यमुनोत्री क्षेत्र के नौगांव ब्लॉक का दर्दनाक मामला: गड़गाड़ में अधूरा पड़ा बैली ब्रिज, जान जोखिम में डालकर गंतव्य तक पहुँच रहे ग्रामीण
उत्तरकाशी / यमुनोत्री | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट:उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में विकास के बड़े-बड़े दावों और धरातल की कड़वी सच्चाई के बीच का फासला एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। उत्तरकाशी जिले के यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसी स्तब्ध कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। यहाँ उफनते पहाड़ी नाले (गदेरे) को पार करने के लिए ग्रामीणों और महिलाओं को अपनी जिंदगी दांव पर लगानी पड़ रही है। मजबूरी का आलम यह है कि महिलाएँ एक-एक करके जेसीबी (JCB) मशीन की लोडर बकेट में बैठ रही हैं और ऑपरेटर उन्हें खौफनाक जलधारा के पार पहुँचा रहा है।
विकासखंड नौगांव का मामला: जर्जर पुल और अधूरा बैली ब्रिज
यह पूरा मामला उत्तरकाशी जिले के विकास खंड नौगांव के अंतर्गत आने वाले कुपड़ा-कुंशाला-त्रिखीली मोटर मार्ग का है। इस क्षेत्र में ग्रामीणों की आवाजाही का मुख्य आधार माना जाने वाला पुराना मोटर पुल बेहद दयनीय और खस्ताहाल स्थिति में पहुँच चुका है। बरसात और आपदा के इस मौसम में उफनते गदेरे के बीच जर्जर पुल से आवाजाही करना सीधे-सीधे मौत को न्योता देने जैसा है।
प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से गड़गाड़ स्थान पर एक नए ‘बैली ब्रिज’ (Bailey Bridge) का निर्माण कार्य शुरू तो कराया गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी यह निर्माण कार्य अधूरा लटका हुआ है। बैली ब्रिज के तैयार न होने से पूरा क्षेत्र अलग-थलग पड़ गया है और ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा के कामों, इलाज और राशन के लिए बाहर निकलना एक विकराल समस्या बन गया है।
जान जोखिम में डालकर सफर: JCB मशीन बनी आखिरी सहारा
गड़गाड़ के तेज बहाव वाले गदेरे में जैसे ही पानी का स्तर बढ़ता है, पैदल रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। ऐसे में गाँव की महिलाओं और ग्रामीणों के पास अपने घर पहुँचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचता।
इसी मजबूरी के बीच, निर्माण कार्य में जुटी जेसीबी मशीन का ऑपरेटर मशीन की लोहे की बकेट (डंपर हिस्से) में महिलाओं को एक-एक कर बैठाता है और उफनती नदी के ऊपर से हवा में लहराते हुए दूसरे किनारे तक पहुँचाता है। जरा सी चूक, संतुलन बिगड़ने या मशीन में यांत्रिक खराबी आने पर कोई भी बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता है।
यमुनोत्री क्षेत्र के दूरदराज गाँवों में रहने वाली महिलाओं, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए अस्पताल या बाजार पहुँचना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। यदि गाँव में कोई बीमार पड़ जाए, तो उसे अस्पताल तक पहुँचाना परिजनों के लिए काल से लड़ने जैसा साबित हो रहा है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, जल्द बैली ब्रिज चालू करने की माँग
कुपड़ा, कुंशाला और त्रिखीली गाँव के निवासियों में निर्माण कार्यों की कछुआ गति को लेकर भारी गुस्सा और रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल मानसूनी सीजन में इस क्षेत्र के हालात बद से बदतर हो जाते हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग और संबंधित कार्यदायी संस्थाएँ आँखें मूंदे बैठी रहती हैं।
क्षेत्रीय लोगों ने शासन और उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि गड़गाड़ में निर्माणाधीन बैली ब्रिज का काम तत्काल प्रभाव से युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को इस खतरनाक और जानलेवा सफर से निजात मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सुरक्षित आवाजाही का इंतजाम नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।