देहरादून: देश के ग्रामीण विकास और रोजगार क्षेत्र में आज यानी 1 जुलाई 2026 से एक ऐतिहासिक बदलाव हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर अब ‘विकसित भारत- रोजगार और आजीविका गारंटी योजना’ (वीबी-जी राम-जी / VB-GRAM-G) को पूरे देश में लागू कर दिया है। इस नई योजना के लागू होने के साथ ही केंद्र सरकार ने ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार की नई और बढ़ी हुई मजदूरी दरें भी जारी कर दी हैं। उत्तराखंड में इस योजना को लेकर तैयारियां पूरी हैं और राज्य के 7.58 लाख सक्रिय श्रमिकों में से 92 फीसदी की ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
देशभर में लागू हुई VB-GRAM-G योजना, अब ₹300 से कम नहीं होगी मजदूरी
केंद्र सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत अब देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दैनिक मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी। भारत सरकार ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर रोजाना 300 रुपये की न्यूनतम आधार मजदूरी (Minimum Base Wage) तय की है।
इस ऐतिहासिक फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन राज्यों को मिलेगा, जहां अब तक मनरेगा के तहत मजदूरी 300 रुपये से काफी कम थी। इन राज्यों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। वीबी-जी राम-जी योजना पूरे देश के साथ-साथ उत्तराखंड में भी प्रभावी हो गई है, जिससे प्रदेश के मजदूरों की दैनिक कमाई में 15 से 25 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
औसत दैनिक मजदूरी में बड़ी बढ़ोतरी: उत्तराखंड में ₹252 से पार हुआ आंकड़ा
इस नई अधिसूचना के जारी होने के बाद अब देश में औसत दैनिक मजदूरी 299 रुपये से बढ़कर 327 रुपये से अधिक हो जाएगी। अगर उत्तराखंड की बात करें तो पुरानी मनरेगा योजना के तहत यहां मजदूरों को प्रतिदिन केवल 252 रुपये मिलते थे। लेकिन अब ‘विकसित भारत- रोजगार और आजीविका गारंटी योजना (ग्रामीण)’ के प्रभावी होने के बाद उत्तराखंड में भी दैनिक मजदूरी ₹300 के पार पहुंच गई है, जिससे ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
उत्तराखंड में 92% श्रमिकों की ई-केवाईसी और ग्राम पंचायतों की मैपिंग पूरी
उत्तराखंड में वीबी-जी राम-जी योजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए ग्राम्य विकास सचिव धीराज गर्ब्याल ने राज्य स्तरीय अधिसूचना जारी कर दी है। प्रदेश में इस योजना को एक मिशन के रूप में चलाने की तैयारी है।
प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता व्यवस्था करते हुए उत्तराखंड की सभी 7,817 ग्राम पंचायतों की डिजिटल मैपिंग कर दी गई है। इस मैपिंग से जुड़ी पूरी जानकारी केंद्र सरकार के युक्तिधारा पोर्टल (Yuktidhara Portal) पर अपलोड की जा चुकी है। इसके अलावा, राज्य के कुल 7.58 लाख सक्रिय श्रमिकों में से 92% से अधिक श्रमिकों का ई-केवाईसी वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
विकसित भारत-2047 के विजन पर आधारित है नई योजना
दरअसल, भारत सरकार ने ‘विकसित भारत- 2047’ के बड़े विजन को ध्यान में रखते हुए मनरेगा के ढांचे में बदलाव कर ‘वीबी-जी राम-जी’ योजना को लाने का निर्णय लिया था। इस योजना को 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में एक साथ लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने 11 मई को ही मुख्य अधिसूचना जारी कर दी थी।
केंद्र ने सभी राज्यों को 30 जून तक अपनी-अपनी अधिसूचना जारी करने के सख्त निर्देश दिए थे। उत्तराखंड सरकार ने इस दिशा में तत्परता दिखाते हुए समय से पहले ही तैयारियां शुरू कर दी थीं, जिसके कारण आज से यह योजना जमीन पर पूरी तरह प्रभावी हो गई है।
योजना के तहत 318 तरह के कार्यों को मिली मंजूरी
ग्रामीण विकास को रफ्तार देने के लिए वीबी-जी राम-जी योजना का दायरा काफी विस्तृत किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत चार मुख्य थीम पर आधारित कुल 318 प्रकार के कार्यों को मंजूरी दी गई है। इन कार्यों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
- जल सुरक्षा: जल संरक्षण और जल स्रोतों के विकास से जुड़े 107 तरह के काम।
- ग्रामीण आजीविका: ग्रामीणों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन से जुड़े 86 तरह के काम।
- ग्रामीण अवस्थापना: गांवों में बुनियादी ढांचे और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से जुड़े 88 तरह के काम।
- आपदा न्यूनीकरण: आपदा के प्रभाव को कम करने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े 37 तरह के काम।
इसके साथ ही, पुरानी मनरेगा योजना के तहत स्वीकृत किए जाने वाले पारंपरिक कार्यों को भी इस नई वीबी-जी राम-जी योजना में समाहित किया गया है, ताकि गांवों का चौतरफा विकास सुनिश्चित हो सके।