देहरादून:स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए राज्य की विकास यात्रा, हालिया ऐतिहासिक फैसलों और भविष्य के विजन का खाका देश के सामने रखा। उन्होंने देश की आजादी में अपने प्राणों की आहुति देने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, अमर शहीदों और राज्य आंदोलनकारियों को नमन किया। साथ ही, देवभूमि उत्तराखंड की जनता का आभार जताते हुए राज्य को देश का अग्रणी और समृद्ध प्रदेश बनाने का आह्वान किया।
सैन्य परंपरा और दो लाख करोड़ की योजनाएं
उत्तराखंड अपनी गौरवशाली सैन्य परंपरा, अदम्य वीरता और राष्ट्रभक्ति की विरासत के लिए जाना जाता है। प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से लगभग दो लाख करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में उत्तराखंड एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभर रहा है।
सीमांत क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना’ और ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 30 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड लॉन्च किया गया है, जबकि सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और सगंध खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
ऐतिहासिक कानून: UCC से लेकर नकल विरोधी सख्त कदम
नीतिगत और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर उत्तराखंड ने देश के सामने नजीर पेश की है:
- समान नागरिक संहिता (UCC): उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने समान नागरिक संहिता को लागू किया है।
- धर्मांतरण रोधी कानून: राज्य में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून को कड़ाई से अमल में लाया जा रहा है।
- सख्त भू-कानून: जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य में मजबूत और पारदर्शी भू-कानून लागू किया गया है।
- पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया: सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता आई है। इसके परिणामस्वरूप पिछले पांच वर्षों में राज्य में लगभग 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां मिली हैं।
शिक्षा और संस्कृति का केंद्र बनता उत्तराखंड
भारतीय संस्कृति, दर्शन और सनातन इतिहास के गहन अध्ययन-अनुसंधान के लिए दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना की गई है। नई शिक्षा नीति (NEP) को धरातल पर उतारने में राज्य अग्रणी भूमिका निभा रहा है। हाल ही में उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया है, जो साक्षरता के राष्ट्रीय लक्ष्यों के लिए एक प्रेरणादायी उपलब्धि है।
पर्यटन, चारधाम यात्रा और वेडिंग डेस्टिनेशन
उत्तराखंड की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश का प्रमुख वेडिंग डेस्टिनेशन, फिल्म शूटिंग हब और आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र बन चुका है। बेहतर व्यवस्थाओं के दम पर इस वर्ष अब तक 47 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं, जबकि प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा में लगभग 5 करोड़ शिवभक्तों ने सुरक्षित और सुचारू रूप से जलाभिषेक किया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के पुनरुद्धार के साथ-साथ अब राज्य में शीतकालीन पर्यटन (Winter Tourism) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण: 3 लाख बनीं लखपति दीदी
महिला सशक्तिकरण को राज्य के विकास का मुख्य आधार बनाया गया है:
- सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू।
- सहकारी समितियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण।
- महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त (0% Interest) ऋण।
- ’मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना’ और ‘लखपति दीदी योजना’ के प्रभावी संचालन से प्रदेश में अब तक 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
अंत्योदय और सुशासन का संकल्प
सरकार का मुख्य ध्येय अंत्योदय का विजन है—यानी विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। जन-सेवा, सुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के मूलमंत्र पर चलते हुए सरकार उत्तराखंड को देश का नंबर-1 राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर सभी नागरिकों से एक आदर्श, आत्मनिर्भर और समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई है।