रामनगर (नैनीताल): कार्बेट टाइगर रिजर्व में वन्यप्राणी सप्ताह-2026 के अवसर पर जन-जागरूकता, युवा सहभागिता और वन्यजीव संवेदनशीलता को समर्पित विभिन्न अभूतपूर्व कार्यक्रमों का सफल संचालन किया गया। इन आयोजनों के माध्यम से भावी पीढ़ी और स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण की मुख्यधारा से जोड़ने की एक प्रभावी पहल की गई, जिसके अंतर्गत क्षेत्र के विभिन्न वन परिसरों में सुबह से लेकर शाम तक कई रचनात्मक व चेतनावर्धन गतिविधियां आयोजित की गईं।

प्रातःकाल आमडण्डा वन परिसर में स्थानीय स्कूली बच्चों के लिए एक विशेष पक्षी अवलोकन एवं प्रकृति भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान ख्याति प्राप्त पक्षी विशेषज्ञों ने बच्चों को विभिन्न दुर्लभ व स्थानीय पक्षी प्रजातियों, उनके प्राकृतिक पर्यावास और वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र में उनके महत्व के बारे में अत्यंत रोचक व वैज्ञानिक जानकारियां प्रदान कीं। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर प्रकृति के सीधे संपर्क में लाना और उनके भीतर नैसर्गिक परिवेश के प्रति जुड़ाव पैदा करना रहा।

प्रकृति भ्रमण, पक्षी अवलोकन और हाथी सेवा के जरिए बच्चों ने सीखी सह-अस्तित्व की सीख
प्रकृति भ्रमण के उपरान्त, स्कूली बच्चों के मध्य हाथी दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वन्यजीव विशेषज्ञों ने हाथियों की सामाजिक संरचना, उनकी उच्च बुद्धिमत्ता और वनों के नवजीवन में उनकी अपरिहार्य भूमिका से अवगत कराया। कार्यक्रम का सबसे स्मरणीय क्षण वह रहा जब बच्चों को विभागीय हाथियों के साथ प्रत्यक्ष रूप से रूबरू होने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ। बच्चों ने अत्यंत उत्साह और अपनत्व के साथ इन हाथियों को अपने हाथों से ताजे फल, हरी सब्जियां और गन्ना खिलाया। इस सहज संपर्क ने बच्चों के कोमल मनों में प्रकृति के प्रति आत्मीयता का संचार किया, जिससे उनमें सह-अस्तित्व, जीव-दया और प्राकृतिक विरासत को सहेजने का एक अटूट संकल्प जागृत हुआ।
दूसरी ओर, कालागढ़ रेंज के अंतर्गत हाथी कैंप में विशेष ‘हाथी सेवा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कालागढ़ रेंज के फील्ड स्टाफ, कॉर्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र के वन आरक्षी प्रशिक्षुओं (फॉरेस्ट गार्ड ट्रेनीज) तथा स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। हाथियों के प्रति सम्मान और संरक्षण के संदेश को बढ़ावा देते हुए उपस्थित जनसमूह द्वारा हाथियों को कद्दू, केले एवं विशेष रूप से तैयार की गई रोटियां खिलाई गईं। इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय मानव-हाथी सह-अस्तित्व को सुदृढ़ करना और वन्यजीवों के प्रति समाज में संवेदनशीलता की भावना को गहरा करना रहा।

बौद्धिक वाद-विवाद, टाइगर सेल भ्रमण और कठपुतली शो से जन-जागरूकता की अनोखी पहल
युवा पीढ़ी की तार्किक क्षमता को परखने और उन्हें पर्यावरण नीतियों के प्रति जागरूक करने के लिए रामनगर वन विश्राम गृह में स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के मध्य एक उच्चस्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस बौद्धिक प्रतियोगिता को दो विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित किया गया था:
- जूनियर वर्ग (कक्षा 6 से 8): विद्यार्थियों ने “ईको टूरिज्म : संरक्षण का साधन अथवा वन्यजीवों हेतु चुनौती” विषय पर पर्यटन के लाभ और वन्यजीवों पर पड़ने वाले मानवीय दबावों के दोनों पक्षों पर अपनी संवेदनशील प्रस्तुतियां दीं।
- सीनियर वर्ग (कक्षा 9 से 12): छात्र-छात्राओं ने “वन्यजीव कॉरिडोर संरक्षण की आवश्यकता अथवा विकास में बाधा” जैसे गंभीर विषय पर आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास और वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के अंतसंबंधों पर अत्यंत तार्किक एवं नीतिगत विचार प्रकट किए।

प्रतियोगिता के बाद दोपहर में छात्र-छात्राओं के लिए टाईगर सेल में एक विशेष शैक्षिक भ्रमण आयोजित किया गया। भ्रमण के दौरान प्रेमा तिवारी (वन आरक्षी) ने विद्यार्थियों को बाघों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास प्रबंधन तथा पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी अपरिहार्य भूमिका के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, जिसके बाद वन्यजीव एवं बाघ संरक्षण की समकालीन चुनौतियों पर विचारोत्तेजक चर्चा संपन्न हुई।
सायंकाल के सत्र में सर्पदुली रेंज के निकटवर्ती ग्राम सुन्दरखाल में एक भव्य कठपुतली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। लोक कला के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण, वनाग्नि की रोकथाम और प्रकृति के प्रति संवेदनशील होने का संदेश दिया गया। इसके साथ ही, वन विश्राम भवन परिसर में बच्चों के लिए वन्यजीवों के व्यवहार और उनके जीवन चक्र पर आधारित शिक्षाप्रद एवं जागरूकता संबंधी फिल्में दिखाई गईं।

वन्यप्राणी सप्ताह-2026 के अंतर्गत आयोजित इन समस्त गतिविधियों के माध्यम से “प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व, वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी” का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित किया गया। कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों एवं स्थानीय समुदाय को संरक्षण की मुख्यधारा से जोड़ते हुए वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और सहभागिता की भावना को सुदृढ़ करना है, ताकि हमारी यह समृद्ध प्राकृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।