प्रकृति संरक्षण और साहित्य का अद्भुत संगम: कार्बेट टाइगर रिजर्व में वन्यजीव सप्ताह और लिटरेचर फेस्टिवल का ऐतिहासिक समापन
रामनगर (नैनीताल):कार्बेट टाइगर रिजर्व द्वारा आयोजित ‘वन्यप्राणी सप्ताह 2026’ और तीन दिवसीय ‘कार्बेट लिटरेचर फेस्टिवल (प्रथम संस्करण)’ का भव्य समापन हो गया। वन विश्राम भवन, रामनगर और ढेला स्थित द गोल्डन टस्क रिसॉर्ट में आयोजित इन दोनों कार्यक्रमों में प्रकृति संरक्षण, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व, पर्यावरण पर्यटन (इको-टूरिज्म) तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका को सशक्त बनाने के विषयों पर व्यापक मंथन किया गया।

जन-जागरूकता कार्यक्रमों से गूंजा वन्यजीव सप्ताह
वन्यप्राणी सप्ताह के तहत सप्ताह भर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन किया गया। इसमें साइकिलथॉन, जागरूकता रैली, वन्यजीव फोटोग्राफी प्रदर्शनी, स्वच्छता अभियान और स्कूली बच्चों के लिए चित्रकला, निबंध व क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, एनजीओ और छात्रों ने इनमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। समापन अवसर पर विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में उप निदेशक राहुल मिश्रा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जब तक समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें सहभागिता नहीं निभाएगा, इसे दीर्घकालिक रूप से सफल नहीं बनाया जा सकता।
अवैतनिक वन्यजीव प्रतिपालक दिनेश मंगला ने जानवरों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और जन-सामान्य में संवेदनशीलता विकसित करने पर बल दिया। वहीं वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य मयंक तिवारी ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी साझा की।

स्थानीय आजीविका और महिला सशक्तिकरण पर जोर
क्षेत्र में जैव-विविधता और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि नई पीढ़ी ही पर्यावरण के भविष्य की दिशा तय करेगी।
डॉ. बडोला ने स्पष्ट किया कि स्थानीय समुदायों का आर्थिक सशक्तिकरण पार्क प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। सांवल्दे क्षेत्र में सिलाई प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से बोक्सा जनजाति की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया गया है। वनों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सांवल्दे और ढेला ग्राम में ‘नेचर शॉप’ स्थापित की जाएगी, जहाँ स्थानीय ग्रामीणों द्वारा तैयार जूट बैग, शहद और अन्य प्राकृतिक उत्पादों को सीधा बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।

कार्बेट लिटरेचर फेस्टिवल: प्रकृति, साहित्य और पर्यटन का नया आयाम
कार्बेट टाइगर रिजर्व द्वारा पहली बार आयोजित ‘कार्बेट लिटरेचर फेस्टिवल’ प्रकृति, साहित्य और पर्यटन के समन्वय का एक अनूठा प्रयास सिद्ध हुआ। 20 से अधिक वैचारिक सत्रों में देश के 30 से अधिक प्रसिद्ध लेखकों, वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों, इतिहासकारों और छायाकारों ने गंभीर विषयों पर चर्चा की।
फेस्टिवल में प्रदर्शित कार्बेट टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव-विविधता पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म की विशेष सराहना हुई। कार्यक्रम में पहुंचे गायक जुबिन नौटियाल ने इस लघु फिल्म की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

फेस्टिवल के प्रमुख सत्रों की झलकियाँ:
- प्राकृतिक इतिहास और जीवंत परिदृश्य: लेखक अभिलाष खांडेकर, रज़ा काज़मी, दीपांकर और डॉ. मनोज कुमार ने इंसानों और जंगलों के ऐतिहासिक ताने-बाने पर संवाद किया।
- नियंत्रित पर्यटन: जान्हवी प्रसादा, नरेंद्र भंडारी और अनिरुद्ध लखोटिया ने नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में जिम्मेदार पर्यटन की आवश्यकता जताई।
- आस्था और वनों की नदियां: पत्रकार रमेश भट्ट, चिन्मय शाह और डॉ. अंजली कपिला ने गंगा और रामगंगा जैसी नदियों के सांस्कृतिक व पर्यावरणीय महत्व पर बात की।
- प्रकृति लेखन: गार्गी रावत, स्टीफन ऑल्टर, प्रेरणा सिंह बिंद्रा और रिचर्ड केरिज ने स्पष्ट किया कि साहित्य के माध्यम से जनता में जंगलों के प्रति संवेदनशीलता आसानी से जगाई जा सकती है।

इको-टूरिज्म और स्थानीय विकास की ओर कदम
समारोह के मुख्य अतिथि रामनगर विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने कार्बेट लिटरेचर फेस्टिवल को क्षेत्र में इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार बढ़ाने का एक बेहतरीन जरिया बताया। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए आयोजन की सफलता के लिए अधिकारियों, मीडिया, स्कूली बच्चों और स्थानीय निवासियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी ध्रुव मर्तोलिया, सामाजिक कार्यकर्ता गणेश रावत और नगरपालिका अध्यक्ष मोहम्मद अकरम सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार रखे और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने का आह्वान किया।