रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) से एक दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कॉर्बेट नेशनल पार्क की कालागढ़ रेंज के अंतर्गत एक नर बाघ का शव मिलने से वन महकमे में हड़कंप मच गया है। सोमवार, 18 मई 2026 को सुबह नियमित गश्त के दौरान वन कर्मियों के दल को यह शव बरामद हुआ। शुरुआती जांच के बाद वन अधिकारियों ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कर ली है।
गश्त के दौरान नाले के पास मिला बाघ का शव
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आज सुबह लगभग 9:10 बजे कालागढ़ रेंज के अंतर्गत धारा ब्लॉक, धारा बीट संख्या 0-12 में वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी के लिए रोजाना की तरह गश्ती दल क्षेत्र में निकला था। इसी दौरान गश्ती दल की नजर धारा स्रोत के सहायक नाले के समीप पड़ी, जहां एक नर बाघ मृत अवस्था में पड़ा हुआ था। गश्ती दल ने बिना समय गंवाए तत्काल इसकी सूचना वायरलेस और अन्य माध्यमों से अपने उच्चाधिकारियों को दी।

उच्चाधिकारियों ने किया मौका-मुआयना, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
बाघ की मौत की संवेदनशील सूचना मिलते ही वन विभाग के उच्च अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ तुरंत लाव-लश्कर के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। प्राथमिक जांच में राहत की बात यह रही कि मृत बाघ के नाखून, दांत, खाल और मूंछ के बाल सहित समस्त अंग पूरी तरह से सुरक्षित पाए गए। इससे शिकार (Poaching) जैसी किसी तात्कालिक घटना की आशंका कम नजर आ रही है। हालांकि, सतर्कता बरतते हुए घटना स्थल के आसपास के पूरे जंगल में गहन कॉम्बिंग (खोज अभियान) की गई, ताकि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या बाहरी तत्वों की मौजूदगी का पता लगाया जा सके। कॉम्बिंग के दौरान वन क्षेत्र में कोई भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि नहीं पाई गई है।
डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम, 8 से 10 वर्ष आंकी गई उम्र
प्रेस नोट के मुताबिक, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के कड़े नियमों और एसओपी (SOP) के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ आगे की कार्रवाई की गई। पशु चिकित्साधिकारियों के एक विशेष पैनल ने वन अधिकारियों, कर्मचारियों और गैर-सरकारी संगठन (NGO) के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मृत नर बाघ का शव विच्छेदन (Post-Mortem) किया। इसके बाद शव का सुरक्षित तरीके से निस्तारण (दाह संस्कार) कर दिया गया। पशु चिकित्साधिकारियों के पैनल के अनुसार, मृत नर बाघ की उम्र लगभग 8 से 10 वर्ष के बीच आंकी गई है।

मौत के वास्तविक कारणों के लिए विसरा सैंपल बरेली और देहरादून भेजे गए
बाघ की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है। शव विच्छेदन की प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों ने बाघ के आवश्यक आंतरिक अंगों के नमूने (विसरा सैंपल) एकत्र किए हैं। इन नमूनों को गहन रासायनिक और वैज्ञानिक जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) बरेली और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) देहरादून भेजा जा रहा है। पार्क प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट और प्रयोगशाला भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बाघ की मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का पता चल सकेगा।
मौके पर ये अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ रहे मौजूद
बाघ का शव मिलने और पोस्टमार्टम की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कॉर्बेट नेशनल पार्क और कालागढ़ रेंज से जुड़े तमाम जिम्मेदार अधिकारी और विशेषज्ञ मौके पर मुस्तैद रहे। इनमें राहुल मिश्रा (IFS), उप निदेशक, का0टा0रि0 रामनगर (नैनीताल); बिन्दर पाल, उप प्रभाग वनाधिकारी, बिजरानी/पार्क वार्डन, रामनगर; डॉक्टर दुष्यन्त शर्मा, वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी, का0टा0रि0; डॉक्टर राहुल सती, वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी, हल्द्वानी; नन्द किशोर रुवाली, वन क्षेत्राधिकारी, कालागढ़ रेंज; वीरेन्द्र अग्रवाल, वाइल्ड लाइफ वेलफेयर फाउंडेशन; सोहन सिंह पटवाल, वन दरोगा, कालागढ़ रेंज; जगमोहन सिंह रावत, वन आरक्षी, कालागढ़ रेंज; ललित मोहन चन्द्र, वन आरक्षी, कालागढ़ रेंज और राहुल पण्डग्रि, डब्लू0डब्लू0एफ0 (WWF) शामिल रहे। मीडिया सेल, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व द्वारा इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की गई है।
