।
डिजिटल युग में जरूरी हैं ये कदम
कार्यक्रम में किसानों को केवल खेती के गुर ही नहीं सिखाए गए, बल्कि डिजिटल होती सरकारी व्यवस्थाओं से तालमेल बिठाने के भी निर्देश दिए गए। किसानों से विशेष रूप से अपील की गई कि वे बिना किसी देरी के अपनी ‘फार्मर रजिस्ट्री’ पूरी करवाएं और मतदाता सूची में अपने नाम की पुष्टि जरूर कर लें। वर्तमान दौर में कृषि और बागवानी से जुड़ी तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खातों और डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर किया जा रहा है। ऐसे में यदि कागजात और डिजिटल रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होंगे, तो किसान योजनाओं के लाभ से वंचित रह सकते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी किसानों को इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की सलाह दी।
विभागों के स्टॉल पर उमड़ी भीड़
इस आयोजन की एक खास बात विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए सूचना स्टॉल रहे। कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, और मत्स्य पालन विभाग ने अपने स्टॉल के माध्यम से किसानों को योजनाओं की एबीसीडी समझाई।किसानों को बताया गया कि कैसे वे पशुपालन और मत्स्य पालन को अपनी अतिरिक्त आय का जरिया बना सकते हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने आधुनिक वैज्ञानिक विधियों पर चर्चा की, जिससे कम जमीन और कम पानी में भी बंपर पैदावार ली जा सके। आईएफएफओ और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपनी ओर से बेहतरीन सुझाव साझा किए।
रथ को दिखाई हरी झंडी, देहरादून के लिए हुआ रवाना
गढ़वाल और कुमाऊँ मंडल के सुदूर इलाकों तक कृषि विकास का संदेश पहुँचाने के बाद, हल्द्वानी के इस पड़ाव पर कार्यक्रम का समापन एक बड़े संदेश के साथ हुआ। मुख्य अतिथि बंशीधर भगत ने हरी झंडी दिखाकर कृषक रथ को अगले पड़ाव यानी देहरादून के लिए रवाना किया।
इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमले की भी मजबूत मौजूदगी रही। जिला विकास अधिकारी संतोष पंत, मुख्य कृषि अधिकारी संतोषी, खण्ड विकास अधिकारी तनवीर असगर, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. कंचन नैनवाल और डॉ. सुधा ज़ुकारिया, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद हयांकी, कृषि रक्षा अधिकारी रितु टम्टा, कृषि एवं भूमिसंरक्षण अधिकारी डॉ. गीतांजलि बंगारी, मत्स्य सहायक निदेशक रजनी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रताप सिंह बोहरा, मंडल अध्यक्ष संदीप सनवाल, जीएस मेहरा तथा प्रगतिशील किसान नरेंद्र मेहरा सहित तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कुल मिलाकर यह आयोजन हल्द्वानी के किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और सरकार की योजनाओं का एक अनूठा संगम साबित हुआ।