उत्तरकाशी (उत्तराखंड):देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत जिले उत्तरकाशी में एक बार फिर भूगर्भीय हलचल ने लोगों की नींद उड़ा दी है। उत्तरकाशी जिला मुख्यालय और उसके आसपास के क्षेत्रों में देर रात हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम थी, लेकिन रात के सन्नाटे में अचानक धरती हिलने से स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई। डर के मारे कई लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और काफी देर तक खुले मैदानों में सुरक्षित स्थान की तलाश में रहे।
रिक्टर स्केल पर तीव्रता और केंद्र
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 2.4 मापी गई है। वैज्ञानिकों के लिहाज से यह एक कम तीव्रता का भूकंप है, लेकिन हिमालयी बेल्ट में होने के कारण इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारतीय भूकंप विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से उत्तर-पूर्व दिशा में करीब चार किलोमीटर दूर स्थित था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसका हाइपोसेंटर (जमीन के भीतर गहराई) मात्र पांच किलोमीटर था, जिसकी वजह से झटके स्पष्ट महसूस किए गए।
प्रशासनिक सतर्कता और आपदा प्रबंधन की तैयारी
भूकंप की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग तुरंत हरकत में आ गया। जिला आपदा परिचालन केंद्र ने जिले के सभी तहसीलों और थानों से संपर्क कर स्थिति का जायजा लिया। जिला आपदा अधिकारी शार्दुल गुसाई ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, “देर रात जिले के कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। राहत की बात यह है कि अभी तक जिले के किसी भी हिस्से से जान-माल के नुकसान या संपत्तियों के क्षतिग्रस्त होने की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।”
प्रशासन ने सभी राजस्व उपनिरीक्षकों और ग्राम प्रधानों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए हैं।
भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील है उत्तरकाशी
भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो उत्तराखंड का उत्तरकाशी जिला भूकंप की दृष्टि से जोन-4 और जोन-5 (बेहद संवेदनशील श्रेणी) में आता है। हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां की भूगर्भीय प्लेटों में लगातार हलचल होती रहती है। इससे पहले भी उत्तरकाशी ने 1991 में एक भीषण भूकंप का सामना किया था, जिसमें भारी तबाही हुई थी। यही कारण है कि यहां आने वाला एक छोटा सा झटका भी लोगों के मन में पुरानी यादें और डर पैदा कर देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय के नीचे जो ऊर्जा जमा होती है, वह इस तरह के छोटे-छोटे भूकंपों के जरिए समय-समय पर बाहर निकलती रहती है, जो एक बड़े भूकंप के खतरे को कुछ हद तक कम कर सकती है। हालांकि, इसे ‘चेतावनी’ के रूप में भी देखा जाना चाहिए ताकि निर्माण कार्यों और आपदा तैयारियों को मजबूत किया जा सके।
दहशत में रहे लोग, अफवाहों से बचने की अपील
भूकंप आने के बाद सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। लोग एक-दूसरे को फोन कर खैरियत पूछते नजर आए। रात का समय होने के कारण डर अधिक था, क्योंकि गहरी नींद में सोए लोग झटके महसूस होते ही घबराकर बाहर की ओर भागे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और डरने की जरूरत नहीं है, केवल सतर्कता बरतनी आवश्यक है।
आपात स्थिति के लिए जारी निर्देश
जिला आपदा प्रबंधन ने निवासियों के लिए कुछ बुनियादी सुरक्षा निर्देश भी दोहराए हैं:
- भूकंप के दौरान घबराएं नहीं और सुरक्षित स्थान पर बैठ जाएं।
- अगर आप घर के अंदर हैं, तो मजबूत मेज या पलंग के नीचे शरण लें।
- लिफ्ट का उपयोग न करें और सीढ़ियों से उतरते समय सावधानी बरतें।
- अफवाहें न फैलाएं और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
फिलहाल, उत्तरकाशी में जनजीवन पटरी पर लौट आया है, लेकिन प्रशासन ने अगले 24 घंटों के लिए आपदा टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्रकृति के करीब बसे इन इलाकों में आपदा प्रबंधन और सुरक्षित निर्माण ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।
