पहाड़ों पर शाम ढलते ही सन्नाटा और दहशत का पहरा!
उत्तरकाशी जिले का शांत और सुंदर डुंडा क्षेत्र इन दिनों एक अनदेखे खौफ के साए में जी रहा है। खेतों में लहलहाती फसलें हों या स्कूल जाते मासूम बच्चे, हर मोड़ पर केवल एक ही चर्चा है—’झाड़ियों के पीछे छिपा गुलदार!’ पिछले कुछ दिनों में डुंडा रेंज के अंतर्गत आने वाले गांवों और कस्बों में गुलदार (तेंदुए) की बढ़ती चहलकदमी ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। दहशत का आलम यह है कि सूरज डूबने से पहले ही लोग अपने घरों के दरवाजे बंद करने को मजबूर हो गए हैं।

खट्टूखाल गांव में खूनी झपट्टा: बालिका घायल, सहमे ग्रामीण
दहशत का यह माहौल उस वक्त और भयानक हो गया, जब खट्टूखाल गांव में दिल दहला देने वाली घटना घटी। खेतों में काम करने के दौरान अचानक झाड़ियों से निकले गुलदार ने बालिका ऋषिता पर हमला कर दिया। गुलदार के इस अचानक हमले से गांव में चीख-पुकार मच गई। हालांकि, समय रहते बालिका को बचा लिया गया, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके के लोगों के दिलों में डर का ऐसा ज़हर घोल दिया कि अब लोग अपने ही खेतों में जाने से घबरा रहे हैं। स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे नौनिहालों के चेहरे पर भी सिर्फ और सिर्फ खौफ नजर आ रहा है।

वन विभाग का बड़ा एक्शन: 4 टीमें तैनात, 24 घंटे की नाकाबंदी
घटना की गंभीरता और ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए प्रभागीय वनाधिकारी के कड़े निर्देशों पर वन विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है। पूरे डुंडा क्षेत्र को एक तरह से सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। उप प्रभागीय वनाधिकारी (धरासू) सुनील बलोनी के कुशल निर्देशन और वन क्षेत्राधिकारी (डुंडा) मुकेश रतूड़ी के नेतृत्व में 4 विशेष टीमों का गठन किया गया है।
यह टीमें कोई साधारण गश्त नहीं कर रही हैं, बल्कि सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात के घने अंधेरे तक प्रभावित इलाकों में 24 घंटे सघन पेट्रोलिंग (गश्त) कर रही हैं। वन कर्मियों की गाड़ियां लगातार उन रास्तों पर दौड़ रही हैं, जहां गुलदार के देखे जाने की सबसे ज्यादा संभावना है।

रात के अंधेरे में लाउडस्पीकर की गूंज और पटाखों का धमाका
गुलदार को आबादी वाले इलाकों से दूर खदेड़ने के लिए वन विभाग अनोखे और कड़े हथकंडे अपना रहा है। रात के सन्नाटे में वन विभाग के वाहन लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी कर रहे हैं। लाउडस्पीकर से गूंजती चेतावनियां ग्रामीणों को सतर्क रहने का संदेश दे रही हैं। इसके साथ ही, गुलदार को मानवीय बस्तियों से दूर जंगल की तरफ खदेड़ने के लिए लगातार पटाखे फोड़े जा रहे हैं। पटाखों की आवाज और सायरन की गूंज से पूरे डुंडा रेंज में रात भर हलचल बनी रहती है।
मासूमों की हिफाजत: वन कर्मी बने बच्चों के ‘सुरक्षा कवच’
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे संवेदनशील पहलू नन्हे-मुन्ने बच्चों की सुरक्षा का है। गुलदार के डर से कोई बच्चा अपनी शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए वन विभाग ने एक मिसाल कायम की है। वन विभाग की विशेष टीमें अब सुबह-सुबह बच्चों को उनके घरों से सुरक्षित स्कूल पहुंचाने और छुट्टी के समय वापस घर छोड़ने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। जब तक बच्चे सुरक्षित अपने घरों के अंदर नहीं पहुंच जाते, वन कर्मी इलाके में पैनी नजर बनाए रखते हैं।
सतर्कता ही बचाव: वन विभाग की जरूरी एडवाइजरी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने आम जनता से बेहद सतर्क रहने का आह्वान किया है और कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- अंधेरे से पहले लौटें: शाम ढलने से पहले अपने दैनिक कार्य और खेती का काम निपटाकर अपने सुरक्षित मकानों में लौट आएं।
- अकेले न निकलें: रास्तों या खेतों में अकेले निकलने से बचें। हमेशा 3 से 4 लोगों का समूह बनाकर ही बाहर निकलें और बातचीत करते हुए चलें।
- सफाई और रोशनी की व्यवस्था: अपने घरों, दुकानों और शौचालयों के आसपास उगी जंगली झाड़ियों को तुरंत काटें। घर के चारों ओर पर्याप्त लाइट या बल्ब की व्यवस्था रखें।
- छेड़छाड़ न करें: यदि गुलदार कहीं नजर आए, तो उस पर पत्थर फेंकने या उसे उकसाने की गलती बिल्कुल न करें। तुरंत दूरी बनाएं और वन विभाग को सूचित करें।
आपातकालीन स्थिति में तुरंत करें इन नंबरों पर कॉल
यदि क्षेत्र में कहीं भी गुलदार की चहलकदमी दिखाई दे या कोई आपातकालीन स्थिति बने, तो वन विभाग ने त्वरित मदद के लिए संपर्क सूत्र जारी किए हैं:
- वन क्षेत्राधिकारी (डुंडा): 9568969225
- उप वन क्षेत्राधिकारी: 7819933936
- वन दरोगा (डुंडा): 8755359921
- बीट अधिकारी (डुंडा): 8126953209
डुंडा क्षेत्र में फिलहाल वन विभाग और ग्रामीणों की सतर्कता का कड़ा इम्तिहान चल रहा है। देखना यह होगा कि वन विभाग की यह मुस्तैदी कब तक इस आदमखोर खतरे को वापस घने जंगलों में खदेड़ने में कामयाब होती है। तब तक, डुंडा वासियों के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है!
रिपोर्ट:कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी।