- फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में स्विट्जरलैंड से हारी कोलंबिया।
- एक्स्ट्रा टाइम में आसान गोल चूकने वाले मिडफील्डर जामिंटन कैम्पाज़ को सोशल मीडिया पर दी जा रही हैं जान से मारने की धमकियां।
- कोलंबियाई फुटबॉल फेडरेशन (FCF) ने हिंसा की कड़ी निंदा की, दोषियों पर कार्रवाई की मांग।
- कैम्पाज़ डर के मारे टीम के साथ वापस कोलंबिया नहीं लौटे; फैंस को याद आया 1994 का एंड्रेस एस्कोबार का काला इतिहास।
बोगोटा/स्पोर्ट्स डेस्क: फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के नॉकआउट मुकाबले में स्विट्जरलैंड के हाथों मिली हार के बाद कोलंबियाई फुटबॉल जगत से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। कोलंबिया के स्टार मिडफील्डर जामिंटन कैम्पाज़ (Jáminton Campaz) और उनके परिवार को सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकियां (Death Threats) मिल रही हैं। इस शर्मनाक घटना के बाद कोलंबियाई फुटबॉल फेडरेशन (FCF) ने सख्त रुख अपनाते हुए इस मामले की कड़ी निंदा की है और स्थानीय अधिकारियों से दोषियों की तुरंत पहचान कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। फेडरेशन ने साफ शब्दों में कहा है कि फुटबॉल को कभी भी हिंसा और नफरत का जरिया नहीं बनने दिया जा सकता।
स्विट्जरलैंड के खिलाफ एक गलती पड़ी भारी, फैंस का फूटा गुस्सा
दरअसल, मंगलवार को राउंड ऑफ 16 के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में कोलंबिया का सामना स्विट्जरलैंड से हुआ था। निर्धारित 90 मिनट और उसके बाद 30 मिनट के एक्स्ट्रा टाइम तक दोनों टीमें 0-0 की बराबरी पर रहीं। इसके बाद मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ, जहां स्विट्जरलैंड ने कोलंबिया को 4-3 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।

अर्जेंटीना के मशहूर क्लब ‘रोजारियो सेंट्रल’ (Rosario Central) के लिए खेलने वाले 26 वर्षीय मिडफील्डर जामिंटन कैम्पाज़ को इस हार का सबसे बड़ा विलेन माना जा रहा है। मैच के एक्स्ट्रा टाइम (Extra Time) के दौरान कैम्पाज़ को गोल करने का एक बेहद आसान मौका मिला था, लेकिन उनका शॉट गोल पोस्ट से काफी बाहर चला गया। अगर वह गोल हो जाता, तो कोलंबिया क्वार्टर फाइनल में पहुंच सकता था। मैच हारते ही फैंस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और कैम्पाज़ के सोशल मीडिया हैंडल्स पर अपशब्दों और धमकियों की बाढ़ आ गई।
सुरक्षा के लिहाज से टीम के साथ वतन नहीं लौटे कैम्पाज़
सोशल मीडिया पर लगातार मिल रही धमकियों और गाली-गलौज के बाद जामिंटन कैम्पाज़ ने एहतियात के तौर पर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के कमेंट सेक्शन को ब्लॉक (Restrict) कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वह पूरी टीम के साथ वापस कोलंबिया भी नहीं लौटे हैं और सुरक्षा कारणों से किसी गुप्त स्थान पर रुके हुए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कोलंबियाई फुटबॉल फेडरेशन ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा:
”किसी भी एथलीट या उनके परिवार के सदस्यों को खेल के मैदान में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस तरह की मानसिक प्रताड़ना और धमकियों का सामना नहीं करना चाहिए। फुटबॉल हमेशा से एकता, सम्मान और उम्मीद का प्रतीक रहा है, इसे कभी भी नफरत, धमकी या हिंसा का मंच नहीं बनने दिया जा सकता।”
भावुक हुए कैम्पाज़, इंस्टाग्राम पर लिखा- ‘नफरत का कोई औचित्य नहीं’
अपनी चुप्पी तोड़ते हुए जामिंटन कैम्पाज़ ने भी इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा, “फुटबॉल का खेल हमें मुश्किल दौर से भी गुजारता है। मेरे प्यारे कोलंबिया, कृपया खेल में सम्मान की भावना को कभी न खोएं। हम किसी बात पर असहमत हो सकते हैं, निराशा और दुख महसूस कर सकते हैं, लेकिन खेल के प्रति कोई भी जुनून नफरत फैलाने या डर के साये में जीने का औचित्य नहीं बन सकता।”

याद आया 1994 का वो काला दिन: एंड्रेस एस्कोबार की हत्या
कैम्पाज़ को मिल रही इन धमकियों ने कोलंबियाई फुटबॉल के इतिहास के सबसे काले और दर्दनाक अध्याय की यादें ताजा कर दी हैं। साल 1994 में अमेरिका में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप के दौरान कोलंबिया के डिफेंडर एंड्रेस एस्कोबार (Andrés Escobar) से मेजबान अमेरिका के खिलाफ मैच में एक ‘ओन गोल’ (Own Goal – अपने ही पाले में गोल) हो गया था, जिसके कारण कोलंबिया मैच 2-1 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया था। वतन लौटने के कुछ ही दिनों बाद, कोलंबिया के मेदेलिन शहर में एक पब के बाहर एस्कोबार की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। कैम्पाज़ के मामले ने एक बार फिर दुनिया को डरा दिया है कि क्या 32 साल बाद भी कोलंबिया में फुटबॉल के नाम पर कट्टरता खत्म नहीं हुई है।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में कैसा रहा कोलंबिया का सफर?
इस विवाद से इतर, अगर टूर्नामेंट में कोलंबिया के प्रदर्शन की बात करें तो उन्होंने ग्रुप स्टेज में शानदार खेल दिखाया था। कोलंबिया ने ग्रुप K में उज्बेकिस्तान और डीआर कांगो जैसी टीमों को हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया था। इसके बाद राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में उन्होंने घाना को मात देकर राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई थी। हालांकि, स्विट्जरलैंड के मजबूत डिफेंस के आगे 120 मिनट तक जद्दोजहद करने के बाद पेनल्टी शूटआउट में उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया और उनका वर्ल्ड कप का सफर यहीं थम गया। फिलहाल, पूरी खेल दुनिया कैम्पाज़ के समर्थन में खड़ी है और खेल में हिंसा के खिलाफ सख्त कदम उठाने की वकालत कर रही है।