चमोली/पीपलकोटी: उत्तराखंड के चमोली जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पीपलकोटी क्षेत्र में टनल के भीतर फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। इस बीच, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद धरातल पर उतर चुके हैं।
क्षेत्र में मौसम बेहद खराब और प्रतिकूल बना हुआ है। घने बादलों और कम दृश्यता (Visibility) के कारण पुष्कर सिंह धामी के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग भी बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हो सकी। जान जोखिम में डालकर किए गए इस लैंडिंग प्रयास के बाद मुख्यमंत्री सीधे घटना स्थल और कमांड सेंटर की ओर रवाना हुए, ताकि टनल में फंसे श्रमिकों के रेस्क्यू ऑपरेशन की सीधी निगरानी की जा सके।

टनल के बाहर युद्धस्तर पर रेस्क्यू जारी: एजेंसियों से लिया अपडेट
पीपलकोटी पहुंचने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने सीधे ग्राउंड जीरो का निरीक्षण किया। उन्होंने टनल के बाहर तैनात सभी प्रमुख एजेंसियों—जिला प्रशासन, उत्तराखंड पुलिस, SDRF (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स), NDRF (नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों के अधिकारियों से मुलाकात की।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू ऑपरेशन की अब तक की प्रगति का पूरा ब्यौरा लिया। उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि बचाव कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई या तकनीकी संसाधन की कमी नहीं होनी चाहिए।

मुख्य बिंदु: टनल के भीतर वायु संचार (Oxygen Supply), प्रकाश और मलबे को हटाने के लिए इस्तेमाल की जा रही भारी मशीनों की स्थिति पर विशेष चर्चा की गई, ताकि अंदर फंसे मजदूरों तक राहत जल्द से जल्द पहुंचाई जा सके।
घायलों का हाल जानने अस्पताल जाएंगे मुख्यमंत्री
ग्राउंड जीरो पर रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा करने के साथ ही पुष्कर सिंह धामी का कार्यक्रम टनल से सुरक्षित बाहर निकाले गए और घायल हुए श्रमिकों से मुलाकात करने का भी है।
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री अस्पताल जाकर भर्ती श्रमिकों से मिलेंगे और उनके स्वास्थ्य का हालचाल जानेंगे। सरकार ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं कि रेस्क्यू किए गए सभी श्रमिकों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाएं और उनके परिवारों को पल-पल की जानकारी दी जाए।

”हर एक श्रमिक को सुरक्षित निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता”
निरीक्षण के दौरान यह बात साफ कर दी गई है कि टनल में फंसे प्रत्येक श्रमिक को सही-सलामत बाहर निकालना ही राज्य सरकार की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रतिकूल पहाड़ी मौसम और टनल के भीतर की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, सभी बचाव दल 24 घंटे बिना रुके काम कर रहे हैं। हैवी ड्रिलिंग मशीनरी और आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे को भेदकर रास्ता बनाने की कोशिशें जारी हैं। सरकार का दावा है कि जब तक आखिरी मजदूर को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता, यह अभियान बिना थमे युद्धस्तर पर जारी रहेगा।

बैकअप प्लान और विशेषज्ञों की मदद
मौसम के पल-पल बदलते मिजाज को देखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक बैकअप प्लान भी तैयार रखे हैं। यदि वायु मार्ग से कनेक्टिविटी प्रभावित होती है, तो सड़क मार्ग से अतिरिक्त राहत सामग्री और विशेषज्ञों की टीमों को तुरंत मौके पर भेजने की व्यवस्था की गई है। पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी रखा गया है और एंबुलेंस व मेडिकल टीमों को टनल के बाहर स्टैंडबाय पर रखा गया है।