दिल्ली में छात्रों के दमन पर रामनगर में रोष: 22 जुलाई को लखनपुर चौक पर धरना-प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग
रामनगर (उत्तराखंड): दिल्ली में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा किए गए लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों के विरोध में रामनगर में भारी आक्रोश व्याप्त है। 21 जुलाई को लखनपुर स्थित स्पोर्ट्स क्लब में संयुक्त संघर्ष समिति की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें दिल्ली की घटना की तीखी भर्त्सना की गई। समिति ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से बर्खास्त करने की मांग की है। छात्रों के आंदोलन के समर्थन में 22 जुलाई को लखनपुर चौक पर जोरदार धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया है।
जंतर-मंतर पर अनदेखी के बाद संसद मार्च को मजबूर हुए छात्र
बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश का युवा भयंकर बेरोजगारी के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है, तो दूसरी तरफ लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। अपनी जायज मांगों को लेकर छात्र जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। केंद्र सरकार ने लंबे समय से आंदोलनरत छात्रों की कोई सुध नहीं ली, जिसके कारण उद्वेलित होकर छात्रों को संसद मार्च के लिए मजबूर होना पड़ा। सरकार ने युवाओं से वार्ता कर समाधान निकालने के बजाय उनके खिलाफ दमनकारी नीति अपनाई।
पुलिस बल के साथ बिना वर्दी वाले लोगों द्वारा बर्बरता का आरोप
संयुक्त संघर्ष समिति के वक्ताओं ने दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसके बाद छात्रों पर अंधाधुंध लाठियां बरसाई गईं। इस बर्बर कार्रवाई में बड़ी संख्या में मौजूद छात्राओं को भी निशाना बनाया गया। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात जवानों ने अपनी वर्दी से नेम प्लेट हटा रखी थी। इतना ही नहीं, बिना वर्दी पहने कई अज्ञात लोग भी लाठियों से छात्रों को पीटते दिखे। इससे स्पष्ट होता है कि भाड़े के तत्वों को बुलाकर छात्रों के आंदोलन को कुचलने का षड्यंत्र रचा गया, जिसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होना नितांत आवश्यक है।
सरकार के रवैये पर सवाल, एकजुटता का आह्वान
बैठक में केंद्र सरकार के रुख की कड़ी आलोचना की गई। वक्ताओं ने कहा कि देश में जो भी वर्ग जनविरोधी नीतियों और फैसलों के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे देशद्रोही ठहराकर दबाने की कोशिश की जाती है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी मांग रहे किसानों का दमन किया गया और न्यूनतम वेतन वृद्धि की मांग कर रहे मजदूरों पर भी अत्याचार हुआ। अब अपनी मेहनत का हक और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली मांग रहे छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। ऐसी स्थिति में मजदूरों, किसानों और छात्रों को एकजुट होकर इस तानाशाही और दमनकारी रवैये का डटकर मुकाबला करना होगा।
बैठक में ये प्रतिनिधि रहे मौजूद
लखनपुर में आयोजित इस आपात बैठक में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में समाजवादी लोक मंच से गिरीश चंद्र, इंकलाबी मजदूर केंद्र से रोहित रुहेला, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी से मोहम्मद आसिफ व लालमणि, परिवर्तनकामी छात्र संगठन से रवि कुमार, महिला एकता मंच से कौशल्या चुन्याल,देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष मनमोहन अग्रवाल,प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से तुलसी छिंवाल और वरिष्ठ नागरिक गोविंद दा शामिल रहे। सभी नेताओं ने एक स्वर में 22 जुलाई को लखनपुर चौक पर होने वाले प्रदर्शन में अधिक से अधिक लोगों से पहुंचने की अपील की है।