चमोली (उत्तराखंड):देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली से एक बार फिर कुदरत के खौफनाक मंजर की तस्वीरें सामने आई हैं। भारत-चीन सीमा से सटी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण नीती घाटी में अतिवृष्टि और बादल फटने जैसी घटना के बाद तमक नाले में अचानक आए विकराल जलसैलाब ने भारी तबाही मचाई है। पानी के प्रचंड वेग और मलबे के बवंडर में 123 बीआरटीएफ सुराईथोटा द्वारा निर्मित वैली ब्रिज तिनके की तरह बह गया। इस हादसे में सीमा सड़क संगठन (BRO) का एक ऑपरेटर और एक पिकअप वाहन भी उफनते नाले में समा गए।

कुछ ही पलों में बदला मंजर, इलाके में फैली दहशत
यह घटना ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर स्थित तमक इलाके में शाम करीब 5:30 बजे के आसपास घटी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तमक क्षेत्र में एक के बाद एक लगातार तीन बार भारी अतिवृष्टि (क्लाउडबर्स्ट) हुई। इसके तुरंत बाद पहाड़ी से उतरे तमक नाले का जलस्तर कई गुना बढ़ गया। उफान पर आया नाला देखते ही देखते रौद्र रूप धारण कर चुका था। पानी और भारी पत्थरों के तेज बहाव ने सबसे पहले नाले पर बने मजबूत वैली ब्रिज को निशाना बनाया और उसे अपनी चपेट में लेकर उखाड़ फेंका।
सड़क किनारे खड़ी एक पिकअप गाड़ी (कैंपर) भी ताश के पत्तों की तरह पानी में बहती नजर आई। घटना का एक दिल दहला देने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें एक पोकलैंड मशीन उफनते पानी के बीच फंसी दिख रही है और ऑपरेटर उसे सुरक्षित बाहर निकालने की जीतोड़ कोशिश कर रहा है। वीडियो में पृष्ठभूमि से एक युवक बदहवास होकर चिल्लाते हुए कहता सुना जा सकता है— “वो बह गया… वो बह गया!”

BRO ऑपरेटर और वाहन लापता, सेना-प्रशासन में हड़कंप
हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ज्योतिर्मठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि BRO अधिकारियों से हुई वार्ता के अनुसार, नाले के मुहाने पर मशीन चला रहा एक ऑपरेटर अचानक आए पानी के तेज बहाव में लापता हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि वह पोकलैंड मशीन समेत पानी के तेज बहाव में बह गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने पुष्टि की है कि तमक नाले में आई बाढ़ में एक वैली ब्रिज, एक पिकअप गाड़ी, एक ट्रक और हवलदार रैंक के एक कर्मचारी के बहने की सूचना मिली है। अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा स्थिति की जानकारी भी लगातार जुटाई जा रही है।

नीती घाटी का संपर्क कटा, सीमावर्ती गांव अलग-थलग
तमक नाले में बने वैली ब्रिज के बह जाने से ज्योतिर्मठ-मलारी सीमांत मोटर मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है। इसके चलते नीती घाटी के दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय और देश के बाकी हिस्सों से सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है। सामरिक दृष्टि से बेहद अहम इस मार्ग के बंद होने से सेना और अर्द्धसैनिक बलों की आवाजाही पर भी असर पड़ा है।

अलकनंदा उफान पर, निचले इलाकों में अलर्ट जारी
नीती घाटी में हुई इस तबाही और लगातार जारी मूसलाधार बारिश का सीधा असर निचले इलाकों पर पड़ा है। अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीमों ने अलकनंदा नदी के तटीय क्षेत्रों में लाउडस्पीकर से मुनादी और अनाउंसमेंट शुरू कर दी है। नदी किनारे बसे लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सख्त हिदायत दी जा रही है।
प्रशासन ने आम जनता, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने और रास्ते साफ होने तक नीती घाटी की ओर यात्रा करने से पूरी तरह बचें। किसी भी जोखिम भरे क्षेत्र में न जाने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करने की सलाह दी गई है।

राहत और बचाव कार्य में जुटीं NDRF-SDRF की टीमें
हादसे की सूचना मिलते ही चमोली जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। घटनास्थल के लिए प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ (NDRF) की विशेष टीमों को तुरंत रवाना कर दिया गया है। हालांकि, दुर्गम पहाड़ी इलाका और लगातार हो रही बारिश के कारण राहत टीमों को मौके पर पहुंचने और खोजबीन अभियान चलाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई जिलों में पहले ही भारी से अति भारी बारिश का ऑरेंज/रेड अलर्ट जारी किया था। इस चेतावनी के बीच नीती घाटी में घटी इस घटना ने पूरे चमोली जिले में एक बार फिर पुराने जख्मों और कुदरत के खौफ को ताजा कर दिया है।