रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। जनपद रुद्रप्रयाग में फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले 10 सहायक अध्यापकों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) की इस कठोर कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है। अभी भी 5 अन्य शिक्षक विभाग के रडार पर हैं, जिनकी जांच अंतिम चरण में है।
जम्मू-कश्मीर से जुड़ी फर्जी बीएड डिग्री का मामला
जांच रिपोर्ट के अनुसार, बर्खास्त किए गए इन शिक्षकों ने बीएड (B.Ed) की डिग्री हासिल करने में नियमों की धज्जियाँ उड़ाई थीं। शिक्षा विभाग के मानकों के मुताबिक, बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए स्नातक (Graduation) में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। हालांकि, इन शिक्षकों के स्नातक में अंक निर्धारित मानक से काफी कम थे।
न्यूनतम योग्यता न होने के बावजूद, इन शिक्षकों ने जम्मू-कश्मीर के संस्थानों से फर्जी तरीके से बीएड की डिग्रियां प्राप्त कीं और उनके आधार पर उत्तराखंड शिक्षा विभाग में नियुक्ति पा ली। एसआईटी (SIT) और विभागीय जांच में जब इन डिग्रियों का सत्यापन किया गया, तो नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई।
बर्खास्त किए गए शिक्षकों की सूची
जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) द्वारा जारी आदेश के बाद निम्नलिखित शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं:
- सरिता चमोला (प्राथमिक विद्यालय लाडियासू)
- अरविंद नेगी (प्राथमिक विद्यालय भटवाड़ी)
- सादेव प्रसाद (प्राथमिक विद्यालय कोटी)
- श्याम लाल (प्राथमिक विद्यालय खोड़)
- सुभाष कुमार (प्राथमिक विद्यालय चोपड़ा, जखोली)
- खजान सिंह (प्राथमिक विद्यालय कालोनी, अगस्त्यमुनि)
- अनूप पुजारी (प्राथमिक विद्यालय कोनगढ़)
- रानी देवी (प्राथमिक विद्यालय मक्कू)
- पुष्पेंद्र सिंह (प्राथमिक विद्यालय राऊस्वर्ण)
- चंदर सिंह (प्राथमिक विद्यालय करोखी, उखीमठ)
महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां वापस ली गईं
सेवा से बर्खास्तगी के साथ ही इन सभी शिक्षकों से सरकारी कार्यों की जिम्मेदारी भी तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई है। उल्लेखनीय है कि इनमें से कई शिक्षक जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यों में तैनात थे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जीवाड़े के आधार पर पद पर बने रहने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।
5 और शिक्षक रडार पर, बढ़ेगी जांच की आंच
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी थमने वाली नहीं है। जनपद के 5 अन्य शिक्षकों की डिग्रियां भी संदिग्ध पाई गई हैं, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी ने सख्त लहजे में कहा है कि यदि अन्य शिक्षकों के प्रमाणपत्रों में भी अनियमितता मिली, तो उन्हें भी तुरंत सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
शिक्षा विभाग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
रुद्रप्रयाग के जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर योग्य युवाओं का हक मारने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता हमारे लिए सर्वोपरि है।”
इस बड़ी कार्रवाई के बाद उत्तराखंड के अन्य जनपदों में भी उन शिक्षकों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिनकी नियुक्तियां बाहरी राज्यों की डिग्रियों के आधार पर हुई हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह के कदमों से सरकारी तंत्र में विश्वसनीयता बढ़ेगी और केवल योग्य अभ्यर्थी ही व्यवस्था का हिस्सा बन पाएंगे।
