उत्तराखंड में पटरी से उतरी कानून व्यवस्था पर सामाजिक संगठनों का हल्लाबोल, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
रामनगर। उत्तराखंड में हाल के दिनों में घटित हुई आपराधिक घटनाओं और पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। रामनगर की संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। शुक्रवार को उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित एक ज्ञापन में संगठनों ने राज्य में बढ़ रहे महिला अपराधों, पुलिस प्रताड़ना और सांप्रदायिक हिंसा पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
सत्ताधारी नेताओं की संलिप्तता पर उठाए सवाल
संयुक्त संघर्ष समिति ने चम्पावत में नाबालिग युवती के साथ हुए संदिग्ध सामूहिक बलात्कार प्रकरण का प्रमुखता से उल्लेख किया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इस मामले में सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। संगठनों का कहना है कि पुलिस अब इस मामले को साजिश करार दे रही है, लेकिन उस कथित साजिश में भी भाजपा से जुड़े व्यक्तियों का ही नाम आ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आज उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में सत्ताधारी दल के नेताओं की महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में संलिप्तता की खबरें आम हो गई हैं। प्रतिनिधिमंडल ने अंकिता हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय बाद भी अंकिता को न्याय नहीं मिल पाना व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
पुलिस प्रताड़ना और आत्महत्या की घटनाओं पर गहरा रोष
ज्ञापन में सतपुली और खैरना में हुई दुखद घटनाओं पर पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया गया। बताया गया कि पौड़ी जिले के सतपुली में पंकज कुमार नामक दलित युवक और नैनीताल जिले के खैरना में बालम सिंह बिष्ट ने पुलिस प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जांच के नाम पर उन्हें अपमानित किया और डराया-धमकाया। संगठनों ने सवाल किया कि क्या उत्तराखंड पुलिस अब जनता की सुरक्षा करने के बजाय अपराधियों के साथ मिलकर आम नागरिक का उत्पीड़न करने पर उतारू हो गई है?
टिहरी की सांप्रदायिक घटना पर कार्रवाई की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने टिहरी के लम्बगांव में हुई सांप्रदायिक हिंसा का मामला भी मजबूती से उठाया। ज्ञापन के अनुसार, वहां एक निजी स्कूल की संचालिका रुबीना का घर कुछ असामाजिक तत्वों ने आग के हवाले कर दिया। वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश में नफरत की राजनीति और सांप्रदायिक घटनाओं का बढ़ना राज्य की शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख व्यक्तित्व
मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, मोहम्मद आसिफ, इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला, महिला एकता मंच की संयोजिका ललिता रावत, समाजवादी लोक मंच के महेश जोशी और वरिष्ठ अधिवक्ता अतुल कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांगें:
- चम्पावत प्रकरण की जांच: संदिग्ध सामूहिक बलात्कार मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
- पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई: सतपुली और खैरना मामलों में आरोपी पुलिस कर्मियों को तत्काल निलंबित कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- मुआवजा और नौकरी: पुलिस प्रताड़ना के कारण आत्महत्या करने वाले दोनों युवकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
- सांप्रदायिक हिंसा के दोषियों की गिरफ्तारी: टिहरी आगजनी मामले के अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और पीड़िता को सुरक्षा व उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश में कानून का इकबाल बहाल नहीं हुआ और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
