हल्द्वानी (नैनीताल)। भारत में डिजिटल युग की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद यानी ‘जनगणना 2026’ की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश, गोवा और पंजाब के साथ-साथ उत्तराखंड में भी जनगणना के दूसरे चरण को धरातल पर उतारने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी कड़ी में नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित जिला उद्योग केंद्र में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आगाज हुआ, जहाँ 80 फील्ड ट्रेनरों को डिजिटल जनगणना की बारीकियों का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ नैनीताल के जिलाधिकारी एवं प्रधान जनगणना अधिकारी ने किया। इस मौके पर भारत सरकार के सहायक निदेशक (जनगणना) अरविंद कुमार भी विशेष रूप से मौजूद रहे और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर जनगणना के महत्व और तकनीक के सही इस्तेमाल पर प्रकाश डाला।
घर-घर पहुँचेंगे प्रगणक, पूछेंगे 40 अहम सवाल
जनगणना का यह दूसरा चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल ने प्रशिक्षण के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस चरण के तहत मैदान में उतरने वाले प्रगणक (Enumerators) सीधे लोगों के दरवाज़े तक पहुँचेंगे।
प्रगणक हर परिवार से जनगणना से जुड़े कुल 40 सवाल पूछेंगे। इन सवालों में सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, आवासीय सुविधाओं और जनसांख्यिकी से जुड़ी अहम जानकारियाँ शामिल होंगी। एकत्रित किया गया यह डेटा देश की आगामी योजनाओं और नीतियों को तय करने में मील का पत्थर साबित होगा।
15 नवंबर से खुद भी कर सकेंगे स्व-गणना (Self-Enumeration)
डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए इस बार आम जनता को ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का भी विकल्प दिया गया है।
- 15 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक: नागरिक घर बैठे ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
- 1 दिसंबर 2026 से: उत्तराखंड भर में फील्ड प्रगणक घर-घर जाकर डेटा सत्यापन और बची हुई आबादी का पंजीकरण शुरू करेंगे।
स्व-गणना प्रक्रिया से जहाँ समय की बचत होगी, वहीं डेटा की सटीकता भी कई गुना बढ़ जाएगी।
तकनीक और मास्टर ट्रेनरों का मिला मार्गदर्शन
हल्द्वानी में आयोजित इस तीन दिवसीय गहन प्रशिक्षण शिविर में फील्ड ट्रेनरों को रियल-टाइम डेटा एंट्री और ऐप संचालन का अभ्यास कराया जा रहा है। प्रशिक्षण की कमान मास्टर ट्रेनर मुकेश नेगी के साथ-साथ कोऑर्डिनेटर यश और विमलेश ने संभाल रखी है।
मास्टर ट्रेनर्स द्वारा ट्रेनरों को सिखाया जा रहा है कि किस तरह ज़मीनी स्तर पर बिना किसी बाधा के डेटा फीडिंग की जाए और लोगों से सही संवाद बनाकर जानकारी जुटाई जाए। कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारी गौरव पांडे भी उपस्थित रहे और उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
क्यों खास है यह जनगणना?
उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिकता को देखते हुए जनगणना का काम एक बड़ी चुनौती माना जाता है। यही वजह है कि मास्टर ट्रेनर पहले फील्ड ट्रेनरों को पूरी तरह मुस्तैद कर रहे हैं, ताकि ये 80 ट्रेनर आगे चलकर हज़ारों प्रगणकों को सटीक ट्रेनिंग दे सकें। 1 दिसंबर 2026 से शुरू होने वाले इस अभियान से राज्य के हर नागरिक का ब्योरा भारत सरकार के डिजिटल नक्शे पर दर्ज हो जाएगा।
मुख्य आकर्षण (Quick Facts)
- आयोजन स्थल: जिला उद्योग केंद्र, हल्द्वानी (नैनीताल)
- कुल फील्ड ट्रेनर: 80
- प्रश्नों की संख्या: 40 सवाल
- स्व-गणना अवधि: 15 नवंबर से 30 नवंबर 2026
- उत्तराखंड में मैदानी कार्य: 1 दिसंबर 2026 से प्रारंभ