रामनगर।उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध कार्बेट टाइगर रिजर्व में 39वें एस.एफ.एस. (राज्य वन सेवा) के अधिकारी प्रशिक्षुओं का दस दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण एवं शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। केंद्रीय राज्य वन सेवा अकादमी, देहरादून के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 16 महिला अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 52 अधिकारियों ने भाग लिया। 03 जुलाई से 12 जुलाई तक चले इस सघन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन कार्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर वन प्रभाग तथा तराई पश्चिमी वन प्रभाग के संयुक्त समन्वय से किया गया। यह कार्यक्रम युवा वन अधिकारियों को आधुनिक वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण के व्यावहारिक धरातल से रूबरू कराने में बेहद कारगर साबित हुआ।
वैज्ञानिक वन प्रबंधन और क्षेत्रीय दायित्वों का व्यावहारिक पाठ
प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुरुआती चरण में प्रशिक्षु अधिकारियों को क्षेत्रीय वन प्रभागों की व्यावहारिक कार्यप्रणालियों से परिचित कराया गया। रामनगर वन प्रभाग में शोध शाखाओं की कार्यप्रणाली, नर्सरी प्रबंधन, असिस्टेड नेचुरल रीजनेरेशन (ए.एन.आर.) और वन अधिकारियों के क्षेत्रीय उत्तरदायित्वों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। इसके बाद, तराई पश्चिमी वन प्रभाग में वैज्ञानिक वन प्रबंधन के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान प्रशिक्षुओं को वृक्षारोपण, वन पुनर्जनन, सॉइल एंड मॉइस्चर कंजर्वेशन (एस.एम.सी.) कार्यों के साथ-साथ वनाग्नि प्रबंधन, अवैध कटान की रोकथाम, अतिक्रमण नियंत्रण और वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए खुफिया सूचना तंत्र विकसित करने की बारीकियाँ सिखाई गईं।

आधुनिक तकनीक, वन्यजीव रेस्क्यू और चिकित्सा प्रबंधन
प्रशिक्षण सत्र का मुख्य हिस्सा कार्बेट टाइगर रिजर्व के सघन क्षेत्रों में संचालित हुआ। इस दौरान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के तहत कोर और बफर जोन के प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा ने प्रशिक्षुओं को वन्यजीव चिकित्सा, ट्रेंकुलाइजेशन तकनीक (निश्चेततीकरण), वन्यजीवों के सुरक्षित रेस्क्यू अभियान और उनके उपचार व पुनर्वास की आधुनिक कार्यप्रणालियों से अवगत कराया। इसके साथ ही, उप प्रभागीय वनाधिकारी बिजरानी बिन्दर पाल ने गश्त प्रोटोकॉल, अवैध शिकार की रोकथाम और ई-सर्विलांस आधारित निगरानी प्रणालियों के व्यावहारिक पहलुओं का प्रदर्शन किया। सुरक्षा इकाई के वन क्षेत्राधिकारी संजय पाण्डे ने मुखबिर तंत्र को मजबूत करने और जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय जनता की भागीदारी पर व्याख्यान दिया।
बाघ आकलन, डेटा विश्लेषण और ई-सर्विलांस
टाइगर सेल की प्रभारी प्रेमा विष्ट ने प्रशिक्षु अधिकारियों को एम-एस्ट्राइप्स (M-STrIPES) प्रणाली के माध्यम से बाघों के आकलन, अधिवास सर्वेक्षण, लाइन ट्रांसेक्ट और कैमरा ट्रैप तकनीक का लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन दिया। अधिकारियों को सिखाया गया कि किस तरह डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर बाघों की व्यक्तिगत पहचान (स्ट्राइप पैटर्न) तय की जाती है और ई-सर्विलांस नेटवर्क के जरिए संपूर्ण वन क्षेत्र की अभेद्य निगरानी सुनिश्चित होती है।
ढेला के वन क्षेत्राधिकारी नवीन चन्द्र पाण्डे ने ईको डेवलपमेंट कमेटी (ई.डी.सी.) की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि स्थानीय समुदायों को वैकल्पिक आजीविका, स्वरोजगार और कौशल विकास से जोड़कर किस प्रकार मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम किया जा सकता है। ई.डी.सी. स्थानीय समुदायों की सहभागिता से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम है।
हाथी गलियारे और ग्रासलैंड पारिस्थितिकी का अध्ययन
प्रशिक्षण के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में अधिकारियों ने कालागढ़ हाथी शिविर का दौरा किया। वहाँ उप निदेशक राहुल मिश्रा (आई.एफ.एस.) और उप प्रभागीय वनाधिकारी अमित कुमार ग्वासीкоटी ने हाथियों के व्यवहार, हाथी कॉरिडोर के संरक्षण और मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन के व्यावहारिक समाधान साझा किए। नेचर गाइड संजय छिम्वाल ने बर्ड वॉचिंग, ग्रासलैंड (घासभूमि) प्रबंधन, सतत इको-टूरिज्म और जैव विविधता संरक्षण में वन्यजीव गलियारों की अपरिहार्य भूमिका पर प्रकाश डाला।
वैज्ञानिक सोच से मजबूत होगा वन्यजीव संरक्षण
दस दिवसीय इस सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक समापन रामनगर के ढिकुली स्थित सिलवांजा रिसोर्ट बाय निवांता में एक विदाई समारोह के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कार्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला (आई.एफ.एस.) उपस्थित रहे। अकादमी की ओर से डॉ. भानुदास नारायण पिंगले (आई.एफ.एस.) ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इस अवसर पर पार्क वार्डन बिन्दर पाल और ईको टूरिज्म यूनिट के वन क्षेत्राधिकारी ललित मोहन आर्या भी उपस्थित रहे।
फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला ने अपने संबोधन में कहा कि कार्बेट टाइगर रिजर्व और संबंधित वन प्रभागों में प्राप्त यह व्यावहारिक प्रशिक्षण इन युवा अधिकारियों के करियर में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी अधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जाकर इस वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक अनुभवों का प्रभावी उपयोग करेंगे, जिससे देश के वन एवं वन्यजीव संरक्षण तंत्र को और अधिक मजबूती मिलेगी।