चमोली में विष्णुगाड़ परियोजना की सुरंग में टनल धंसी, 28 मजदूर फंसे, 16 को निकाला बाहर; 3 की हालत गंभीर
चमोली (उत्तराखंड):उत्तराखंड के चमोली जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पीपलकोटी स्थित विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार शाम अचानक पानी का तेज रिसाव और भयंकर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हो गया। हादसे के वक्त करीब 3 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के भीतर काम कर रहे 28 मजदूर अचानक मलबा और पानी भरने से फंस गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और तुरंत राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया।
ताजा जानकारी के अनुसार, बचाव दलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए अब तक 16 मजदूरों को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। हालांकि, 12 मजदूर अब भी टनल के अंदर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी है।

शाम 7 बजे अचानक बिगड़े हालात, पानी और मलबे से बंद हुआ रास्ता
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार शाम करीब 7 बजे पीपलकोटी के मायापुर में स्थित टीएचडीसी (THDC) की निर्माणाधीन सुरंग में हुआ। टनल के ऊपरी हिस्से से अचानक पानी का भारी रिसाव होने लगा, जिसके तुरंत बाद पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा में मलबा सुरंग के मुहाने और अंदरूनी हिस्से में भर गया।
देखते ही देखते टनल के भीतर काम कर रहे मजदूरों का संपर्क बाहर से टूट गया। पानी और दलदली मलबे की वजह से टनल के अंदर का माहौल बेहद खतरनाक हो गया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं।

5 मजदूर अस्पताल में भर्ती, 3 की हालत नाजुक
रेस्क्यू टीम द्वारा सुरक्षित बाहर निकाले गए 16 मजदूरों में से 5 को तत्काल जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया है। चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि अस्पताल में इलाज करा रहे मजदूरों में से 3 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की विशेष टीम उनके इलाज में लगी हुई है, जबकि बाकी निकाले गए मजदूरों को प्राथमिक उपचार दिया गया है।
रात भर जारी रहेगा रेस्क्यू, जोशीमठ और गौचर से बुलाई गईं अतिरिक्त टीमें
हादसे की गंभीरता को देखते हुए चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार खुद घटनास्थल पर पहुंचे और राहत अभियान का मोर्चा संभाला। उन्होंने सभी एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ तेजी से रेस्क्यू चलाने के निर्देश दिए हैं।
सुरंग के अंदर लगातार पानी और मलबा आने से रेस्क्यू टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। मौके पर भारी संख्या में बल तैनात किया गया है:
- एसडीआरएफ (SDRF): 42 जवान
- एनडीआरएफ (NDRF): 27 जवान
- पुलिस व स्थानीय प्रशासन: 22 से अधिक कर्मी
- फायर सर्विस व डीआरएफ: 13 जवान
इसके अलावा परियोजना का निर्माण कर रही एचसीसी (HCC) कंपनी की हैवी मशीनें, पोकलैंड और तकनीकी संसाधन मलबे को हटाने में जुटे हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सेना, आईटीबीपी (ITBP) और एनडीआरएफ की अतिरिक्त बैकअप टीमों को गौचर और जोशीमठ से तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया है।

7 महीने पहले भी इसी टनल में हुआ था बड़ा हादसा
पीपलकोटी की इसी टीएचडीसी जल विद्युत परियोजना में सुरक्षा मानकों पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। ठीक 7 महीने पहले, 30 दिसंबर 2025 को इसी सुरंग के अंदर दो लोको ट्रेनों की आपस में भीषण टक्कर हो गई थी।
उस समय शिफ्ट बदलने के दौरान मजदूरों को ले जा रही ट्रेन और सामान ढोने वाली लोको ट्रेन आपस में टकरा गई थीं। उस हादसे के वक्त सुरंग में करीब 110 लोग मौजूद थे, जिनमें से 88 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जांच के बाद लोको ऑपरेटर की लापरवाही पाई गई थी और उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।

अब एक बार फिर उसी सुरंग में भूस्खलन और जलभराव के कारण 28 जिंदगियों पर संकट आ पड़ा है। फिलहाल पूरा फोकस अंदर फंसे 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने पर टिका हुआ है। पूरे प्रदेश की नजरें इस समय चमोली के रेस्क्यू ऑपरेशन पर बनी हुई हैं।