उत्तराखंड में कुदरत का कहर: 12 जिलों में अचानक बाढ़ का मंडराया खतरा, तबाही के बाद आपदा प्रबंधन तंत्र हाई अलर्ट पर
देहरादून:पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसूनी बारिश ने विकराल रूप धारण कर लिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते राज्य के ज्यादातर इलाकों में नदियां और नाले उफान पर हैं। इस बीच मौसम विभाग के फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने राज्य के लिए 24 घंटों का गंभीर बुलेटिन जारी किया है। आशंका जताई गई है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों में कम से मध्यम स्तर का फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ आने का भारी जोखिम बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार ढीली मिट्टी वाले पहाड़ी ढलानों और निचले मैदानी इलाकों में पानी का तेज बहाव, जलभराव और भूस्खलन भारी तबाही मचा सकता है।
इन 12 जिलों में सबसे ज्यादा जोखिम
फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन के मुताबिक राज्य के 13 में से 12 जिलों पर कुदरत का खतरा मंडरा रहा है। अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल के संवेदनशील जलभराव वाले क्षेत्रों में अगले 24 घंटे बेहद नाजुक माने जा रहे हैं।
पहाड़ी इलाकों में अचानक जलस्तर बढ़ने और मिट्टी धंसने की घटनाएं तेजी से सामने आ रही हैं, जिससे आम जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
चमोली में जलसैलाब ने मचाई तबाही, चीन सीमा से कटा संपर्क
उत्तराखंड में बारिश से उत्पन्न हुई तबाही की तस्वीर चमोली जिले से सामने आई। ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर स्थित तमक नाले में अचानक आए भीषण जलसैलाब ने भारी तबाही मचाई। पानी के प्रचंड वेग में एक मजबूत वैली ब्रिज और एक वाहन बह गया। इस हादसे में सीमा सड़क संगठन (BRO) का एक कर्मचारी भी लापता हो गया है, जिसकी तलाश जारी है।
इस तबाही के कारण भारत-चीन सीमा से सटे सीमांत गांवों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट चुका है और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मलारी मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।

राज्य में 24×7 निगरानी, आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट
बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से प्रदेशभर के हालात पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
संवेदनशील और अति-संवेदनशील इलाकों में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमों को तुरंत राहत व बचाव कार्य के लिए तैनात रहने को कहा गया है। नदी-नालों के किनारे बसे इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है।
नागरिकों और पर्यटकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी
खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया है:
- अनावश्यक यात्रा से बचें: जब तक बेहद जरूरी न हो, पहाड़ी और भूस्खलन संभावित रास्तों पर सफर करने से बचें।
- नदी-नालों से दूरी बनाएं: पहाड़ी गदेरों, बरसाती नालों और नदियों के किनारे जाने की भूल बिल्कुल न करें, क्योंकि छोटी जलधाराओं में भी पलक झपकी ही भीषण जलप्रवाह आ सकता है।
- सड़क स्थिति की जानकारी लें: यात्रा शुरू करने से पहले राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष या स्थानीय प्रशासन से मौसम और सड़कों के बंद या खुले होने की अपडेट जरूर लें।
- सुरक्षित स्थानों पर रहें: जलभराव या नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर रुख करें।
पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, ऐसे में प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लेना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा माध्यम है।