दयारा बुग्याल में मखमली घास पर सजेगा ‘बटर फेस्टिवल’: 11,000 फीट की ऊंचाई पर मक्खन-छाछ से खेली जाएगी अनूठी होली
उत्तरकाशी।देवभूमि उत्तराखंड अपनी मनमोहक वादियों, अलौकिक अध्यात्म और समृद्ध लोक संस्कृति के लिए दुनिया भर में पहचानी जाती है। उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी विकासखंड में समुद्र तल से करीब 11,000 फीट की विशाल ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल एक बार फिर एक अद्भुत और अलौकिक लोकपर्व का साक्षी बनने जा रहा है। आगामी 17 अगस्त को यहाँ पारंपरिक ‘बटर फेस्टिवल’ यानी ‘अंढूड़ी उत्सव’ अत्यधिक धूमधाम, हर्षोल्लास और पारंपरिक आस्था के साथ आयोजित किया जाएगा। इस अनूठे उत्सव को लेकर स्थानीय निवासियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है और तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
हिमालयी ग्रामीण जीवन की जीवनशैली, पशुधन के प्रति प्रेम और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने वाला यह वार्षिक उत्सव दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय मेलार्थियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है। मखमली हरी घास के विस्तृत मैदानों (बुग्याल) में होने वाला यह आयोजन न केवल उत्तरकाशी बल्कि संपूर्ण उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है।
पवित्र देव डोली यात्रा और उत्सव का शुभारंभ
परंपरागत मान्यताओं और धार्मिक विधि-विधान के अनुसार, इस भव्य उत्सव की शुरुआत माँ जगदम्बा और स्थानीय इष्टदेव सोमेश्वर देवता की विशेष पूजा-अर्चना के साथ होती है। 16 अगस्त की अलसुबह रैथल, नटीन, बंदराणी और क्यारक समेत आसपास के कई गांवों से ग्रामीण भक्तिभाव के साथ एकत्र होंगे। सोमेश्वर देवता की पवित्र डोली के नेतृत्व में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का जत्था पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच दयारा बुग्याल की कठिन चढ़ाई के लिए प्रस्थान करेगा।
ऊंचे पर्वतीय मार्गों को पार करते हुए श्रद्धालुओं की यह यात्रा दयारा बुग्याल पहुंचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम के बाद 17 अगस्त को मुख्य समारोह का शुभारंभ होगा। हिमालय की शांत और मनोरम वादियों में जब देव डोली का आगमन होता है, तो पूरा माहौल भक्तिमय और ऊर्जावान हो उठता है।
रंगों की जगह मक्खन और छाछ से होली
इस अनूठे पर्व की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘मक्खन होली’ है। आमतौर पर होली का नाम सुनते ही गुलाल और रासायनिक रंगों का ख्याल आता है, लेकिन दयारा बुग्याल में खेली जाने वाली होली पूरी तरह प्राकृतिक और पवित्र होती है। यहाँ रंग-गुलाल के स्थान पर ताजा मक्खन, मट्ठा, दूध, दही और छाछ का इस्तेमाल किया जाता है।
दयारा की मखमली घास के विशाल मैदानों पर पूजा-अर्चना संपन्न होने के तुरंत बाद, ग्रामीण और देश-विदेश से पहुंचे पर्यटक एक-दूसरे के चेहरे पर मक्खन और छाछ लगाकर उत्सव की खुशियां बांटते हैं। इस दौरान उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों—ढोल और दमाऊं—की गूंजती थाप पर ग्रामीण लोकनृत्यों ‘रासौ’ और ‘तांदी’ की थिरकन देखते ही बनती है। हाथ में हाथ डालकर गोल घेरे में किया जाने वाला यह सामूहिक लोकनृत्य भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संदेश देता है।
प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का पर्व
अंढूड़ी उत्सव केवल मनोरंजन या पर्यटन का मेला भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा पर्यावरण और जीवनदर्शन छिपा हुआ है। यह पर्व प्रकृति के प्रति अटूट कृतज्ञता, पशुधन की समृद्धि और ग्रामीण जीवन की निरंतर खुशहाली की कामना से जुड़ा है।
ग्रीष्मकाल में ग्रामीण अपने मवेशियों (गायों और भैंसों) को चराने के लिए ऊंचाई वाले बुग्यालों में ले जाते हैं, जहाँ प्रचुर मात्रा में पौष्टिक घास उपलब्ध होती है। मानसून के समापन और शरद ऋतु के आगमन से पहले, जब ग्रामीण अपने पशुधन के साथ वापस गांवों की ओर लौटने की तैयारी करते हैं, तब वे बुग्यालों में मिले प्रचुर दूध-मक्खन के लिए प्रकृति माँ और अपने इष्टदेवों का आभार व्यक्त करते हैं। यही आभार जताने का माध्यम ‘अंढूड़ी उत्सव’ है।
पर्यटन को नई उड़ान और मुख्यमंत्री का आगमन
दयारा बुग्याल का अंढूड़ी उत्सव अब केवल स्थानीय परंपरा तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह उत्तराखंड के एडवेंचर और कल्चरल टूरिज्म का बड़ा ब्रांड बन चुका है। इस वर्ष उत्सव के विशेष अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी आयोजन समिति द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है, वहीं स्थानीय लोगों में भी भारी उत्साह है।
यह महोत्सव हिमालयी जीवन शैली को नजदीक से देखने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। दयारा बुग्याल को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में इस उत्सव की केंद्रीय भूमिका रही है। हर वर्ष इस अद्भुत नजारे को देखने और मखमली घास पर मक्खन की होली का आनंद लेने के लिए हजारों की संख्या में फोटोग्राफर्स, ट्रेकर्स और पर्यटक खिंचे चले आते हैं।
रिपोर्ट:कीर्ति निधि सजवान,उत्तरकाशी।