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केदारनाथ यात्रा 2026: धाम में तैयारियां तेज, कपाट खुलने से पहले थारू ग्लेशियर मार्ग बहाल


रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा 2026 को लेकर उत्तराखंड में तैयारियां तेज हो गई हैं। बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) और जिला प्रशासन ने मिलकर केदारनाथ धाम में व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मौसम साफ होते ही पिछले दो दिनों में तैयारियों ने रफ्तार पकड़ी है। 22 अप्रैल को कपाट खुलने से पहले पेयजल, बिजली और यात्रा मार्ग को दुरुस्त करने का काम तेजी से किया जा रहा है।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में इस साल की यात्रा को लेकर माहौल पूरी तरह तैयारियों के रंग में रंग चुका है। जैसे ही मौसम ने साथ दिया, प्रशासन और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने काम की रफ्तार कई गुना बढ़ा दी। धाम में हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं, ताकि कपाट खुलने के दिन श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

पिछले कुछ समय से लगातार हो रही बर्फबारी के कारण केदारनाथ में कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हो गई थीं। लेकिन अब मौसम साफ होने के साथ ही इन्हें बहाल करने का काम तेजी से जारी है। बीकेटीसी का एडवांस दल पहले ही धाम में पहुंच चुका है और वहीं डेरा डालकर मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने में जुटा हुआ है। पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था और आवासीय सुविधाओं को सुचारू बनाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

दूसरी ओर जिला प्रशासन भी यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों की टीम लगातार निरीक्षण कर रही है। खासतौर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यात्रा शुरू होने से पहले हर जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध हो जाए।

इस बीच सबसे बड़ी चुनौती बने बर्फ और ग्लेशियर को भी तेजी से हटाया जा रहा है। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, ऐसे में हर विभाग के लिए समय कम और काम ज्यादा है। प्रशासन का दावा है कि इस बार यात्रा पहले से ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाजनक होगी।

बीकेटीसी के सदस्य विनीत पोश्ती के अनुसार, मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों से बर्फ हटाने का काम लगातार जारी है। इस कार्य में आईटीबीपी के जवान भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनकी मदद से कठिन इलाकों में जमी बर्फ को हटाकर रास्तों को साफ किया जा रहा है। मौसम के खुलते ही काम में तेजी आई है और अब सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

वहीं, गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर भी बड़ी राहत की खबर सामने आई है। हाल ही में लिनचौली के पास थारू ग्लेशियर टूटने से करीब 100 मीटर रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। भारी बर्फ और मलबे के कारण यह मार्ग बंद हो गया था, जिससे यात्रा की तैयारियों पर असर पड़ सकता था।

लेकिन मजदूरों और तकनीकी टीम ने कड़ी मेहनत करते हुए इस चुनौती को पार कर लिया। दिन-रात काम कर बर्फ और मलबा हटाया गया और अब यह रास्ता फिर से आवाजाही के लिए तैयार कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में बड़े-बड़े ग्लेशियर लगातार चुनौती बने हुए हैं, लेकिन टीम पूरी मुस्तैदी के साथ रास्तों को सुरक्षित बनाने में जुटी है।

इस पूरी कवायद का मकसद साफ है—इस साल की Kedarnath Yatra 2026 को सुरक्षित, सुगम और यादगार बनाना। प्रशासन और बीकेटीसी की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और यात्रा के दौरान उन्हें किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

जैसे-जैसे 22 अप्रैल की तारीख नजदीक आ रही है, केदारनाथ धाम में तैयारियों की रफ्तार और तेज होती जा रही है। बर्फ से ढके इस पवित्र धाम को फिर से श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सजाया जा रहा है।

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