देहरादून/चमोली:उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधामों में से एक, बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी के बहुचर्चित मामले में चमोली पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसआईटी ने इस पूरे प्रकरण के मुख्य आरोपी और बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को देहरादून स्थित उसके आवास से गिरफ्तार कर लिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, चमोली पुलिस की यह कार्रवाई बेहद गोपनीय और सुनियोजित थी। पुलिस की विशेष टीम सादी वर्दी में प्रमोद नौटियाल के देहरादून आवास पर पहुंची और उसे हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी को चमोली लाया गया है, जहां पुलिस के आला अधिकारी और एसआईटी की टीम उससे मामले के विभिन्न पहलुओं को लेकर गहन पूछताछ कर रही है।
हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले ही पुलिस का एक्शन
चढ़ावा चोरी के इस मामले में आरोपी प्रमोद नौटियाल पर लंबे समय से गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई थी। खुद को फंसता देख आरोपी ने कानूनी राहत पाने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट (नैनीताल उच्च न्यायालय) की शरण ली थी। प्रमोद नौटियाल ने अपने निलंबन आदेश और पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था और मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तिथि तय की थी। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की अदालत में इस मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन इससे पहले ही चमोली पुलिस की एसआईटी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा। इस गिरफ्तारी के बाद अब मंदिर समिति और आरोपी खेमे में हड़कंप मच गया है।
चमोली पुलिस अधीक्षक का बयान: कोर्ट में पेशी की तैयारी
मामले की पुष्टि करते हुए चमोली के पुलिस अधीक्षक (SP) सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि आरोपी प्रमोद नौटियाल को रविवार देर रात देहरादून से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा:
”आरोपी प्रमोद नौटियाल से चमोली में लाकर लगातार पूछताछ की जा रही है। हमारी विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण कर रही है। पुलिस इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर रही है।”
पुलिस अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान जो भी नए तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को जल्द ही सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। पुलिस सूत्रों का यह भी मानना है कि इस मामले में कुछ और सफेदपोशों या मंदिर समिति के अन्य कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी संभव है।
क्या है पूरा मामला? कैसे हुआ था भंडाफोड़
बदरीनाथ धाम जैसे पवित्र स्थल पर चढ़ावे की चोरी का यह मामला तब सामने आया जब ‘भैरव सेना’ के संस्थापक संदीप खत्री ने इस पर खुलकर आवाज उठाई। संदीप खत्री ने सबसे पहले इस बात का सनसनीखेज खुलासा किया था कि बदरीनाथ मंदिर में देश-विदेश से आने वाले भक्तों द्वारा श्रद्धा से दिए गए दान और चढ़ावे की राशि में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और चोरी की जा रही है।
जैसे ही भैरव सेना के संस्थापक के यह आरोप सार्वजनिक हुए, वैसे ही पूरे उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भूचाल आ गया। मामला बेहद संवेदनशील और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होने के कारण प्रदेश सरकार भी बैकफुट पर आ गई।
मामले के बाद गठित हुई थीं दो जांच समितियां
विवाद बढ़ता देख बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक चार सदस्यीय आंतरिक जांच समिति का गठन किया था। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड शासन ने भी तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी थी।
प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था और चमोली पुलिस में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। तभी से एसआईटी इस मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई थी, जिसका नतीजा अब इस बड़ी गिरफ्तारी के रूप में सामने आया है।
एसआईटी की इस कार्रवाई से साफ है कि धामों की पवित्रता और जन-आस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार और प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है। अब देखना होगा कि 16 जुलाई को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और पुलिसिया पूछताछ में इस घोटाले से जुड़े कौन से नए चेहरे बेनकाब होते हैं।