नई दिल्ली / रामनगर:उम्र महज एक आंकड़ा है, और अगर इरादे बुलंद हों तो 70 साल की उम्र में भी 10 किलोमीटर की दौड़ कोई बड़ी बात नहीं रह जाती। नई दिल्ली के ऐतिहासिक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित ‘सेखों इंडियन एयरफोर्स मैराथन 2026’ (SIM-2026) में ऐसा ही अद्भुत नजारा देखने को मिला। रामनगर के निवासी और सेना के सेवानिवृत्त कर्नल दिनेश बिष्ट ने 70 वर्ष की आयु में 10 किलोमीटर की दौड़ को महज 1 घंटा 18 मिनट में पूरा कर फिटनेस, अनुशासन और अदम्य जज्बे की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने देश के युवाओं को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
यह मैराथन भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक विशेष स्थान रखती है। 1971 के युद्ध में अपनी अद्वितीय वीरता से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले और वायुसेना के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता, फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों के बलिदान और अदम्य साहस को नमन करने के लिए इस विशाल दौड़ का आयोजन किया गया था।

12 हजार से अधिक धावकों की गूंज और वायुसेना प्रमुख ने दिखाई हरी झंडी
रविवार, 4 अक्टूबर 2026 की अलसुबह जब पूरा दिल्ली शहर गहरी नींद में था, तब जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में देशभक्ति का एक अलग ही जुनून देखने को मिल रहा था। इस दौड़ में देशभर से आए 12,000 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया। मैराथन का माहौल बेहद ऊर्जावान था। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने सुबह ठीक 05:30 बजे झंडी दिखाकर दौड़ की शुरुआत कराई।
इस मैराथन में धावकों के लिए तीन अलग-अलग श्रेणियां रखी गई थीं:
- हाफ मैराथन: 21.1 किलोमीटर की मुख्य दौड़
- 10 किलोमीटर दौड़: मध्यम दूरी की प्रतिस्पर्धी दौड़
- 5 किलोमीटर दौड़: फिटनेस और जागरूकता दौड़
इन तीनों श्रेणियों में समाज के हर वर्ग, सैन्य अधिकारियों और खेल प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। लेकिन इस पूरी भीड़ में सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया 70 वर्षीय कर्नल दिनेश बिष्ट ने, जिनकी रफ्तार और लगन ने हर किसी को प्रेरित किया।

कारगिल युद्ध में सैनिकों के जीवनरक्षक रहे कर्नल बिष्ट
कर्नल दिनेश बिष्ट केवल एक बेहतरीन धावक ही नहीं हैं, बल्कि उनका अतीत देश सेवा की गौरवगाथा से भरा रहा है। वे भारतीय सेना के सबसे कुशल और सम्मानित सर्जनों में गिने जाते हैं। 1999 के कारगिल युद्ध के कठिन दिनों में, जब सीमा पर गोलियों की गूंज और बारूद का धुआं था, तब कर्नल बिष्ट ने अग्रिम मोर्चे पर रहकर एक ओर जहाँ दुश्मनों की चुनौती का डटकर मुकाबला किया, वहीं दूसरी ओर हजारों घायल और ज़ख्मी सैनिकों का समय पर इलाज करके उन्हें नया जीवन प्रदान किया।
युद्ध के मैदान में एक सिपाही की भूमिका निभाने के साथ-साथ एक डॉक्टर के रूप में उनकी सेवाओं को आज भी सेना में बेहद सम्मान के साथ याद किया जाता है।

उत्तराखंड के पूर्व सैनिकों और वीर नारियों ने जताया गर्व
रामनगर लौटने पर कर्नल बिष्ट की इस शानदार उपलब्धि की खबर फैलते ही पूरे उत्तराखंड और सैन्य समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। वर्तमान समय में वे उत्तराखंड पूर्व सैनिक लीग के तहत रामनगर, हेमपुर, मोहान और बैपढाव क्षेत्र के अध्यक्ष के रूप में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की सेवा में निरंतर तत्पर हैं।
उनकी इस प्रेरणादायक सफलता पर उत्तराखंड लीग के अध्यक्ष मेजर जनरल एम. एल. असवाल और नैनीताल के जिलाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल बी. एस. रौतेला सहित उत्तराखंड के समस्त पूर्व सैनिकों और वीर नारियों ने उन्हें दिल से बधाइयां दीं। सभी ने एक सुर में कहा कि कर्नल बिष्ट की यह उपलब्धि न केवल पूर्व सैनिकों का मान बढ़ाती है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी को भी अपनी सेहत, अनुशासन और राष्ट्र सेवा के प्रति जागरूक रहने का संदेश देती है।

फिटनेस और अनुशासन का अटूट संदेश
70 वर्ष की आयु में 1 घंटा 18 मिनट में 10 किलोमीटर दौड़ना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए महीनों का कड़ा अभ्यास, संतुलित दिनचर्या और दृढ़ मानसिक शक्ति की आवश्यकता होती है। कर्नल बिष्ट ने साबित कर दिखाया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो बढ़ती उम्र कभी भी आपकी राह का रोड़ा नहीं बन सकती। सेखों इंडियन एयरफोर्स मैराथन 2026 में उनका यह प्रदर्शन आने वाले समय में अनगिनत लोगों को अपनी जीवनशैली सुधारने और खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करता रहेगा।