देहरादून/रामनगर: विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) के बाघ अब जल्द ही उत्तराखंड की सीमाएं पार कर ओडिशा के चिड़ियाघर में दहाड़ते नजर आएंगे। ओडिशा के एक प्रमुख चिड़ियाघर ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर से दो बाघों की मांग की है। इस मांग के सामने आने के बाद उत्तराखंड वन विभाग ने स्थानांतरण (Translocation) की जरूरी औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं।
हालांकि, बाघों की इस यात्रा और नई जगह बसने की पूरी प्रक्रिया भारत सरकार और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की अंतिम अनुमति पर निर्भर करेगी। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही ट्रांसलोकेशन का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
ढेला रेस्क्यू सेंटर में क्षमता से अधिक वन्यजीव
वर्ष 2020 में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ढेला रेंज में एक अत्याधुनिक रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया गया था। इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य घायल, वृद्ध, या प्राकृतिक आवास में लौटने में असमर्थ बाघों और तेंदुओं को सुरक्षित वातावरण देना है।
वर्तमान में इस रेस्क्यू सेंटर में 15 बाघ और 15 तेंदुए रखने की क्षमता वाले बाड़े बने हैं। लेकिन इस समय सेंटर में 16 बाघ और 17 तेंदुए रह रहे हैं। चूंकि इनमें से अधिकतर वन्यजीव जंगलों में वापस शिकार करने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए इन्हें मानवीय देखरेख में रखा जाता है। देश के विभिन्न चिड़ियाघरों के बीच वन्यजीवों के आदान-प्रदान (Inter-Zoo Exchange Program) के तहत ही ओडिशा को ये दो बाघ दिए जा रहे हैं, जिससे वहां भी उत्तराखंड की वाइल्डलाइफ की मौजूदगी बढ़ेगी।

हेल्थ स्क्रीनिंग और मेडिकल टेस्ट के बाद होगी रवानगी
ओडिशा भेजे जाने से पहले दोनों बाघों का कड़ा मेडिकल चेकअप और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम उनकी फिटनेस रिपोर्ट तैयार करेगी। स्थानांतरण से जुड़े सभी कानूनी व तकनीकी दस्तावेज तैयार होने के बाद सुरक्षित परिवहन प्रणाली के माध्यम से इन्हें ओडिशा भेजा जाएगा।
उत्तराखंड का ‘टाइगर गिफ्ट’ प्लान और बढ़ता कुनबा
उत्तराखंड में बाघों के बेहतर संरक्षण और आवास प्रबंधन के शानदार परिणाम सामने आए हैं:
- तीन गुना से अधिक बढ़ी संख्या: वर्ष 2006 में उत्तराखंड में कुल 178 बाघ थे। ‘स्टेट ऑफ टाइगर्स-2022’ की रिपोर्ट के अनुसार, अब राज्य में बाघों की संख्या बढ़कर 560 हो चुकी है। इनमें से अकेले 260 बाघ कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में मौजूद हैं।
- NTCA की अनुमति अनिवार्य: अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण के लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की मंजूरी मिलना सबसे जरूरी कदम है। इससे पहले भी कॉर्बेट से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों को सफलतापूर्वक शिफ्ट किया जा चुका है।
- मानव-बाघ संघर्ष की चुनौती: बाघों की बढ़ती आबादी के कारण अब वे टाइगर रिजर्व से बाहर वन प्रभागों और रिहाइशी इलाकों के पास भी देखे जा रहे हैं। वन विभाग के सामने बाघों के संरक्षण के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
सहयोग को तैयार राज्य सरकार
बाघों के ट्रांसलोकेशन पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड बाघ संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य में वन क्षेत्र की तुलना में बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ा है। यदि कोई अन्य राज्य बाघों की मांग करता है और सभी कानूनी व वैज्ञानिक औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं, तो उत्तराखंड इस दिशा में पूरा सहयोग करने और वैज्ञानिक आधार पर बाघों को भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है।