कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 2 वर्षीय नर गुलदार का शव बरामद, बाघ के साथ आपसी संघर्ष में मौत की पुष्टि
रामनगर/कालागढ़: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (Corbett Tiger Reserve) से एक दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कॉर्बेट के अंतर्गत आने वाले कालागढ़ वन प्रभाग की फाटो रेंज में एक दो वर्षीय नर गुलदार (तेंदुए) का शव बरामद हुआ है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ हुआ है कि गुलदार की मौत किसी शिकारी या मानवीय गतिविधि के कारण नहीं, बल्कि जंगल में वन्यजीवों के बीच होने वाले आपसी वर्चस्व की जंग में हुई है। गुलदार पर एक भारी-भरकम बाघ (Tiger) ने हमला किया था, जिसके चलते उसकी जान चली गई।
सुबह गश्त के दौरान मिला शव
मिली जानकारी के मुताबिक, 24 मई 2026 की सुबह जब वन विभाग की टीम रोज़मर्रा की तरह गश्त पर निकली थी, तब फाटो पूर्वी बीट संख्या 47 में बाउंड्री पिलर नंबर 07 के पास एक नर गुलदार अचेत अवस्था में पड़ा हुआ दिखाई दिया। जब वन कर्मियों ने पास जाकर देखा तो गुलदार की मौत हो चुकी थी। इस घटना की जानकारी तुरंत ही वायरलेस और दूरभाष के माध्यम से वन प्रभाग के उच्चाधिकारियों को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम में हड़कंप मच गया और उच्चाधिकारी दलबल के साथ मौके पर रवाना हो गए।

पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों का विशेष पैनल गठित
वन्यजीव की मौत के संवेदनशील मामले को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए। मृत नर गुलदार के शव का पूरी पारदर्शिता और वैज्ञानिक पद्धति से परीक्षण कराने के लिए पशु चिकित्सकों का एक विशेष पैनल गठित किया गया। इस पैनल में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा और पश्चिमी वृत्त हल्द्वानी के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल सती को शामिल किया गया।
डॉक्टरों के इस विशेषज्ञ पैनल ने उप प्रभागीय वनाधिकारी कालागढ़ अमित कुमार ग्वासीकोटी की उपस्थिति में शिकारीकुआं वन परिसर में नर गुलदार के शव का विस्तृत पोस्टमार्टम (Postmortem) संपन्न किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ के हमले की पुष्टि, सभी अंग सुरक्षित
विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा किए गए पोस्टमार्टम के बाद जो रिपोर्ट सामने आई, उसने मौत के कारणों पर से पूरी तरह पर्दा हटा दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि मृत नर गुलदार की उम्र लगभग 2 वर्ष थी। उसकी मृत्यु का मुख्य कारण आपसी संघर्ष (Territorial Fight) के दौरान एक बाघ द्वारा किया गया हमला था। बाघ के घातक हमले के कारण गुलदार गंभीर रूप से घायल हो गया था और वह चोटें बर्दाश्त नहीं कर पाया।
वन्यजीव तस्करी की आशंकाओं को खारिज करते हुए अधिकारियों ने बताया कि मृत नर गुलदार के समस्त अंग पूरी तरह से सुरक्षित पाए गए हैं। उसके नाखून, खाल, दांत और अन्य अंग बिल्कुल महफूज़ थे, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि इस घटना में किसी भी प्रकार की अवैध शिकार (Poaching) या तस्करी की कोई भूमिका नहीं है।

घटनास्थल के आसपास चलाया गया सघन कॉम्बिंग अभियान
नर गुलदार का शव मिलने के तुरंत बाद वन विभाग की सुरक्षा टीम अत्यधिक सतर्क हो गई। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या शिकारियों की मौजूदगी की आशंका को पूरी तरह से खत्म करने के लिए घटनास्थल और उसके आसपास के पूरे इलाके में एक सघन कॉम्बिंग (Search Operation) अभियान चलाया गया। खोजी कुत्तों और वन कर्मियों की मदद से आस-पास के घने जंगलों को खंगाला गया। हालांकि, इस सर्च ऑपरेशन के दौरान पूरे क्षेत्र में किसी भी प्रकार की असामान्य, संदिग्ध गतिविधि या आपत्तिजनक सामग्री/हथियार नहीं पाए गए, जिससे विभाग ने राहत की सांस ली।
अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में हुआ अंतिम संस्कार
गुलदार के शव का पोस्टमार्टम होने और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नियमों के तहत सभी कानूनी व कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आगे की कार्रवाई की गई। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के समक्ष शव का मौका पंचनामा तैयार किया गया। इसके बाद, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और तय प्रोटोकॉल के अनुरूप मृत नर गुलदार के सभी अंगों सहित उसके शव को मौके पर ही विधिवत रूप से जलाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया गया, ताकि भविष्य में इसके अंगों का कोई दुरुपयोग न हो सके।

इस पूरी विधिक और प्रशासनिक कार्यवाही के दौरान उप प्रभागीय वनाधिकारी कालागढ़ अमित कुमार ग्वासीकोटी, वन क्षेत्राधिकारी झिरना दीपक कुमार तिवारी, विश्व प्रकृति निधि (WWF) के प्रतिनिधि राहुल पण्डाग्रे, वन दरोगा तरुण कुमार, वन आरक्षी दयाल सिंह बिष्ट, वन आरक्षी धनीराम जदली एवं झिरना रेंज के कई अन्य कर्मचारी और मीडिया सेल के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।