नई दिल्ली:देशभर में बहुचर्चित नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गर्माहट लगातार बढ़ती जा रही है। एक तरफ जहां समाज सुधारक सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है, वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन और अधिक आक्रामक रूप ले चुका है। दिल्ली समेत पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। इस बीच सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच वार्ता के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग पर पेंच फंसा हुआ है।
तीसरे दौर की वार्ता आज, इस्तीफे पर गतिरोध बरकरार
सीजेपी और केंद्र सरकार के बीच अब तक हुई बातचीत में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर गतिरोध बना हुआ है। आज दोनों पक्षों के बीच तीसरे दौर की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है।
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने शुक्रवार की बैठक के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि मुआवजा (कम्पेनसेशन) और कानूनी मामलों को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने कहा, “बैठक में एक इन-प्रिंसिपल एग्रीमेंट (सैद्धांतिक सहमति) बनी थी और हमें उम्मीद है कि आज उसका लिखित ड्राफ्ट (रिटर्न एग्रीमेंट) भी मिल जाएगा। लेकिन हमारी जो सबसे प्रमुख और मुख्य मांग है—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा—उस पर अभी तक सरकार की तरफ से कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है।”

आशुतोष रांका ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो इस तरह की वार्ताओं का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त करना एक कदम हो सकता है, लेकिन अंतिम जवाबदेही सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री की बनती है। पेपर लीक और इसके कारण हताश होकर आत्महत्या करने वाले निर्दोष छात्रों के लिए शिक्षा मंत्री सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं, इसलिए जब तक वे पद नहीं छोड़ते, जंतर-मंतर पर सीजेपी का आंदोलन जारी रहेगा।
जंतर-मंतर बना छावनी: सुरक्षा बल तैनात, लोहे की जंजीरों और वेल्डिंग से घेराबंदी
प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल दिल्ली और खासकर जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। प्रदर्शनकारियों को संसद भवन या अन्य संवेदनशील सरकारी इमारतों की ओर बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई है।
सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए बैरिकेड्स को भारी-भरकम मजबूत लोहे की जंजीरों से आपस में बांधा गया है और कई जगहों पर इन्हें वेल्डिंग करके ज़मीन व एक-दूसरे से जोड़ दिया गया है। जंतर-मंतर के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) के जवानों की तैनाती की गई है।

दिल्ली में लगातार चौथे दिन 18 मेट्रो स्टेशन बंद, इंटरचेंज चालू
सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने लगातार चौथे दिन शनिवार को 18 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को आम यात्रियों के लिए बंद रखने का फैसला किया है।
डीएमआरसी के आधिकारिक बयान के अनुसार, सुबह 7:30 बजे से अगले आदेश तक इन 18 स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश (Entry) और निकास (Exit) पर पूरी तरह रोक रहेगी। हालांकि, यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रमुख जंक्शन स्टेशनों पर केवल लाइन बदलने (Interchange) की अनुमति दी गई है।
ये 18 मेट्रो स्टेशन रहेंगे बंद:
- लोक कल्याण मार्ग
- राजीव चौक (केवल इंटरचेंज चालू)
- पटेल चौक
- रामकृष्ण आश्रम मार्ग
- बाराखंभा रोड
- सुप्रीम कोर्ट
- सेवा तीर्थ
- जनपथ
- मंडी हाउस (केवल इंटरचेंज चालू)
- केंद्रीय सचिवालय (केवल इंटरचेंज चालू)
- आईटीओ
- दिल्ली गेट
- इंद्रप्रस्थ
- खान मार्केट
- जोर बाग
- शिवाजी स्टेडियम
- झंडेवालान
- नई दिल्ली
डीएमआरसी ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मेट्रो सेवाओं की ताजा अपडेट अवश्य जांच लें और संभव हो तो वैकल्पिक मार्गों का चयन करें। मेट्रो प्रशासन ने इस दौरान यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए खेद प्रकट किया है।
सेंट्रल दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम, आम जनता परेशान
जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन धरने और लुटियंस दिल्ली में की गई सख्त नाकेबंदी का सीधा असर राजधानी की यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। सेंट्रल दिल्ली के प्रमुख मार्गों—जैसे कनॉट प्लेस, अशोक रोड, जनपथ, और संसद मार्ग—पर प्रतिदिन भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। मेट्रो स्टेशनों के बंद होने से दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, व्यापारियों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर पुलिस चेकिंग के कारण गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
अब सभी की नजरें आज सरकार और सीजेपी के बीच होने वाली तीसरे दौर की वार्ता पर टिकी हैं। यदि आज शिक्षा मंत्री के इस्तीफे या आंदोलन को समाप्त करने पर कोई सहमति नहीं बनती, तो आने वाले दिनों में दिल्ली की सड़कें और अधिक प्रभावित हो सकती हैं।