देहरादून:उत्तराखंड में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के पहले चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। जारी की गई नई सूची के अनुसार, सूबे में कुल 71 लाख 33 हजार 785 मतदाता पंजीकृत हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 27 फीसदी यानी 19 लाख 4 हजार 380 मतदाताओं के गणना पत्रों (वोटर डेटा) में गंभीर त्रुटियां और विसंगतियां पाई गई हैं।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाला आंकड़ा उम्र के अंतर को लेकर सामने आया है। राज्य में करीब 2 लाख (1,99,121) मतदाता ऐसे मिले हैं, जो कागजों में अपने माता-पिता की उम्र से 15 साल से भी कम छोटे हैं। इसके अलावा लाखों मतदाताओं के खुद के नाम, भाई-बहन की उम्र के अंतर और ग्रैंड पेरेंट्स की उम्र की मैपिंग में भारी गड़बड़ी पाई गई है। चुनाव आयोग अब इन सभी 19 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी करने जा रहा है।
जिलों का हाल: देहरादून और हरिद्वार में सबसे ज्यादा विसंगतियां
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी देहरादून और धार्मिक नगरी हरिद्वार जिले में सबसे ज्यादा लापरवाही सामने आई है। देहरादून जिले में पंजीकृत कुल मतदाताओं में से 33 प्रतिशत और हरिद्वार में 31 प्रतिशत मतदाताओं की जानकारियों में भारी गड़बड़ी मिली है।
अन्य जिलों की बात करें तो उधम सिंह नगर में 29%, नैनीताल में 27%, उत्तरकाशी में 25%, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और चंपावत में 23-23%, पौड़ी गढ़वाल और पिथौरागढ़ में 21-21%, बागेश्वर में 20%, चमोली में 19% और अल्मोड़ा जिले में 16% मतदाताओं के डेटा में विसंगतियां दर्ज की गई हैं।
अजीबो-गरीब गड़बड़ियां: 92 हजार दादा-दादी अपने पोते-पोतियों से 40 साल भी बड़े नहीं!
चुनाव आयोग की इस स्क्रूटनी में कई ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं जो गले नहीं उतरतीं:
- माता-पिता और बच्चों की उम्र में 15 वर्ष से कम का अंतर: सूबे के 1,99,121 मतदाता ऐसे हैं जिनकी अपने माता-पिता से उम्र का फासला 15 साल से कम है। इसमें सबसे ज्यादा हरिद्वार (43,418) और उधम सिंह नगर (38,818) में हैं।
- माता-पिता से 50 साल से अधिक का अंतर: राज्य में 1,09,547 मतदाता ऐसे भी हैं, जिनकी और उनके माता-पिता के बीच उम्र का अंतर 50 वर्ष से अधिक दर्ज है। इसमें भी हरिद्वार (22,143) और उधम सिंह नगर (20,765) शीर्ष पर हैं।
- 92 हजार ग्रैंड पेरेंट्स की उम्र में झोल: प्रदेश में 92,114 मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जिनकी अपने दादा-दादी या नाना-नानी के बीच उम्र का अंतर 40 साल से भी कम है।
- 9 महीने से कम अंतर वाले भाई-बहन: जीवविज्ञान के नियमों को दरकिनार करते हुए 2,39,566 मतदाता ऐसे मिले हैं, जहां दो भाइयों या भाई-बहन के बीच उम्र का अंतर 9 महीने से भी कम दर्ज किया गया है।
1.77 लाख परिवारों में एक ही नाम पर 6 से ज्यादा वोटर
जांच में यह भी सामने आया कि उत्तराखंड में 1 लाख 77 हजार 833 मतदाता ऐसे हैं, जहां एक ही प्रोजेनी (वंश/परिवार) के साथ 6 से अधिक मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। इस श्रेणी में अकेले हरिद्वार जिले में 58,205 और देहरादून में 24,741 मतदाता चिह्नित किए गए हैं।
लाखों मतदाताओं के खुद के और रिश्तेदारों के नाम में गलती
डेटा एंट्री की लापरवाही का आलम यह है कि 6 लाख 55 हजार 86 मतदाताओं के खुद के नाम की स्पेलिंग या विवरण में त्रुटि है। देहरादून में ऐसे 1.71 लाख और हरिद्वार में 1.37 लाख मतदाता हैं। इसके अलावा, 5 लाख 70 हजार 077 मतदाताओं के संबंधी के नाम (प्रोजेनी मैपिंग) में और 1 लाख 5 हजार 261 मतदाताओं के रिलेटिव मैपिंग में गलतियां पाई गई हैं। यही नहीं, 5 लाख 26 हजार 228 मतदाता ऐसे भी मिले हैं जो पिछली एसआईआर सूची में अनमैप्ड (Unmapped) थे।
अब क्या होगा आगे? चुनाव आयोग लगाएगा न्याय पंचायत स्तर पर कैंप
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, जिन 19 लाख 4 हजार 380 मतदाताओं के फॉर्म में त्रुटियां हैं, उन्हें संबंधित ईआरओ (Electoral Registration Officer) की ओर से ऑनलाइन नोटिस जनरेट कर भेजे जाएंगे। इन नोटिसों को प्रिंट कर बीएलओ (BLO) के माध्यम से मतदाताओं के घर-घर पहुंचाया जाएगा।
कैसे होगा सुधार?
- नोटिस में दर्ज होगी वजह: मतदाता को मिलने वाले नोटिस में स्पष्ट लिखा होगा कि उनके डेटा में क्या गड़बड़ी है।
- कैंपों का आयोजन: नोटिस की सुनवाई के लिए न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर बनाकर विशेष कैंप लगाए जाएंगे।
- शहरी क्षेत्रों में विशेष सुविधा: मैदानी और शहरी क्षेत्रों के मतदाताओं के लिए तहसील के अलावा नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर भी कैंप आयोजित किए जाएंगे।
- दस्तावेज जमा करना अनिवार्य: मतदाता को नोटिस मिलते ही उससे संबंधित सही दस्तावेज बीएलओ को सौंपने होंगे, जिसे ईआरओ को भेजा जाएगा और डेटा दुरुस्त किया जाएगा।
राहत की बात: जिन नागरिकों को कोई नोटिस प्राप्त नहीं होता है, इसका सीधा मतलब है कि उनका नाम और मतदाता सूची में दर्ज उनकी सभी जानकारियां पूरी तरह से सही हैं।