रामनगर: देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित जंतर-मंतर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और बड़े पैमाने पर की गई गिरफ्तारियों की गूंज अब उत्तराखंड तक पहुंच गई है। दिल्ली में पुलिसिया दमन के खिलाफ रामनगर में विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त रोष व्यक्त करते हुए केंद्र की मोदी सरकार का पुतला दहन किया। इस दौरान केंद्र सरकार की नीतियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
दिल्ली में अघोषित आपातकाल जैसे हालात: वक्ता
पुतला दहन के उपरांत आयोजित जनसभा में उपस्थित वक्ताओं ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। वक्ताओं का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने दिल्ली पहुंच रहे नागरिकों और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पूरे देश में आपातकाल जैसे हालात पैदा कर दिए गए।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, दिल्ली जाने वाली ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित की गई, कई मेट्रो स्टेशनों के दरवाजे बंद कर दिए गए और हॉस्टलों, कमरों तथा बसों में छापेमारी कर कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। प्रशासन की इस तमाम सख्ती के बावजूद हजारों की संख्या में आंदोलनकारी जंतर-मंतर तक पहुंचने में सफल रहे।
शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर नाराजगी
जनसभा के दौरान जानकारी दी गई कि दिल्ली, फरीदाबाद और गुड़गांव के इलाकों से इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन तथा प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के दर्जनों कार्यकर्ताओं को जबरन हिरासत में लिया गया है।
गिरफ्तार किए गए प्रमुख लोगों में इंकलाबी मजदूर केंद्र के अध्यक्ष खीमानंद जोशी, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के अध्यक्ष महेंद्र सिंह तथा उत्तराखंड से दिल्ली पहुंचे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी और पूर्व अध्यक्ष पी सी तिवारी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ताओं को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा किया जाए और पूरे मामले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
“SIR प्रक्रिया पिछले दरवाजे से NRC लागू करने का प्रयास”
आंदोलनकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा चलाया जा रहा ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) वास्तव में पिछले दरवाजे से राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) लागू करने की योजना है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के माध्यम से इस असंवैधानिक परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सभा में दावा किया गया कि इस प्रक्रिया की आड़ में मुख्य रूप से मजदूर वर्ग, मेहनतकश जनता, दलितों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के मताधिकार छीने जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस व्यवस्था के तहत अब तक करोड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं, जो लोकतंत्र पर सीधा हमला है। प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी है कि SIR की पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने पदों से इस्तीफा दें।
प्रदर्शन में कई संगठनों की रही उपस्थिति
रामनगर में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन और सभा का संचालन इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला ने किया। इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
विरोध कार्यक्रम में इंकलाबी मजदूर केंद्र से भुवन चंद्र, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी से आसिफ और लालमणी, तथा प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से शीला शर्मा, तुलसी छिंवाल, गीता, छाया व गीता आर्य मौजूद रहे। इनके अलावा देवभूमि व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन से आनंदी, बिमला व सुनीता सीता तथा परिवर्तनकामी छात्र संगठन की ओर से रवि कुमार, परिधि, प्रीति और शेखर समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।