अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को कटघरे में खड़ा करने वाली एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। लमगड़ा ब्लॉक स्थित राजकीय इंटर कॉलेज पुभाऊं में कक्षा छह की एक मासूम छात्रा के साथ कथित रूप से बर्बर मारपीट की गई है। गृहकार्य (होमवर्क) पूरा न होने से नाराज स्कूल की एक अतिथि शिक्षिका ने आपा खोते हुए छात्रा की बेत से बुरी तरह पिटाई कर दी। घटना के बाद पीड़िता के शरीर पर गहरे चोट के निशान बन गए हैं, जिससे परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों में बेहद गुस्सा व्याप्त है।
होमवर्क न करने पर खोया आपा, बेत से बरसाए डंडे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजकीय इंटर कॉलेज पुभाऊं में कक्षा छह में पढ़ने वाली छात्रा को नियमित पढ़ाई के तहत गृहकार्य दिया गया था। बताया जा रहा है कि छात्रा पिछले चार-पांच दिनों से लगातार किसी वजह से अपना होमवर्क पूरा करके स्कूल नहीं ला पा रही थी। इसी बात को लेकर विद्यालय में तैनात अतिथि शिक्षिका काफी नाराज थीं।
घटना के दिन जब शिक्षिका ने छात्रा से गृहकार्य की कॉपी मांगी और वह फिर से काम पूरा नहीं दिखा सकी, तो शिक्षिका का गुस्सा फूट पड़ा। आरोप है कि शिक्षिका ने अपना आपा पूरी तरह खो दिया और हाथ में रखी बेत से छात्रा पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। मासूम छात्रा दर्द से चीखती रही और काफी देर तक रोती रही, लेकिन शिक्षिका का दिल नहीं पसीजा।
घर पहुंचकर परिजनों को बताई आपबीती, शरीर पर दिखे नीले निशान
स्कूल की छुट्टी होने के बाद पीड़ित छात्रा रोते-बिलखते अपने घर पहुंची। जब परिजनों ने उससे रोने का कारण पूछा और उसकी स्थिति देखी, तो उनके होश उड़ गए। छात्रा की पीठ और शरीर के पिछले हिस्से पर बेत से पिटाई के स्पष्ट और गहरे चोट के निशान उभरे हुए थे।
मासूम बच्ची की यह हालत देखकर परिजन आक्रोशित हो उठे। उन्होंने तुरंत गांव के अन्य लोगों को इसकी जानकारी दी। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक एकजुट हो गए और विद्यालय परिसर में पहुंच गए।
स्कूल में हंगामा, ग्रामीणों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
घटना से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर जोरदार हंगामा किया और दोषी अतिथि शिक्षिका के खिलाफ तत्काल व सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना देना पूरी तरह गैरकानूनी और अमानवीय है। इस प्रकार का व्यवहार बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर डालता है।
विद्यालय प्रबंधन का रुख:
“छात्रा पिछले चार-पांच दिनों से होमवर्क पूरा करके नहीं ला रही थी। इसी बात पर शिक्षिका ने उसे डांटा और पिटाई कर दी। हालांकि छात्रा के साथ मारपीट करना पूरी तरह से गलत है। परिजनों की शिकायत के आधार पर पूरे मामले की लिखित जानकारी उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अब विभागीय स्तर पर आगे की नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”
— प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज पुभाऊं
विभागीय जांच शुरू, दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता और ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए शिक्षा विभाग तुरंत हरकत में आ गया है। प्रशासनिक स्तर पर मामले का संज्ञान लेते हुए जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
प्रशासनिक बयान:
“राजकीय इंटर कॉलेज पुभाऊं में अतिथि शिक्षिका द्वारा एक छात्रा की पिटाई किए जाने की घटना संज्ञान में आई है। स्कूल समय समाप्त होने के बाद इस पूरे मामले की जानकारी प्राप्त हुई। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट में आरोप सही साबित होने पर संबंधित अतिथि शिक्षिका के खिलाफ नियमों के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
— खंड शिक्षा अधिकारी, लमगड़ा
उत्तराखंड के स्कूलों में कॉरपोरल पनिशमेंट पर उठते सवाल
इस दुखद घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत किसी भी शिक्षण संस्थान में शारीरिक दंड (Corporal Punishment) पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, इस तरह की घटनाएं बाल अधिकारों का उल्लंघन तो करती ही हैं, साथ ही बच्चों के मन में स्कूल जाने को लेकर डर भी पैदा करती हैं।
फिलहाल, पीड़ित छात्रा के परिजन और लमगड़ा क्षेत्र के ग्रामीण निष्पक्ष जांच और दोषी शिक्षिका के खिलाफ कठोर विभागीय कदम उठाए जाने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी अन्य मासूम के साथ इस प्रकार की अमानवीय घटना न दोहराई जाए।