कुंजापुरी पर्यटन मेले की स्वर्ण जयंती: धामी ने किया शुभारंभ, जानें उत्तराखंड में पर्यटन और रिवर्स पलायन का नया प्लान
नरेंद्रनगर (टिहरी)। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर नरेंद्रनगर में सिद्धपीठ श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले की स्वर्ण जयंती का भव्य आगाज हुआ। 50वें मेले के उद्घाटन के अवसर पर ध्वजारोहण कर नौ दिवसीय सांस्कृतिक और विकास उत्सव की औपचारिक शुरुआत की गई। इस दौरान भव्य सांस्कृतिक झांकियों का प्रदर्शन किया गया और विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनियों का अवलोकन किया गया। स्वतंत्रता संग्राम शहीद स्मारक तथा अमर शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस और नवरात्रि के सुखद संयोग पर आयोजित इस 50वें मेले को लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक बताया गया। ऐसे आयोजन जहां एक ओर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक संस्कृति से जोड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी नई गति प्रदान करते हैं। मेले के दूरदर्शी संस्थापक सुरेंद्र सिंह पांगती और आयोजन समिति के ऐतिहासिक योगदान को भी इस दौरान विशेष रूप से सराहा गया।

सांस्कृतिक संवर्धन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन
धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार लगातार कदम उठा रही है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और केदारनाथ-बदरीनाथ धाम की तर्ज पर केदारखंड और मानसखंड के प्रमुख मंदिरों में जनसुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
पलायन पर प्रभावी अंकुश लगाने और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के लिए विशेष योजनाएं धरातल पर उतारी गई हैं। ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी पहलों से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच मिला है। अकेले ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड ने 6 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया है। स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, फार्म मशीनरी बैंक, होमस्टे नीति, नई पर्यटन व फिल्म नीति तथा ‘वेड इन उत्तराखंड’ जैसे अभियानों से स्वरोजगार को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिल रहा है, जिसके सुखद परिणाम स्वरूप राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्रशासनिक कड़ाई और पारदर्शी पारिस्थिकी
उत्तराखंड की सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय पहचान को बनाए रखने के लिए सरकार प्रतिबद्ध नजर आ रही है। समान नागरिक संहिता, सशक्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा रोधी कानून और देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान के तहत 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि वापस हासिल की गई है। पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से अब तक 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों में पारदर्शी नियुक्तियां प्रदान की जा चुकी हैं।

टिहरी और नरेंद्रनगर के लिए विकास परियोजनाओं का खाका
टिहरी जिले को साहसिक और जल पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर उभारने के लिए टिहरी झील के चारों ओर रिंग रोड और सुगम पर्यटन मार्गों का विकास किया जा रहा है। झील क्षेत्र में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और होमस्टे नेटवर्क को विस्तार दिया जा रहा है।
नरेंद्रनगर और आसपास के क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम जारी है:
- राजकीय पॉलिटेक्निक का उच्चीकरण और नए संकायों का जुड़ाव
- विधि महाविद्यालय की स्थापना और पदों का सृजन
- केंद्रीय विद्यालय एवं अत्याधुनिक सभागार निर्माण
- गजा अस्पताल का उच्चीकरण
- लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत वाली सीवर लाइन परियोजना

19 अक्टूबर तक बिखरेगी लोक संस्कृति की छटा
11 से 19 अक्टूबर तक चलने वाले इस राज्यस्तरीय मेले में छोलिया नृत्य, गाडू घड़ा (तेल कलश) की परंपरा, महिषासुर मर्दिनी और नरसिंह अवतार पर आधारित जीवंत झांकियां प्रस्तुत की जा रही हैं।
उत्सव के दौरान खेलकूद और विद्यालयी प्रतियोगिताओं के साथ-साथ राज्य के ख्यातिप्राप्त कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। पद्मश्री डॉ. बसंती बिष्ट, नरेंद्र सिंह नेगी, मीना राणा, संगीता ढौंडियाल, किशन महिपाल और पांडवाज बैंड जैसे कलाकार अपनी स्वर लहरियों से समां बांधेंगे। मेले का भव्य समापन पद्मश्री जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण के भक्तिमय जागर गायन के साथ होगा।