चमोली (उत्तराखंड):उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में अचानक काल बनकर आए मलबे और पानी ने कई जिंदगियों को अपनी चपेट में ले लिया। बृहस्पतिवार देर शाम हुई इस खौफनाक घटना के बाद टनल के अंदर चीख-पुकार मच गई। इस हादसे में 9 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 6 मजदूरों की तलाश में रेस्क्यू टीमें रात से ही जी-तोड़ मेहनत कर रही हैं।

सरिया वेल्डिंग के दौरान अचानक आया सैलाब
जानकारी के मुताबिक, हादसा बृहस्पतिवार शाम उस वक्त हुआ जब मजदूर टेल रेस टनल (टीआरटी) के भीतर सरिया बांधने और वेल्डिंग का काम कर रहे थे। टनल के अंदर जिंदगी सामान्य रफ्तार से चल रही थी कि तभी कार्यस्थल से महज 150 मीटर की दूरी पर पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। भूस्खलन इतना भीषण था कि चट्टानों और पत्थरों के साथ भारी मात्रा में पानी व मलबा सीधे टनल के भीतर घुस आया।
टनल में काम कर रहे मजदूरों को भागने या संभलने तक का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते करीब 28 मजदूर मलबे और पानी के तेज बहाव में फंस गए।

22 मजदूर निकाले गए, 9 की मौत और 6 की तलाश जारी
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), आईटीबीपी (ITBP) और भारतीय सेना की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत बचाव कार्य शुरू किया गया। अंधेरा और टनल में भरा मलबा रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी चुनौती बना, लेकिन देर रात तक अभियान चलाकर 22 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया।

दुखद बात यह रही कि बाहर निकाले गए लोगों में से 9 मजदूरों की जान जा चुकी थी। वहीं 11 गंभीर घायलों का इलाज जिला अस्पताल गोपेश्वर में चल रहा है। एक घायल मजदूर को पीपलकोटी स्थित विवेकानंद धर्मार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि एक अन्य की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर किया गया है। टनल के भीतर अभी भी मलबे में 6 मजदूरों के दबे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

प्रत्यक्षदर्शी ने बताई खौफनाक मंज़र की कहानी
अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे छत्तीसगढ़ निवासी मजदूर सुनील दीवान ने हादसे की खौफनाक दास्तान बयां की। सुनील ने बताया कि वे टनल के अंदर सरिया बांधने का काम कर रहे थे और उस समय वहां 16 से 17 लोग मौजूद थे।
सुनील के अनुसार, “अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई। टनल से करीब 150 मीटर दूर भारी भूस्खलन हुआ था। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, मलबे, पत्थर और पानी का तेज सैलाब टनल के अंदर आ गया। जिसे जहां जगह मिली भागने लगा, लेकिन पानी और मलबे की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई लोग वहीं दब गए।”

इसी टनल में पिछले साल भी हुआ था लोको ट्रेन हादसा
टीएचडीसी (THDC) की इस विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में सुरक्षा मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पिछले साल 31 दिसंबर की देर रात भी इसी निर्माणाधीन सुरंग में एक बड़ा हादसा हुआ था। उस समय सुरंग के भीतर दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गई थीं।
उस हादसे के दौरान टनल में 100 से अधिक लोग काम कर रहे थे और दुर्घटना में लगभग 60 अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर घायल हुए थे। उस वक्त हादसे के बाद सुरंग में काम लंबे समय तक बंद रखना पड़ा था। अब एक साल बाद दोबारा हुए इस बड़े भूस्खलन हादसे ने परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, पूरा जिला प्रशासन और बचाव दल टनल में फंसे बाकी 6 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटा हुआ है।