नैनीताल। नैनीताल जिले में आम जनता से सीधे जुड़े भूमि, अतिक्रमण और राजस्व विवादों के समाधान में पिछले एक साल के दौरान अभूतपूर्व तेजी देखने को मिली है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान जिला प्रशासन ने लंबित मुकदमों के निपटारे और पारदर्शी व्यवस्था कायम करने के लिए बड़ा अभियान चलाया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में जिले की विभिन्न अदालतों में दर्ज कुल 37,383 राजस्व वादों में से 31,979 वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया। यानी प्रशासन ने 85.54 प्रतिशत की शानदार दर से मुकदमों का निपटारा कर आम जनता को अदालतों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाई है।
राजस्व प्रवर्तन में 97.67% की सफलता
जिला प्रशासन की सबसे बड़ी उपलब्धि राजस्व प्रवर्तन से जुड़े मामलों में रही है। 14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 के बीच राजस्व प्रवर्तन समिति के पास कुल 5,745 प्रकरण दर्ज हुए थे। इनमें से रिकॉर्ड 5,611 मामलों का निस्तारण कर दिया गया, जो कुल मामलों का लगभग 97.67 प्रतिशत है। अब जिले में केवल 134 मामले ही लंबित बचे हैं, जिन्हें भी जल्द निपटाने की तैयारी है।
प्रशासन ने सड़कों और सिंचाई नहरों पर अवैध कब्जों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया। सड़कों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण के 857 मामलों में से 856 का समाधान कर दिया गया, जिसमें अब सिर्फ एक मामला शेष है। इसी तरह सिंचाई की गूलों और नहरों पर अतिक्रमण के 83 में से 78 मामले सुलझाए गए, जबकि सार्वजनिक रास्तों व नहरों के सभी 100 मुकदमों का शत-प्रतिशत निस्तारण दर्ज किया गया।
जमीन पैमाइश और मेड़ विवाद पर विशेष ध्यान
गांवों और कस्बों में सबसे ज्यादा विवाद जमीन की नाप-जोख और मेड़ (सीमांकन) को लेकर होते हैं। प्रशासन ने इस मोर्चे पर ठोस रणनीति बनाकर काम किया:
- भूमि पैमाइश: पैमाइश के कुल 2,491 मामलों में से 2,398 का निस्तारण किया गया।
- मेड़ विवाद: खेतों की सीमा और मेड़ से जुड़े 957 मामलों में से 945 मामले सुलझाए गए।
- नाम संशोधन व अन्य: नाम संशोधन के 290 में से 284 और अन्य श्रेणियों के 765 में से 763 मामलों का निपटारा हुआ।
इन त्वरित कार्यवाहियों से आम किसानों और भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिली है और जमीनी स्तर पर आपसी विवादों में कमी आई है।
अदालती मुकदमों के निपटारे में तेजी
विभिन्न राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की बात करें तो कुल 37,383 विचाराधीन मुकदमों में से 31,979 निपटाए गए और केवल 5,404 वाद शेष रहे। वहीं, कलेक्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में दर्ज 472 मुकदमों में से 364 का समाधान किया गया, जो 77.11 प्रतिशत की निस्तारण दर को दर्शाता है। इन मुकदमों में जेडए एवं एलआर एक्ट, गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट, उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, और शस्त्र अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनों के तहत दर्ज मामले शामिल थे।
गांव-गांव चौपाल लगाकर 34,897 लोगों को दी राहत
ग्रामीण इलाकों में अक्सर खातेदार की मृत्यु के बाद उसके वारिसों के नाम खतौनी में दर्ज कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। इस समस्या को खत्म करने के लिए जिला प्रशासन ने ‘गांव-गांव चौपाल’ की अनूठी पहल की।
एक साल के भीतर नैनीताल, हल्द्वानी, रामनगर, कालाढूंगी, लालकुआं, धारी, खनस्यूं, कैंचीधाम और बेतालघाट तहसीलों में विशेष चौपालें आयोजित की गईं। इस दौरान मृतक खातेदारों की विरासत दर्ज करने के 9,783 प्रकरणों पर काम हुआ, जिससे 18,906 खाते अद्यतन किए गए। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से कुल 34,897 उत्तराधिकारियों और लाभार्थियों के नाम सरकारी कागजातों में दर्ज किए गए।
पारदर्शिता और समयबद्धता ही प्राथमिकता
इन विभागीय आंकड़ों से साफ है कि नैनीताल में आम जनता से जुड़े हर छोटे-बड़े जमीनी मुद्दे पर प्रशासन मुस्तैद रहा है। राजस्व मुकदमों का समयबद्ध निस्तारण, पारदर्शी कार्यप्रणाली और नागरिकों की समस्याओं का मौके पर समाधान प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल रहा। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल का कहना है कि आने वाले समय में भी बचे हुए प्रकरणों को जल्द से जल्द हल करना और हर नागरिक तक प्रशासनिक सेवाओं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित करना ही मुख्य लक्ष्य रहेगा।