पिथौरागढ़। विदेश में बेहतर भविष्य और ऊंचे वेतन का सपना दिखाकर भोले-भाले युवाओं को जाल में फंसाने वाले फर्जी एजेंटों के मकड़जाल से जुड़ा एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। उत्तराखंड सरकार के निरंतर प्रयासों और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के त्वरित हस्तक्षेप से रूस में करीब 97 दिनों से बंधक बने पिथौरागढ़ निवासी दो भाई, आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की, आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं।
ठगी, प्रताड़ना, भूख-प्यास और अनजान जगह पर बंधक रहने की खौफनाक दास्तान पार कर जब दोनों देर रात अपने घर पहुंचे, तो पूरे गांव और परिवार में आंसुओं के साथ खुशी की लहर दौड़ गई। दोनों भाइयों की सकुशल वापसी के बाद पुष्कर सिंह धामी ने उनसे दूरभाष पर वार्ता कर उनका कुशलक्षेम जाना। उन्होंने दोनों युवकों और उनके परिजनों से बातचीत करते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी भी ली। लंबे समय बाद दोनों बेटों के सुरक्षित घर लौटने पर परिवार ने राहत व्यक्त करते हुए सरकार के संवेदनशील हस्तक्षेप और त्वरित प्रयासों के लिए आभार जताया।
₹80 हजार महीने की सैलरी का झांसा देकर ₹8 लाख ठगे
इस पूरी मुसीबत की शुरुआत अप्रैल महीने में हुई थी। ऊधम सिंह नगर के सितारगंज निवासी एक ट्रैवल एजेंट ने धारचूला के रहने वाले आनंद और भूपेंद्र को रूस में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। एजेंट ने दावा किया था कि रूस में उन्हें हर महीने ₹70,000 से ₹80,000 वेतन मिलेगा, साथ ही मुफ्त खाना और रहने की उत्तम सुविधा दी जाएगी।
पहाड़ में रोजगार के सीमित साधनों के बीच दोनों भाइयों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। एजेंट ने इस नौकरी की एवज में ₹8 लाख की भारी-भरकम राशि मांगी। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे इतनी बड़ी रकम दे सकें, लेकिन बेटों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में परिजनों ने अपने सोने के गहने बेच दिए और बाकी रकम भारी ब्याज पर कर्ज लेकर जुटाई।
मॉस्को पहुंचते ही छिन गए पासपोर्ट, शुरू हुआ जुल्म
आनंद और भूपेंद्र 5 मई को भारत से रवाना हुए और 6 मई को मॉस्को पहुंचे। मॉस्को एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही उनका सपना एक डरावने दुःस्वप्न में बदल गया। वहां पहुंचते ही नियोक्ता ने सबसे पहले उनके पासपोर्ट और वीजा अपने कब्जे में ले लिए। उन्हें किसी से भी संपर्क न करने देने के लिए स्थानीय सिम कार्ड तक नहीं दिया गया।
इसके बाद दोनों भाइयों से उनकी इच्छा के विपरीत जबरन हाउसकीपिंग (साफ-सफाई) का काम कराया जाने लगा। उन्हें न तो तय किया गया वेतन दिया गया और न ही पेट भर खाना। बिना वेतन, बिना भोजन और बिना पासपोर्ट के दोनों भाई वहां पूरी तरह असहाय होकर रह गए।
20 दिनों तक टूटा संपर्क, ससुर को पड़ा हार्ट अटैक
जून के महीने में दोनों भाइयों ने किसी तरह परिजनों से संपर्क कर बताया था कि वे बहुत खराब परिस्थितियों में फंस चुके हैं और किसी भी कीमत पर भारत लौटना चाहते हैं। इसके कुछ ही दिनों बाद उन्हें किसी अनजान स्थान पर भेज दिया गया, जिसके बाद परिजनों से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया।
करीब 20 दिनों तक दोनों का कोई सुराग न मिलने से घर में कोहराम मच गया। बेटे किसी अनजान मुल्क में किस हाल में हैं, इस गहरी चिंता और सदमे में आनंद और भूपेंद्र के ससुर को हार्ट अटैक तक आ गया।
गर्भवती पत्नी का साहस और कूटनीतिक एक्शन
जब चारों तरफ अंधेरा छा गया, तब भूपेंद्र की पत्नी तनुजा कार्की ने हिम्मत जुटाई। तनुजा 9 महीने की गर्भवती थी और उनके पास तीन साल का एक छोटा बेटा भी था। पति और जेठ को सलामत वापस लाने के लिए तनुजा ने पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगाई से मुलाकात कर आपबीती सुनाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत राज्य सरकार को सूचित किया। इसके बाद राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय हरकत में आए। विदेश मंत्रालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने रूसी अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाया। कूटनीतिक प्रयासों का असर हुआ और 97 दिनों तक प्रताड़ना सहने के बाद आनंद और भूपेंद्र को सुरक्षित मुक्त कराकर भारत वापस लाया गया।
ठग एजेंट पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन
सकुशल घर वापसी के बाद मुख्यमंत्री से हुई बातचीत के दौरान पीड़ित परिवार ने अपनी आपबीती साझा की और उस फर्जी एजेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की गुहार लगाई, जिसने उनकी जिंदगी तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। परिवार ने कर्ज लेकर एजेंट को दिए गए ₹8 लाख वापस दिलाने की भी मांग रखी, जिस पर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने का पूरा आश्वासन दिया गया है।