उत्तराखंड के स्नोबाउंड इलाकों में जनगणना 2027 का आगाज: 131 गांवों में स्वगणना शुरू, जानें घर बैठे कैसे भरें 40 सवालों के जवाब
देहरादून।उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति के साथ आबादी की गणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जनगणना के दूसरे चरण के तहत राज्य के बर्फबारी वाले यानी स्नोबाउंड इलाकों में स्वगणना (Self-Enumeration) की प्रक्रिया 17 अगस्त से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। यह प्रक्रिया 31 अगस्त तक जारी रहेगी। इस दौरान उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिलों के 131 गांवों और तीन शहरों में रहने वाले नागरिक स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
जनगणना 2027 के इस विशेष चरण का मुख्य उद्देश्य जनता की सीधी सहभागिता बढ़ाना और समय की बचत करना है। जो क्षेत्र सर्दियों में बर्फबारी के कारण दुर्गम हो जाते हैं, वहां समय से पहले ही यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है। 17 से 31 अगस्त तक चलने वाली स्वगणना के बाद, 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर डेटा का सत्यापन करेंगे।
कैसे काम करेगा पोर्टल? जानिए स्वगणना की पूरी प्रक्रिया
डिजिटल गणना को आसान बनाने के लिए भारत सरकार ने एक समर्पित पोर्टल se-snowbound.census.gov.in लॉन्च किया है। नागरिक अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर के माध्यम से इस पोर्टल पर जाकर खुद गणना कर सकते हैं। प्रक्रिया बेहद सरल है:
- लॉगिन और लोकेशन: सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाकर मोबाइल नंबर और कैप्चा डालकर लॉगिन करना होगा। लॉगिन के बाद अपने स्थान का चयन और जियो-टैगिंग (Geo-tagging) करनी होगी।
- 40 प्रश्नों की सूची: स्थान की पुष्टि होते ही पोर्टल पर 40 सवालों की सूची सामने आएगी। परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए इन 40 सवालों का जवाब देना होगा।
- विकल्प चुनने की छूट: अंतिम 5 सवालों को पूरी तरह से वैकल्पिक (Optional) रखा गया है। इनमें पहचान से जुड़े दस्तावेज और विवरण शामिल हैं। यदि कोई नागरिक इन्हें साझा नहीं करना चाहता, तो इन प्रश्नों को स्किप किया जा सकता है।
- 11 अंकों की स्वगणना आईडी (SC ID): सभी जानकारियां भरने और फॉर्म सबमिट करने के बाद सिस्टम 11 अंकों की एक विशेष ‘स्वगणना आईडी’ जेनरेट करेगा, जो एसएमएस के जरिए पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भी भेजी जाएगी।
1 सितंबर से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक, ऐसे आसान होगी जांच
जब 1 सितंबर से प्रगणक डोर-टू-डोर सत्यापन के लिए पहुंचेंगे, तो नागरिकों को केवल अपनी 11 अंकों की स्वगणना आईडी उन्हें दिखानी होगी। प्रगणक जैसे ही इस आईडी को अपने जनगणना ऐप में दर्ज करेगा, नागरिक द्वारा भरी गई पूरी जानकारी उनकी स्क्रीन पर आ जाएगी।
यदि ऑनलाइन फॉर्म भरते समय किसी प्रकार की मानवीय भूल या त्रुटि हो गई हो, तो उसे प्रगणक के आगमन के समय मौके पर ही संशोधित कराया जा सकेगा। एक परिवार के लिए इस पूरी प्रक्रिया में औसतन 1 घंटे का समय लगेगा। परिवार का मुखिया पूरे परिवार की ओर से यह फॉर्म भर सकता है।
दुर्गम क्षेत्रों के लिए समय से पहले विशेष तैयारी
उत्तराखंड जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की प्रतिकूलता के कारण बाद में पहुंचना कठिन हो जाता है। इसी वजह से इन इलाकों में 15 दिनों का विशेष स्वगणना अभियान चलाया जा रहा है।
जो नागरिक वर्तमान में अपने मूल गांव में मौजूद नहीं हैं और किसी अन्य स्थान पर रह रहे हैं, वे भी पोर्टल पर अपने मूल क्षेत्र की लोकेशन मैप करके वहां से स्वगणना की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यह सुविधा प्रवासियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
पीएम मोदी की अपील: ‘जनगणना के लिए निकालें एक घंटे का समय’
15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से इस पारदर्शी और आधुनिक व्यवस्था में भाग लेने का आह्वान किया था। उन्होंने नागरिकों से जनगणना कार्य के लिए कम से कम एक घंटे का समय निकालने और स्वगणना में बढ़कर हिस्सा लेने की अपील की थी। डिजिटल तरीके से दर्ज किया गया डेटा न केवल त्रुटियों को कम करेगा, बल्कि देश के सटीक नीति-निर्धारण में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।