कार्बेट टाइगर रिजर्व में शोक की लहर: 80 वर्ष की उम्र में हथिनी ‘सोनाकली’ ने ली अंतिम सांस, राजकीय सम्मान से हुआ अंतिम संस्कार
रामनगर (नैनीताल):कार्बेट टाइगर रिजर्व की पहचान और वन्यजीव संरक्षण अभियानों की रीढ़ रही 80 वर्षीया हथिनी ‘सोनाकली’ अब हमारे बीच नहीं रही। आयु संबंधी बीमारियों से जूझ रही सोनाकली का 17 अक्टूबर 2026 की देर रात करीब 10:45 बजे निधन हो गया। सोनाकली के शांत होने की खबर से कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रबंधन, वन कर्मियों और वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।
निधन की सूचना मिलते ही उच्च अधिकारियों और वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की टीम ने मौका मुआयना किया और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कीं। इसके बाद 18 अक्टूबर 2026 को कार्बेट टाइगर रिजर्व के वन कर्मियों द्वारा गॉर्ड ऑफ ऑनर (सलामी) देकर सोनाकली का पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
वर्ष 2018 में मिली थी सम्मानजनक सेवानिवृत्ति
सोनाकली ने दशकों तक वन विभाग और कार्बेट रिजर्व को अपनी अतुलनीय सेवाएं दीं। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए 23 जनवरी 2018 को उसे विधिवत सेवानिवृत्त कर दिया गया था।
सेवानिवृत्ति के बाद उससे किसी भी प्रकार का राजकीय या भारी काम नहीं लिया जाता था। इस दौरान पार्क प्रशासन द्वारा उसके खान-पान, स्वास्थ्य, उचित देखभाल और शारीरिक सक्रियता बनाए रखने के लिए विशेष नियमित व्यायाम का ध्यान रखा जा रहा था।

बाघ रेस्क्यू और मानव-वन्यजीव संघर्ष नियंत्रण में निभाई ऐतिहासिक भूमिका
सोनाकली को वर्ष 1997 में कार्बेट टाइगर रिजर्व लाया गया था। उसने 1997 से 2002 तक ढिकाला रेंज, 2002 से 2016 तक हल्दूपड़ाव (कालागढ़ क्षेत्र) तथा 2016 से जीवन के अंतिम पड़ाव तक ढिकाला रेंज में अपनी सेवाएं दीं।
अपने लंबे सेवाकाल के दौरान सोनाकली ने दर्जनों खतरनाक बाघ रेस्क्यू अभियानों में असाधारण साहस का परिचय दिया।
- आदमखोर बाघ से डटकर मुकाबला (2011): वर्ष 2011 में गर्जिया क्षेत्र में सक्रिय आदमखोर बाघ के सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में सोनाकली का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
- जंगल से शव निकालकर लाया अदम्य साहस (2012): वर्ष 2012 में सर्पदुली रेंज में बाघ के हमले में दीवानी राम की मृत्यु हो गई थी। उस समय सोनाकली ने सूझबूझ और अप्रतिम निडरता दिखाते हुए बाघ के जबड़े के सामने से शव को सुरक्षित बाहर निकाला था।
- हालिया अभियानों में भी सक्रियता (2023): वर्ष 2023 में भी सर्पदुली क्षेत्र के जटिल बाघ रेस्क्यू अभियान में सोनाकली ने अहम भूमिका निभाई।
महावतों और श्रमिकों की रक्षक रही सोनाकली
घने जंगलों में गश्त और रेस्क्यू के दौरान सोनाकली केवल एक प्रशासनिक हाथी नहीं, बल्कि वन कर्मियों और महावतों के लिए एक रक्षक की तरह थी। कई मौकों पर जब हिंसक जानवरों का खतरा मंडराया, तब सोनाकली ने अपनी बुद्धिमत्ता से महावतों और चारा काटने वाले श्रमिकों की जान बचाई।
अत्यंत शांत, समझदार और सरल स्वभाव की धनी सोनाकली का निधन कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और बाघों के संरक्षण में उसके ऐतिहासिक योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद रखा जाएगा।
अंतिम विदाई के इस भावुक अवसर पर उप निदेशक पॉलसन फ्लिन संजय (IFS), पार्क वार्डन बिन्दरपाल, वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा, वन क्षेत्राधिकारी संजय पाण्डे (सर्पदुली), वन क्षेत्राधिकारी राजेश ध्यानी (ढिकाला) समेत कार्बेट रिजर्व के तमाम अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने नम आंखों से इस जाबांज हथिनी को अपनी अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।