- तमकनाला आपदा पर CM धामी की सीधी नजर
- राहत-बचाव से लेकर कनेक्टिविटी बहाली तक हर मोर्चे पर त्वरित कार्रवाई
- CM धामी लगातार कर रहे मॉनिटरिंग, अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने के निर्देश
- प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध रखने और वैकल्पिक मार्ग तलाशने के निर्देश
- निचले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता, लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
- SEOC से 24×7 निगरानी, राहत-बचाव तंत्र अलर्ट मोड पर
चमोली (उत्तराखंड)। सीमांत जनपद चमोली के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर स्थित तमकनाला में आए अचानक उफान ने भारी तबाही मचाई है। पानी के प्रचंड वेग के कारण 123 बीआरटीएफ (सुराईथोटा) द्वारा निर्मित मजबूत बेली ब्रिज ताश के पत्तों की तरह बह गया। इस हादसे में एक व्यक्ति और एक कैंपर वाहन के तेज बहाव में समाने की खबर से हड़कंप मच गया है। घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप व्याप्त है और मलारी सीमांत क्षेत्र का संपर्क अन्य हिस्सों से पूरी तरह कट गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए शासन और प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरे घटनाक्रम पर खुद 24 घंटे नजर बनाए हुए हैं। मंगलवार को भी मुख्यमंत्री ने गढ़वाल मंडल आयुक्त और चमोली जिलाधिकारी से सीधी बात कर राहत, बचाव और कनेक्टिविटी बहाली के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए।
ग्राउंड जीरो पर उतरेंगे अधिकारी, कनेक्टिविटी बहाल करना पहली प्राथमिकता
पुल बहने से नीति घाटी और आसपास के दर्जनों गांवों का संपर्क टूट चुका है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को तुरंत ‘ग्राउंड जीरो’ पर पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन करने के आदेश दिए हैं।
आवाजाही को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए सभी संभावित विकल्पों और वैकल्पिक मार्गों पर एक साथ काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट कहना है कि राहत और पुनर्निर्माण से जुड़े कार्यों में एक मिनट की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रभावित गांवों तक पहुंचेगा राशन और दवा, नहीं होगी कोई किल्लत
सीमांत क्षेत्र होने के कारण स्थानीय निवासियों को खाने-पीने और इलाज की दिक्कत न हो, इसके लिए विशेष योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं कि:
- कट चुके गांवों में राशन, खाद्य सामग्री, पेयजल और जरूरी दवाओं की आपूर्ति किसी भी सूरत में ठप नहीं होनी चाहिए।
- अगर मुख्य मार्ग बंद रहता है, तो वैकल्पिक पैदल मार्गों, खच्चरों या आवश्यकता पड़ने पर अन्य माध्यमों से सामग्री तुरंत ग्रामीणों तक पहुंचाई जाए।
- आपातकालीन स्थिति के लिए मेडिकल टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।
SDRF और NDRF की टीमें मौके पर तैनात, 24×7 मॉनिटरिंग चालू
हादसे की सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विभाग तुरंत हरकत में आ गया। घटनास्थल पर राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष टीमों को तुरंत रवाना किया गया। स्थानीय पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें मलबे और तेज बहाव के बीच लापता व्यक्ति और वाहन की तलाश में जुटी हुई हैं।
इसके साथ ही, देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से चमोली सहित प्रदेश के सभी संवेदनशील और नदी-नालों वाले क्षेत्रों पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जा रही है। किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन के साथ त्वरित समन्वय बनाया जा रहा है।
नदी-नालों के पास अलर्ट, लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
उत्तराखंड में बदलते मौसम और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निचले और संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि आम जनता की जान-माल की सुरक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
तटीय इलाकों में लगातार मुनादी (अनाउंसमेंट) कराई जा रही है और खतरा बढ़ने की स्थिति में लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए शेल्टर होम और राहत शिविरों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
संकट के समय प्रो-एक्टिव आपदा प्रबंधन
तमकनाला की यह घटना प्राकृतिक आपदाओं की भयावहता को दर्शाती है, लेकिन घटना के तुरंत बाद जिस तरह से राहत और बचाव अभियानों को गति दी गई है, वह राज्य सरकार की मुस्तैदी को दिखाता है। भले ही कुदरत के कहर को रोका न जा सके, लेकिन सही समय पर सतर्कता, ग्राउंड स्तर पर त्वरित फैसलों और मजबूत समन्वय से बड़े नुकसान को टाला जा सकता है। फिलहाल, शासन-प्रशासन का पूरा जोर सीमांत क्षेत्र की कनेक्टिविटी बहाल करने और प्रभावितों तक त्वरित राहत पहुंचाने पर केंद्रित है।