रामनगर में संसद मार्च के छात्रों पर दमन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन, गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी की मांग
रामनगर। दिल्ली में आयोजित संसद मार्च के दौरान छात्रों और युवाओं पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में रामनगर के लखनपुर चुंगी पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। संयुक्त संघर्ष समिति, रामनगर के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में वक्ताओं ने केंद्र सरकार की दमनकारी नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने घटना के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तुरंत बर्खास्तगी की मांग उठाई।

शांतिपूर्ण संसद मार्च पर बर्बरता का आरोप
विरोध सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि 20 जुलाई को पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आयोजित संसद मार्च में देशभर से डेढ़ लाख से अधिक छात्र और युवा शामिल हुए थे। आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा था। इसके बावजूद पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने छात्र-युवाओं की जायज मांगों को सुनने के बजाय उन पर आंसू गैस के गोले दागे, वाटर कैनन का प्रयोग किया और बर्बर लाठीचार्ज किया।
वक्ताओं ने कहा कि देश का युवा लगातार बढ़ती भयंकर बेरोजगारी, परीक्षाओं में बार-बार होने वाले पेपर लीक और गिरते शैक्षणिक स्तर से निराश और आक्रोशित है। जब वे अपनी बात रखने देश की राजधानी पहुँचे, तो संवाद स्थापित करने के बजाय सरकार ने ताकत के बल पर उनके आंदोलन को कुचलने का काम किया।

छात्राओं पर अत्याचार और गुंडागर्दी के गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लाठीचार्ज में छात्राओं को भी निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का हवाला देते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने छात्राओं के साथ मारपीट की और उनका यौन उत्पीड़न भी किया।
सभा में यह भी मुद्दा उठाया गया कि कार्रवाई में शामिल कई पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की वर्दी पर नाम की पट्टियां (नेम प्लेट) गायब थीं। यही नहीं, पुलिस बल के साथ सादे कपड़ों में मौजूद असामाजिक तत्वों और गुंडों ने भी छात्रों पर जानलेवा हमले किए। इस दौरान समाचार पोर्टल ‘लल्लनटॉप’ के एक पत्रकार के साथ भी मारपीट की गई। वक्ताओं ने दावा किया कि शांतिपूर्ण भीड़ को तितर-बितर करने के लिए करंट बैटन और पैलेट गन जैसी घातक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जो लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक है।

सरकार की नीतियों पर तीखा हमला
संयुक्त संघर्ष समिति के वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान केंद्र सरकार पूरी तरह से तानाशाही और कॉरपोरेट-परस्त रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले अप्रैल-मई के महीने में जब मजदूरों ने न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन किया था, तब भी सरकार ने निर्ममता से उनका दमन किया था। अब जब देश के छात्र और नौजवान अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षा की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं, तो उन्हें भी पुलिस बल के दम पर खामोश करने की कोशिश की जा रही है।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता में देश के आम नागरिक, युवा और मजदूर नहीं हैं, बल्कि यह सरकार गिने-चुने बड़े उद्योगपतियों और पूंजीवादी घरानों के लाभ के लिए नीतियां बना रही है। उदारीकरण और निजीकरण की जनविरोधी नीतियों को तेज गति से लागू करके देश की राष्ट्रीय संपदा को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।
निशुल्क शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार की मांग
विरोध प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि जब देश की जनता अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सवाल उठाती है, तो ध्यान भटकाने के लिए सामाजिक और धार्मिक ध्रुवीकरण का सहारा लिया जाता है। वक्ताओं ने शिक्षा के तेजी से हो रहे व्यापारीकरण और निजीकरण पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि देश के हर नागरिक को प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर तक पूरी तरह निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। साथ ही हर योग्य युवा को उसकी योग्यता के अनुसार सम्मानजनक रोजगार देने की कानूनी गारंटी दी जानी चाहिए।

प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों की भागीदारी
लखनपुर चुंगी पर आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन और सभा में क्षेत्र के कई सामाजिक, राजनीतिक, मजदूर और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों तथा नागरिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में समाजवादी लोक मंच से गिरीश चंद्र और जमन राम; इंकलाबी मजदूर केंद्र से रोहित रुहेला; उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी से मोहम्मद आसिफ और किरण आर्य; महिला एकता मंच से सरस्वती जोशी और कौशल्या चुन्याल; परिवर्तनकामी छात्र संगठन से रवि कुमार और वैभव; ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) से सुमित कुमार; प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से शीला शर्मा और तुलसी छिंवाल; ‘नेकी की दीवार’ संस्था से ताराचंद्र घिल्डियाल तथा देवभूमि व्यापार मंडल से मनमोहन अग्रवाल सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने भागीदारी की।

प्रदर्शन के अंत में चेतावनी दी गई कि यदि छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो इस आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर और अधिक उग्र किया जाएगा।