कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में विश्व हाथी दिवस पर बच्चों ने हाथियों को खिलाए फल-सब्जियां, IVRI वैज्ञानिकों का 5 दिवसीय प्रशिक्षण भी हुआ पूरा
रामनगर (नैनीताल)। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हाथियों के संरक्षण, उनके पारिस्थितिकीय महत्व और मानव-हाथी सह-अस्तित्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न रेंजों में भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बिजरानी, सर्पदुली, ढेला और कालागढ़ रेंज के वन अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्कूली बच्चों, प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर हाथियों के प्रति संवेदनशीलता और सुरक्षा का संदेश दिया। इसके साथ ही भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) इज्जतनगर से आए वैज्ञानिकों और पशुचिकित्सा छात्रों का पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।

हाथियों को दुलारा, फल-सब्जियां खिलाईं और देखी जागरूकता फिल्म
12 अगस्त को आयोजित मुख्य कार्यक्रम में आमडंडा वन परिसर, बाघ रक्षक विद्यालय, ढिकुली और ढेला के स्कूली छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अधिकारियों और नेचुरलिस्टों ने विद्यार्थियों को एशियाई और अफ्रीकी हाथियों के बीच का अंतर समझाया और बताया कि हाथी वन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ‘इंजीनियर’ की भूमिका निभाते हैं। हाथी बीजों के प्रसार और वनस्पतियों के पुनर्जनन में अहम योगदान देते हैं, इसलिए उनके प्राकृतिक आवासों को बचाना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान ढिकुली और ढेला के छात्र-छात्राओं ने हाथियों को अपने हाथों से फल और सब्जियां खिलाईं। हाथियों को इतने करीब से देखकर बच्चे बेहद रोमांचित नजर आए। इसके बाद बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर खूबसूरत चित्र बनाए। विद्यार्थियों को धनगढ़ी इंटरप्रिटेशन सेंटर का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया और हाथियों के व्यवहार पर आधारित एक ज्ञानवर्धक फिल्म भी दिखाई गई।

कालागढ़ में भी गूंजा हाथी संरक्षण का संदेश
कालागढ़ रेंज के अंतर्गत हाथी कैम्प परिसर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों, स्थानीय लोगों और कार्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र के प्रशिक्षु वन आरक्षियों ने भाग लिया। वन विभाग के अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को हाथियों की जीवन शैली, खान-पान, सामाजिक व्यवहार और प्रजनन चक्र की विस्तृत जानकारी दी। हाथी कैम्प के कर्मचारियों और अधिकारियों ने हाथियों को केले, गन्ना और गुड़ खिलाकर उनका स्वागत किया।

IVRI के वैज्ञानिकों और छात्रों का 5 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
विश्व हाथी दिवस के साथ-साथ कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई। 8 अगस्त से चल रहे भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज्जतनगर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, हेल्थ एक्सपर्ट्स और 10 पशुचिकित्सा छात्रों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 12 अगस्त को संपन्न हो गया।

निदेशक सभागार में आयोजित समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रशिक्षण के दौरान IVRI के दल को कॉर्बेट के टाइगर सेल की कार्यप्रणाली, मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन, वन्यजीव रेस्क्यू तकनीक, ट्रैंक्विलाइज़ेशन और प्राथमिक उपचार का व्यावहारिक अनुभव कराया गया।

फील्ड डायरेक्टर ने समापन अवसर पर कहा कि वन्यजीव रेस्क्यू के दौरान स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील होती हैं। ऐसे समय में त्वरित, वैज्ञानिक और सटीक निर्णय लेना ही वन्यजीवों और इंसानों दोनों की जान बचा सकता है।

IVRI के प्रतिभागियों ने भी इस फील्ड ट्रेनिंग को बेहद उपयोगी बताया और कहा कि इस व्यावहारिक अनुभव से उन्हें वन्यजीव प्रबंधन की जमीनी चुनौतियों को समझने में बड़ी मदद मिली है।