नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश एक तरफ जहां आम जनजीवन के लिए आफत बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ों की रानी नैनीताल से एक बेहद सुकून देने वाली तस्वीर सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध नैनी झील, जो कुछ महीने पहले तक घटते जलस्तर के कारण संकट के दौर से गुजर रही थी, अब मानसूनी बारिश के बाद अपने पूरे शबाब पर आ गई है। बीते दो महीनों में हुई अच्छी और लगातार बारिश के चलते नैनी झील के जलस्तर में करीब 10 फीट की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। झील का पानी सामान्य स्तर से ऊपर पहुंचने के बाद सिंचाई विभाग ने जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए निकासी गेट खोल दिए हैं।
झील का जलस्तर शून्य से 10 फीट 6 इंच ऊपर पहुंचा
उत्तराखंड में मानसूनी बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। नदी-नाले उफान पर हैं और पहाड़ों में जगह-जगह भूस्खलन की खबरें आ रही हैं। लेकिन सरोवर नगरी नैनीताल के लिए यह मानसून जीवनदायिनी साबित हुआ है। गर्मी के मौसम में नैनी झील का जलस्तर तेजी से नीचे गिर गया था, जिससे स्थानीय निवासियों, पर्यावरणविदों और पर्यटकों की चिंताएं बढ़ गई थीं। झील के किनारों पर सूखापन दिखने लगा था।
हालांकि, मानसून की दस्तक के साथ ही मौसम का मिजाज बदला और झमाझम बारिश की शुरुआत हुई। सिंचाई विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नैनी झील का जलस्तर गेज के शून्य (Zero) स्तर से करीब 10 फीट 6 इंच ऊपर तक पहुंच चुका है। झील को इस तरह पानी से लबालब भरा देखकर स्थानीय प्रशासन, सिंचाई विभाग और यहां आने वाले पर्यटकों के चेहरे खिल उठे हैं।
सुरक्षा के लिहाज से खोले गए निकासी गेट
झील का जलस्तर सुरक्षित सीमा को पार कर सामान्य से अधिक हो गया, जिसके बाद सिंचाई विभाग तुरंत हरकत में आया। पानी के अत्यधिक दबाव और आसपास के निचले इलाकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग ने झील के निकासी गेट (Sluice Gates) खोल दिए हैं। गेट खुलने के साथ ही अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकाला जा रहा है। सिंचाई विभाग की टीम 24 घंटे झील के जलस्तर पर पैनी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक बारिश का दौर जारी रहेगा और जलस्तर नियंत्रित नहीं होता, तब तक जरूरत के हिसाब से पानी की निकासी की प्रक्रिया लगातार जारी रखी जाएगी।
2020 का रिकॉर्ड टूटने के कगार पर: बारिश के आंकड़ों ने चौंकाया
अगर पिछले वर्षों के मानसून से तुलना की जाए तो इस बार नैनीताल में बारिश का आंकड़ा काफी अधिक दर्ज किया गया है। मौसम के आंकड़ों में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला है।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता ललित मोहन कश्यप ने आधिकारिक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि साल 2020 में नैनीताल में कुल मिलाकर करीब 1459 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी। उस दौरान नैनी झील का जलस्तर करीब 11 फीट तक पहुंचा था। लेकिन इस साल केवल अगस्त महीने तक ही बारिश का आंकड़ा 1565 मिलीमीटर को पार कर चुका है। इसी का नतीजा है कि झील का जलस्तर इस समय 10 फीट 7 इंच के बेहद मजबूत स्तर पर बना हुआ है। अभी मानसून का सीजन पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है, ऐसे में माना जा रहा है कि बारिश के पुराने कई रिकॉर्ड इस बार टूट सकते हैं।
पर्यटन व्यवसाय और स्थानीय लोगों को मिली बड़ी राहत
नैनी झील केवल नैनीताल की पहचान नहीं, बल्कि इस खूबसूरत पहाड़ी शहर की लाइफलाइन है। शहर की पीने के पानी की आपूर्ति से लेकर यहाँ का पूरा पर्यटन उद्योग इसी झील पर टिका हुआ है। जब झील सूखने लगती है, तो शहर का आकर्षण कम होने लगता है और इसका सीधा असर पर्यटन कारोबार पर पड़ता है।
अब जब झील फिर से अपने प्राकृतिक और दिव्य स्वरूप में लौट आई है, तो यहाँ नौकायन (Boating) का आनंद ले रहे पर्यटकों का उत्साह भी देखते ही बन रहा है। झील के चारों ओर बने मॉल रोड पर घूमने आने वाले लोग लबालब भरी झील के खूबसूरत नजारों को अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं। स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि झील का भरा होना आने वाले महीनों में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा देगा।
प्रशासन की सतर्कता और आगे की तैयारी
उत्तराखंड में भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए नैनीताल जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग पूरी तरह मुस्तैद हैं। पहाड़ी इलाकों से बहकर आने वाले पानी और झील के इनफ्लो (Inflow) पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि निकासी गेट खोलने का मकसद झील के जलस्तर को एक सुरक्षित स्तर पर बनाए रखना है ताकि शहर या निचले इलाकों में किसी भी प्रकार का जलभराव या खतरा पैदा न हो। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और घबराने जैसी कोई बात नहीं है।