सूरजमल नर्सिंग कॉलेज में मान्यता का बड़ा विवाद: छात्रों के भविष्य पर संकट, रामनगर में उठी सख्त कार्रवाई की मांग
रामनगर:उधम सिंह नगर स्थित सूरजमल विश्वविद्यालय कॉलेज ऑफ नर्सिंग (किच्छा) में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम (GNM) पाठ्यक्रमों की मान्यता को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) की मान्यता न होने के कारण यहाँ पढ़ाई कर रहे सैकड़ों छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य अधर में लटक गया है। छात्रों के समर्थन में अब राज्य के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठन मैदान में उतर आए हैं। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (यूपीपी) की अगुवाई में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने उप जिलाधिकारी कार्यालय रामनगर के माध्यम से राज्य के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मान्यता विवाद?
किच्छा स्थित सूरजमल विश्वविद्यालय कॉलेज ऑफ नर्सिंग पर आरोप है कि संस्थान ने प्रवेश के समय छात्रों को आईएनसी (INC) की मान्यता के संबंध में स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी नहीं दी। छात्रों ने इस विश्वास के साथ दाखिला लिया कि पाठ्यक्रम को सभी आवश्यक नियामक निकायों से मंजूरी प्राप्त है। लेकिन अब सच्चाई सामने आने के बाद छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बिना मान्यता वाले संस्थान से पढ़ाई करने के कारण उनके करियर पर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा रहे हैं।
समझौते से मुकरने का आरोप, 29 जुलाई से धरना जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्र इस वर्ष जनवरी माह से ही कॉलेज प्रबंधन के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं। इस वार्ता के परिणामस्वरूप 17 फरवरी को कॉलेज प्रशासन और छात्रों के बीच एक लिखित समझौता भी हुआ था। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन अब इस समझौते का पालन करने से साफ मुकर रहा है।
प्रबंधन द्वारा दिए गए आश्वासनों की अवहेलना से नाराज छात्रों के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। अपने भविष्य को सुरक्षित करने और न्याय पाने के लिए छात्र 29 जुलाई से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने खोला मोर्चा
रामनगर में ज्ञापन सौंपते समय उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी ने कहा कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा छात्रों के साथ किया गया यह रवैया पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान जिस तरह से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उस पर प्रशासन को तुरंत कड़ा रुख अपनाना चाहिए।
इस छात्र आंदोलन को स्थानीय जनता और क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। संगठनों ने साफ किया है कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई सड़क से लेकर शासन स्तर तक लड़ी जाएगी।
ज्ञापन में की गई मुख्य मांगें
उप जिलाधिकारी कार्यालय के जरिए शासन को भेजे गए ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई गई हैं:
- सख्त कानूनी कार्रवाई: सूरजमल विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ छात्रों को भ्रमित करने और बिना आईएनसी मान्यता के पाठ्यक्रम संचालित करने के मामले में कड़ी कार्रवाई की जाए।
- वैकल्पिक शैक्षणिक व्यवस्था: अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए उनकी विधिवत और वैध वैकल्पिक शैक्षणिक व्यवस्था की जाए।
- समझौते का पालन: 17 फरवरी को हुए समझौते की शर्तों को तुरंत लागू कर छात्रों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
- उच्चस्तरीय हस्तक्षेप: राज्यपाल और मुख्यमंत्री स्वयं इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लें ताकि युवाओं का साल खराब होने से बच सके।
ज्ञापन देने वालों में ये लोग रहे शामिल
रामनगर उप जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी, सचिन लालमणि, नगर संयोजक आसिफ, इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रूहेला, संयुक्त संघर्ष समिति रामनगर के संयोजक ललित उप्रेती, परिवर्तनगामी छात्र संगठन के प्रतिनिधि रवि, ठेका मजदूर कल्याण समिति के संयोजक किसन, राज्य आंदोलनकारी रईस अहमद और किरण आर्य समेत कई अन्य प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।