रामनगर (नैनीताल):उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपरा और प्रकृति संरक्षण के प्रतीक हरेला पर्व 2026 को इस वर्ष “हर गाँव का यही पैगाम एक पेड़ माँ के नाम” थीम के साथ बड़े स्तर पर मनाया गया। इस अभियान के तहत पीएनजीपीजी कॉलेज, रामनगर और कार्बेट टाइगर रिजर्व के मुख्यालय में हर्षोल्लास व जनसहभागिता के साथ पौधारोपण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को एक बड़े जन-आंदोलन का रूप देना है, जिससे भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया जा सके।
महाविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में रामनगर विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति में हरेला पर्व का विशेष महत्व है। यह उत्सव हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने और पर्यावरण के संवर्धन का सीधा संदेश देता है। उन्होंने युवा वर्ग और छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे बड़ी संख्या में पौधारोपण कर हरित उत्तराखंड के निर्माण में अपनी सक्रिय और महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करें।
संवेदनशीलता और संरक्षण का प्रतीक है हरेला
इस अवसर पर कार्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर और आईएफएस अधिकारी साकेत बड़ोला ने कहा कि हरेला पर्व केवल एक पारंपरिक सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति मानवीय आस्था, संवेदनशीलता और वन-वन्यजीव संरक्षण के संकल्प का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ रही वैश्विक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और पर्यावरणीय समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि हर नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अपनी माता के सम्मान में लगाना चाहिए। उन्होंने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक पहल बताया, जिसे जन-जन तक पहुंचाना बेहद आवश्यक हो चुका है।
महाविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रजातियों के छायादार और फलदार पौधों को रोपित किया गया। वहां उपस्थित अतिथियों, छात्र-छात्राओं, वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इन रोपे गए पौधों की सुरक्षा और उनके संवर्धन की शपथ ली। इसके साथ ही विद्यार्थियों को जैव विविधता संरक्षण, वनों एवं वन्यजीवों के महत्व, जल संचयन और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की भूमिका पर वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारियां दी गईं।
कार्बेट मुख्यालय में जागेश्वर से सीधा प्रसारण
इसी कड़ी में कार्बेट टाइगर रिजर्व के मुख्यालय परिसर में भी शानदार वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें रिजर्व के विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने परिसर में स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुकूल प्रजातियों के पौधे रोपे और उनके नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी ली।
उल्लेखनीय है कि हरेला पर्व 2026 के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का मुख्य शुभारंभ अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर से किया गया था। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के नागरिकों को संबोधित किया और पर्यावरण बचाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री के इस लाइव संबोधन का सीधा प्रसारण कार्बेट टाइगर रिजर्व के मुख्यालय परिसर में भी दिखाया गया। वहां मौजूद सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का उद्बोधन सुना और पर्यावरण को बेहतर बनाने के संकल्प को दोहराया।
क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
इस व्यापक अभियान के दौरान विधायक दीवान सिंह बिष्ट, फील्ड डायरेक्टर साकेत बड़ोला, उप निदेशक राहुल मिश्रा (आईएफएस), पूर्व दर्जा राज्य मंत्री दिनेश मेहरा, भाजपा प्रदेश मंत्री राकेश नैनवाल, समाजसेवी नरेंद्र शर्मा, किसान आयोग अध्यक्ष संजय डोर्बी, नैनीताल जिला उपाध्यक्ष गणेश रावत, समाजसेवी इंदर सिंह रावत, विधायक प्रतिनिधि मदन जोशी, भाजपा सदस्य पूरन नैनवाल, पार्क वार्डन बिन्दर पाल, प्रभारी प्रधानाचार्य पुनीता कुशवाहा और वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी दुष्यंत शर्मा उपस्थित रहे।
इनके अलावा प्रोफेसर नीमा राणा, प्रोफेसर सुमन कुमार, प्रोफेसर प्रभाकर त्यागी, प्रोफेसर रीमा प्रियदर्शी, प्रोफेसर नरेंद्र प्रकाश आर्य, प्रोफेसर सौरभ रावत, प्रोफेसर पंकज प्रियदर्शी, बिजरानी के वन क्षेत्राधिकारी नवीन पांडे, शोध एवं अनुश्रवण रेंज के वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद त्रिपाठी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पंकज मंदोलिया, प्रशासनिक अधिकारी मोहित राठौर और मौ. नौशाद सहित बिजरानी व शोध रेंज के वन कर्मी, महाविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और स्थानीय निवासी भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने ‘हर गाँव का यही पैगाम एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को हर घर तक पहुंचाने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने संदेश दिया कि वनों और प्रकृति को बचाना केवल वन विभाग का कार्य नहीं है, बल्कि यह हर एक नागरिक का साझा सामाजिक दायित्व है। जब तक जनसहभागिता और सामूहिक प्रयास नहीं होंगे, तब तक एक स्वच्छ और समृद्ध पर्यावरण का निर्माण संभव नहीं है।