NEET Paper Leak Scam: सरकार से समझौते के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने वापस लिया आंदोलन, एफआईआर रद्द करने और मुआवजे पर बनी सहमति
नई दिल्ली:देशभर में चर्चित NEET पेपर लीक घोटाले को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद संगठन ने अपना आंदोलन वापस लेने की औपचारिक घोषणा की है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी कानूनी प्राथमिकियों (FIRs) को वापस लेने और पीड़ित परिवारों को वित्तीय सहायता देने के लिखित आश्वासन पर सहमति व्यक्त की है।
केंद्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल और आंदोलनकारियों के बीच हुई तीन दौर की गहन बातचीत के बाद यह गतिरोध समाप्त हुआ। इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी ने स्पष्ट किया कि आंदोलन की वापसी सशर्त है और यदि तय समय सीमा के भीतर वादे पूरे नहीं किए गए, तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और प्रमुख मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन अच्छी नीयत और आपसी समझ के साथ इस आंदोलन को स्थगित कर रहा है। सौरव दास के अनुसार, “केंद्र सरकार के साथ बातचीत में तय हुई शर्तों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का आश्वासन मिला है। इसी भरोसे के आधार पर आंदोलन वापस लिया गया है।”
सौरव दास ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि सभी भाजपा-शासित और सहयोगी राज्यों में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करना शामिल था। सरकार ने इस मांग को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। दिल्ली में दर्ज लगभग 15 से 20 प्राथमिकियों की प्रतियां अगले तीन से चार दिनों के भीतर साझा की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, कानूनी सुरक्षा से संबंधित एक लिखित गारंटी का मसौदा तैयार किया गया है, जिसे सरकार द्वारा मंगलवार तक औपचारिक रूप से साझा किए जाने की संभावना है।
पीड़ित परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे का प्रस्ताव
आंदोलन के केंद्र में नीट धांधली के कारण प्रभावित हुए परिवारों का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल था। कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने जानकारी दी कि नीट परीक्षा में अनियमितताओं और मानसिक तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी गई थी।
सरकार ने नियमों के तहत प्रभावित परिवारों को मानद मुआवजा देने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए संगठन ने सरकार के सामने एक विस्तृत पांच-सूत्रीय मांग पत्र भी पेश किया है। इस मांग पत्र में परीक्षाओं के आयोजन, लीक रोधी तंत्र विकसित करने और व्यापक शैक्षणिक सुधारों के उपाय शामिल हैं। इन सुधारों पर विस्तृत चर्चा करने और रोडमैप तैयार करने के लिए संगठन लगभग चार सप्ताह बाद दोबारा सरकारी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेगा।
जंतर-मंतर आंदोलन की तीन मुख्य शर्तें
राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के अनुसार, जंतर-मंतर पर चले इस लंबे आंदोलन की मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगें थीं:
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: NEET पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पद छोड़ना।
- कानूनी मामलों की वापसी: देश भर में छात्रों, आयोजकों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर को रद्द करना तथा भविष्य में कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का लिखित आश्वासन।
- वित्तीय सहायता: परीक्षा रद्द होने व धांधली से प्रभावित होकर अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देना।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के साथ ही संगठन की सबसे बड़ी मांग पूरी हो गई, जिसके बाद अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर सहमति का रास्ता साफ हुआ।
Gen Z का एक बड़ा आंदोलन बनी ‘CJP’
गौरतलब है कि मई 2026 में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) देखते ही देखते देश भर के युवाओं का एक बड़ा मंच बन गई। ‘Gen Z’ पीढ़ी के इस डिजिटल और मैदानी आंदोलन ने परीक्षा सुधार, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाया। जंतर-मंतर पर हुए इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने न केवल सरकार को NEET मामले में कड़े फैसले लेने पर मजबूर किया, बल्कि भविष्य की पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की नींव भी रखी है।