चमोली पीपलकोटी टनल हादसे के बीच पिथौरागढ़ से डराने वाली खबर
पिथौरागढ़।उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसून और लगातार हो रही बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहाँ चमोली के पीपलकोटी में निर्माणाधीन टनल में पानी और मलबे के घुसने से राहत व बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, वहीं दूसरी तरफ पिथौरागढ़ जिले से भी एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है।
पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग पर स्थित ला झकेला नाला अचानक उफान पर आ गया है। गुरुवार को हुई तेज बारिश के बाद नाले के जलस्तर में एकाएक भारी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया। नाले के विकराल रूप को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया है।
शांत दिखने वाला ला झकेला नाला क्यों बना खौफ का पर्याय?
स्थानीय निवासियों के लिए ला झकेला नाला केवल एक बरसाती नाला नहीं है, बल्कि इसके साथ 15 साल पुरानी एक ऐसी भयानक त्रासदी जुड़ी है, जिसकी यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। 7 और 8 अगस्त 2009 की रात इस इलाके में बादल फटने से भयानक तबाही मची थी। उस समय आए अचानक सैलाब और मलबे की चपेट में आने से लगभग दो दर्जन (24) लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
यही कारण है कि जब भी थल-मुनस्यारी क्षेत्र में झमाझम बारिश होती है और ला झकेला नाले का पानी का स्तर बढ़ता है, तो स्थानीय ग्रामीणों के दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं। लोग उस पुरानी विभीषिका को याद कर सिहर उठते हैं। गुरुवार को भी जैसे ही नाले का पानी उफनाया, इलाके में पुरानी आपदा का खौफ फिर से तैरने लगा।
तेज बहाव के साथ मलबा सड़क पर आया, थमा यातायात
गुरुवार को दिनभर हुई बारिश के बाद ला झकेला नाले में अचानक पानी का तेज बहाव शुरू हुआ। देखते ही देखते शांत दिखने वाले नाले ने विकराल रूप ले लिया और पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर सड़क पर गिरने लगे। थल-मुनस्यारी मार्ग उत्तराखंड का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है, जो मुनस्यारी जैसे सीमांत पर्यटन स्थल को राज्य के अन्य हिस्सों से जोड़ता है।
सड़क मार्ग पर जलभराव और मलबे की स्थिति को देखते हुए यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। सीमांत इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
चमोली और पिथौरागढ़ की तस्वीरें दे रही हैं बड़ी चेतावनी
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में इस समय मौसम का मिजाज बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। चमोली में टनल के भीतर रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है, वहीं पिथौरागढ़ में नदियां और नाले उफान पर हैं। यद्यपि दोनों घटनाएं अलग-अलग जिलों की हैं, लेकिन यह स्थिति स्पष्ट चेतावनी देती है कि पहाड़ों पर अचानक बदलता मौसम कभी भी बड़ी आपदा का रूप ले सकता है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने आम जनता और पर्यटकों के लिए चेतावनी जारी की है कि वे उफनते नदी-नालों के करीब बिल्कुल न जाएं और बिना किसी अति-आवश्यक कार्य के पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने से बचें।
प्रशासन का बयान: स्थिति पर नजर, टीम मौके के लिए रवाना
घटना की गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड पर है। पिथौरागढ़ के आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेन्द्र महरा ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि एहतियात के तौर पर थल-मुनस्यारी मार्ग को बंद कर दिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में लगातार बारिश जारी है, लेकिन अभी तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। कुछ स्थानीय लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर बादल फटने जैसी अफवाहें फैलाई जा रही थीं, जिन्हें अधिकारी ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह अत्यधिक बारिश के कारण नाले का जलस्तर बढ़ने का मामला है, न कि बादल फटने का। प्रशासन और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम मौके की ओर रवाना कर दी गई है ताकि मार्ग को जल्द से जल्द सुरक्षित कर यातायात बहाल किया जा सके।