उधम सिंह नगर में बड़ा किसान आंदोलन: बैरिकेडिंग तोड़ कलेक्ट्रेट में घुसे BKU कार्यकर्ता, सड़क पर लंगर लगाकर 3 दिन के धरने का ऐलान
रुद्रपुर(ऊधम सिंह नगर)।उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में अचानक सियासी और सामाजिक पारा चढ़ गया है। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के बैनर तले जुटे सैकड़ों किसानों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर जिला मुख्यालय यानी कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर जोरदार धावा बोला। प्रदर्शन इतना उग्र था कि किसानों ने पुलिस की पहली सुरक्षा बैरिकेडिंग को उखाड़ फेंका और कलेक्ट्रेट गेट के काफी करीब पहुंच गए। पुलिस और प्रशासन की कड़ी मशक्कत के बाद किसानों को दूसरी बैरिकेडिंग पर रोका गया, जहां किसानों ने सड़क पर ही दरी बिछाकर अनिश्चितकालीन रंग-ढंग में तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया है।

कलेक्ट्रेट के बाहर लंगर, सड़क ही बनी किसानों का आशियाना
रुद्रपुर कलेक्ट्रेट के बाहर का नजारा शुक्रवार को पूरी तरह से बदला हुआ नजर आया। कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट जहां प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों की आवाजाही के लिए जाना जाता है, वहां अब केवल किसानों का कब्जा है। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद किसानों ने सड़क को ही अपना पड़ाव बना लिया।
किसान सिर्फ धरने पर ही नहीं बैठे, बल्कि उन्होंने मौके पर ही विशाल लंगर की व्यवस्था कर दी। सैकड़ों किसानों ने एक साथ जमीन पर बैठकर खाना खाया। किसान नेताओं का साफ कहना है कि यह आंदोलन कोई दो-चार घंटे का सांकेतिक विरोध नहीं है, बल्कि 21, 22 और 23 अगस्त तक यह तीन दिवसीय पक्का मोर्चा रहेगा। रात हो या दिन, खाना कलेक्ट्रेट के गेट पर ही बनेगा और किसान वहीं रात गुजारेंगे।

क्या हैं किसानों की 4 मुख्य मांगें?
भारतीय किसान यूनियन ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने 4 बेहद महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जिनको लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी:
- 300 यूनिट मुफ्त बिजली: उत्तराखंड को ‘ऊर्जा प्रदेश’ का दर्जा प्राप्त है। किसानों का कहना है कि जलविद्युत उत्पादन में अग्रणी राज्य होने के नाते यहां के घरेलू उपभोक्ताओं को कम से कम 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जानी चाहिए।
- ट्यूबवेल बिजली बिल पूरी तरह माफ: कृषि लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए किसानों के नलकूपों (ट्यूबवेल) का बिजली बिल पूरी तरह माफ करने की मांग उठाई गई है।
- बाजपुर के 20 गांवों की जमीन का मालिकाना हक: उधम सिंह नगर के बाजपुर क्षेत्र के 20 गांवों की भूमि स्वामित्व का मुद्दा दशकों पुराना है। किसानों की मांग है कि इन जमीनों का स्थायी मालिकाना हक स्थानीय ग्रामीणों और किसानों को तुरंत सौंपा जाए।
- पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली: इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा को मजबूती देने के लिए पेंशन बहाली का मुद्दा भी किसानों के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है।

प्रशासन में हड़कंप, पुलिस बल तैनात
किसानों के अचानक हमलावर रुख और पहली बैरिकेडिंग तोड़े जाने की घटना से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में दूसरी बैरिकेडिंग पर भारी पुलिस बल, पीएसी और महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। कलेक्ट्रेट के आसपास के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से किसान प्रतिनिधियों से बातचीत के रास्ते खोलने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि कलेक्ट्रेट का कामकाज प्रभावित न हो और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहे। हालांकि, किसान यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर शासन स्तर से कोई ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे 23 अगस्त तक कलेक्ट्रेट गेट से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। रुद्रपुर में शुरू हुआ यह तीन दिवसीय धरना अब पूरे उत्तराखंड के किसान आंदोलन का नया केंद्र बन गया है।