विज्ञान: ज्ञान की टॉर्च लाइट — क्या रोशनी अब भी अधूरी है? रामनगर में 20 अगस्त को उठेगा इस सवाल से पर्दा
रामनगर। आधुनिक युग में विज्ञान ने मानव सभ्यता को असीम ज्ञान और नई ऊंचाइयों से नवाजा है। आज जब दुनिया ब्रह्मांड के सबसे सुदूर कोनों को खंगाल रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नए युग में कदम रख चुकी है, तब भी समाज में अज्ञानता और अंधविश्वास की जड़ें गहरी जमी हुई हैं। इसी विरोधाभास और वैज्ञानिक चेतना पर विचार-मंथन के लिए रामनगर में एक भव्य आयोजन होने जा रहा है।
’साइंस फार सोसायटी’ ने टेड़ा रोड स्थित अपने कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर घोषणा की है कि आगामी 20 अगस्त 2026 को प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की शहादत दिवस को ‘विज्ञान दिवस’ के रूप में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
कार्यक्रम की रूपरेखा और मुख्य आकर्षण
20 अगस्त को दोपहर 11:00 बजे से 1:00 बजे तक शहर के अग्रवाल सभा भवन में एक विशेष बौद्धिक सत्र और स्लाइड शो का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष का मुख्य विषय “विज्ञान: ज्ञान की टॉर्च लाइट- क्या रोशनी अब भी अधूरी है” रखा गया है।
इस वैचारिक परिचर्चा और स्लाइड शो की प्रस्तुति के लिए सेंट स्टीफन कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रसिद्ध प्रोफेसर संजय कुमार को मुख्य वक्ता के रूप में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
अंतरिक्ष से परमाणुओं तक: विज्ञान की असीम यात्रा
बैठक के दौरान सोसायटी के संयोजक मदन सिंह ने कहा कि मानवता ने विज्ञान के सम्बल से संपूर्ण ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में अभूतपूर्व प्रगति की है। अंतरिक्ष में स्थापित अत्याधुनिक दूरबीनों (टेलिस्कोप) के माध्यम से आज हम खरबों किलोमीटर दूर स्थित आकाशगंगाओं के दुर्लभ चित्र देख पा रहे हैं।
वैज्ञानिकों ने यह गुत्थी सुलझा ली है कि सूर्य और तारों के भीतर ऊर्जा का निर्माण कैसे होता है। यही नहीं, विज्ञान आज पदार्थ (Matter) के परमाणुओं से भी छोटे सूक्ष्म कणों (Subatomic Particles) पर प्रयोग करने में सक्षम हो चुका है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता के सामने विज्ञान की इन्हीं उपलब्धियों का एक संपूर्ण और प्रेरणादायक विहंगम दृश्य प्रस्तुत करना है।
DNA से लेकर AI तक: फिर भी अज्ञानता क्यों?
सोसायटी के प्रतिनिधि हेम चंद्र ने जीवन विज्ञान और आधुनिक तकनीक के संगम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज जीव वैज्ञानिक जीवन के मूल अणु यानी डीएनए (DNA) के विश्लेषण से जीवन की उत्पत्ति और उसके विकास के इतिहास के सबसे गहरे रहस्यों को सुलझा रहे हैं।
मानव मस्तिष्क की जटिल तंत्रिका कोशिकाओं की कार्यप्रणाली को समझकर ही आज दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी क्रांतिकारी तकनीक के मुहाने पर खड़ी है। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा प्रश्न यह भी उठता है कि जब ज्ञान का इतना व्यापक विस्तार हो चुका है, तब भी हमारा समाज अंधविश्वासों, रूढ़ियों और अज्ञानता के अंधेरे में क्यों भटक रहा है?
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम का मूल ध्येय समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी और छात्रों में तार्किक चिंतन, जिज्ञासा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) को बढ़ावा देना है।
युवाओं और छात्रों से भागीदारी की अपील
सोसायटी के प्रवक्ता गिरीश चंद्र ने क्षेत्र के सभी छात्रों, शिक्षकों और प्रबुद्ध नागरिकों से इस बौद्धिक आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है, ताकि समाज में वैज्ञानिक चेतना का व्यापक प्रचार-प्रसार हो सके।
इस पूर्व-तैयारी बैठक में मदन सिंह मेहता, गिरीश आर्य, हेमचंद्र, जमन राम, उषा पटवाल और वीर सिंह समेत कई प्रमुख सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।