उत्तराखंड पुलिस 4600 ग्रेड पे विवाद: देहरादून की सड़कों पर उतरा जनसैलाब, पुलिस और प्रदर्शनकारियों में तीखी झड़प
देहरादून: उत्तराखंड में पुलिस के जवानों का ग्रेड पे 4600 रुपये किए जाने की लंबे समय से चली आ रही मांग अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनती जा रही है। सोमवार को देहरादून की सड़कों पर इस मांग को लेकर जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक जन सरोकारों से जुड़े संगठनों ने एकजुट होकर उत्तराखंड पुलिस के जवानों के समर्थन में एक विशाल ‘पुलिस अधिकार मार्च’ निकाला। इस मार्च के दौरान राजधानी में भारी हंगामा हुआ और प्रदर्शनकारियों व पुलिस बल के बीच तीखी झड़प देखने को मिली।

विभिन्न दलों और सामाजिक संगठनों ने मिलाया हाथ
पुलिस कर्मियों के अधिकारों की इस लड़ाई में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (AAP), उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) जैसी राजनीतिक पार्टियां शामिल हुईं। इसके अलावा प्रदेश के गंभीर मुद्दों पर मुखर रहने वाली मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति, जन अधिकार मंच और स्वाभिमान मोर्चा समेत कई प्रमुख सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भारी संख्या में परेड ग्राउंड के बाहर एकत्रित हुए।
बैरिकेडिंग पर मची रार, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की
परेड ग्राउंड से प्रदर्शनकारियों ने जुलूस की शक्ल में पुलिस मुख्यालय की तरफ कूच किया। जैसे ही यह विशाल आंदोलनकारी समूह सचिवालय और पुलिस मुख्यालय के समीप पहुंचा, वहां पहले से मुस्तैद भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग लगा दी थी। पुलिस द्वारा रोके जाने से आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग के ऊपर चढ़ने का प्रयास किया।

माहौल को बिगड़ता देख पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग से नीचे उतारा। इस दौरान आंदोलनकारियों और पुलिस कर्मियों के बीच काफी देर तक जमकर धक्का-मुक्की हुई और राजधानी का यह मुख्य प्रशासनिक क्षेत्र अखाड़े में तब्दील हो गया। काफी देर तक चले हंगामे के बाद जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन प्रेषित किया।
खटीमा में बड़े आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट संदीप चमोली ने इस मौके पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 और 2001 in भर्ती हुए पुलिस कांस्टेबल अपनी सेवा के 20 साल से अधिक का समय पूरा कर चुके हैं। इसके बावजूद वे आज तक अपने जायज अधिकारों और वित्तीय लाभों से वंचित हैं। चमोली ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा पहले इस संबंध में घोषणाएं की गई थीं, लेकिन इसके बावजूद आज तक पुलिस कर्मियों की 4600 ग्रेड पे की मांग को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पुलिस जवानों की यह मांग जल्द पूरी नहीं की गई, तो इस आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने एलान किया कि अगला बड़ा प्रदर्शन अतिशीघ्र मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र खटीमा में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान मार्च में शामिल सभी राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सुर में पुलिस कर्मियों का ग्रेड पे बढ़ाए जाने की मांग वाले ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

क्या है उत्तराखंड पुलिस ग्रेड पे का पूरा मामला? (समझें पूरा गणित)
उत्तराखंड पुलिस में सिपाहियों का यह विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि इसके पीछे नियमों में समय-समय पर हुए बदलावों की एक लंबी कहानी है:
- 2001 का शुरुआती नियम: उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार साल 2001 में सिपाहियों की सीधी भर्ती हुई थी। उस समय के नियमानुसार सिपाहियों की भर्ती 2000 ग्रेड पे पर होती थी। सेवा नियमावली के तहत 8, 12 और 22 साल की सेवा पूरी होने के आधार पर ग्रेड पे में बढ़ोतरी का प्रावधान था। इस नियम के तहत 8 साल की सेवा के बाद 2001 बैच के सभी सिपाहियों को 2400 का ग्रेड पे मिल गया था। इस नियम से 12 साल यानी साल 2013 में उन्हें 4600 का ग्रेड पे मिल जाना चाहिए था।
- 2013 में नियमों में बदलाव: लेकिन साल 2013 में तत्कालीन सरकार ने इस समय-सीमा को बदल दिया। नई नीति के तहत ग्रेड पे का लाभ 10, 16 और 26 साल की सेवा के बाद दिया जाना तय हुआ। इस हिसाब से भी इन सिपाहियों को वर्ष 2017 में 4600 ग्रेड पे का लाभ मिल जाना चाहिए था।
- सातवें वेतन आयोग का फेर: साल 2016 में सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के लागू होने से नियम फिर बदल गए। पहले प्रावधान यह था कि सिपाहियों का ग्रेड पे अगले प्रमोशन के अनुरूप बढ़ेगा, लेकिन नए नियमों के तहत प्रमोशन न होने की स्थिति में अगले ग्रेड पे का भुगतान करने का फैसला हुआ। 2400 और 4600 ग्रेड पे के बीच दो और वित्तीय स्लैब आ गए।
- समयावधि का बढ़कर 10, 20, 30 साल होना: इसके बाद ग्रेड पे की समयावधि को एक बार फिर संशोधित कर 10, 20 और 30 साल कर दिया गया। अप्रैल 2021 में उत्तराखंड पुलिस के पहले बैच के सिपाहियों ने अपनी सेवा के 20 साल पूरे कर लिए। 20 साल की सेवा पूरी होते ही तकनीकी रूप से वे 4600 ग्रेड पे के हकदार बन गए, और तभी से प्रदेश भर में इस मांग को लेकर पुलिस परिवारों और सामाजिक संगठनों द्वारा आंदोलन चलाया जा रहा है।