देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाली और डॉक्टरों की एक बेहद खौफनाक लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर एक 15 वर्षीय किशोर के साथ ऐसी लापरवाही बरती कि उसकी जान ही चली गई। सड़क हादसे में घायल हुए किशोर के दाहिने गुर्दे (Right Kidney) में गंभीर चोट आई थी, लेकिन डॉक्टरों ने घोर लापरवाही दिखाते हुए उसके बाएं गुर्दे (Left Kidney) का ऑपरेशन कर दिया। इस बड़ी चिकित्सीय लापरवाही (Medical Negligence) के कारण किशोर ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले में पीड़ित परिवार को न्याय पाने के लिए चार साल तक भटकना पड़ा। स्थानीय पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने के बाद, जब पीड़ित पिता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तब जाकर अदालत के कड़े रुख के बाद थाना नेहरू कॉलोनी में पांच डॉक्टरों समेत अस्पताल संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
सड़क हादसे के बाद देहरादून के अस्पताल में कराया गया था भर्ती
पूरा मामला 3 जुलाई 2022 का है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर निवासी मैनपाल का 15 वर्षीय बेटा एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया था। हादसे में किशोर के दाहिने हाथ और दाहिने गुर्दे पर गंभीर चोटें आई थीं। गंभीर हालत को देखते हुए परिजनों ने उसे देहरादून के रिस्पना पुल स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
पीड़ित पिता मैनपाल ने अपने अधिवक्ता शिवा वर्मा के माध्यम से अदालत में दिए गए प्रार्थनापत्र में बताया कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद भी कई घंटों तक डॉक्टरों ने उनके बेटे का ऑपरेशन नहीं किया। जब परेशान परिजनों ने डॉक्टरों से देरी का कारण पूछा, तो अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया कि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर बाहर से बुलाए गए हैं, जिनके आने में समय लग रहा है।
दाएं गुर्दे में थी चोट, डॉक्टरों ने कर दिया बाएं का ऑपरेशन
परिजनों का आरोप है कि 4 जुलाई की रात को डॉक्टरों ने पहले किशोर के दाएं हाथ का ऑपरेशन किया, जबकि किशोर की हालत गुर्दे में लगी चोट के कारण अधिक नाजुक बनी हुई थी और उसे तुरंत बड़े इलाज की जरूरत थी। इसके बाद 5 जुलाई को डॉक्टरों की टीम ने किशोर को ऑपरेशन थिएटर में लिया। लेकिन डॉक्टरों ने सभी नियमों को ताक पर रखते हुए बिना सही जांच के किशोर के प्रभावित दाएं गुर्दे की जगह उसके बिल्कुल सही और स्वस्थ बाएं गुर्दे का ऑपरेशन कर दिया।
गलत ऑपरेशन होने के बाद किशोर की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। वह दर्द से तड़पने लगा। बेटे की हालत बिगड़ती देख घबराए परिजनों ने जब डॉक्टरों से उसे किसी दूसरे बड़े अस्पताल के लिए डिस्चार्ज करने की गुहार लगाई, तो डॉक्टरों ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए उसे डिस्चार्ज करने से साफ इनकार कर दिया।
दूसरे अस्पताल में रेफर करने तक हो चुकी थी देर, किशोर ने तोड़ा दम
8 जुलाई की शाम को जब किशोर की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई और वह मरने की कगार पर पहुंच गया, तब जाकर अस्पताल के डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और परिजनों को उसे किसी अन्य अस्पताल में ले जाने (रेफर करने) को कहा। परिजन आनन-फानन में बेहद गंभीर हालत में किशोर को दूसरे अस्पताल लेकर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पीड़ित पिता का कहना है कि उनके इकलौते बेटे की जान सिर्फ और सिर्फ डॉक्टरों की इस घोर लापरवाही और गलत ऑपरेशन के कारण गई है।
4 साल तक पुलिस काटती रही चक्कर, कोर्ट के आदेश पर अब दर्ज हुई FIR
बेटे की मौत के बाद न्याय की आस में पीड़ित पिता मैनपाल ने नेहरू कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन रसूखदार डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के दबाव में पुलिस ने चार साल तक इस मामले को ठंडे बस्ते में डाले रखा और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। हार मानकर पीड़ित ने अदालत की शरण ली।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचम अपर सिविल जज भारती मंगलानी ने पीड़ित के प्रार्थनापत्र को स्वीकार किया। कोर्ट ने देहरादून पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए थाना प्रभारी नेहरू कॉलोनी को तत्काल प्रभाव से आरोपी डॉक्टरों और अस्पताल संचालक के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किए।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
थाना नेहरू कॉलोनी के प्रभारी मनोज नौटियाल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद रिस्पना पुल स्थित संबंधित अस्पताल के संचालक और पांच डॉक्टरों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने अस्पताल से किशोर के इलाज से जुड़े सभी मेडिकल दस्तावेज, ऑपरेशन की रिपोर्ट्स और केस हिस्ट्री को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहनता से वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।