सऊदी अरब में बंधक बने टिहरी के इंद्रमणि नौटियाल: स्वदेश वापसी के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने विदेश मंत्री जयशंकर को लिखा पत्र, मांगी मदद
सऊदी अरब में 2.29 करोड़ के फेर में फंसा उत्तराखंड का बेटा, सीएम धामी ने विदेश मंत्री से लगाई गुहार; जानें पूरा मामला
देहरादून:उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के रहने वाले एक प्रवासी भारतीय पिछले कुछ सालों से खाड़ी देश सऊदी अरब में बेहद नारकीय और मानसिक तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। रोजगार की तलाश में सात समंदर पार गए टिहरी निवासी इंद्रमणि नौटियाल सऊदी अरब में बंधक जैसी स्थिति में जीने को मजबूर हैं। कंपनी की लापरवाही और करोड़ों रुपये के जुर्माने के बोझ तले दबे इंद्रमणि की सकुशल वतन वापसी के लिए अब उत्तराखंड सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए देश के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। मुख्यमंत्री ने भारत सरकार के स्तर से तत्काल प्रभाव से हस्तक्षेप करने, प्रभावित नागरिक को कानूनी व आर्थिक सहायता प्रदान करने और उनकी जल्द से जल्द भारत वापसी सुनिश्चित कराने की गुहार लगाई है।
2018 में रोजी-रोटी की तलाश में गए थे सऊदी अरब
टिहरी गढ़वाल जिले के जौनपुर ब्लॉक स्थित गौरसाड़ा गांव के रहने वाले इंद्रमणि नौटियाल पुत्र देवी राम नौटियाल वर्ष 2018 में अपने परिवार के बेहतर भविष्य का सपना लेकर सऊदी अरब गए थे। वहां उन्होंने रियाद स्थित ‘पिकक रोड्स एंड कॉन्ट्रेक्टिंग कंपनी’ में बतौर ट्रक ड्राइवर काम करना शुरू किया था। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन वर्ष 2018 में ही ड्यूटी के दौरान उनके साथ एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई।
हादसे के बाद सऊदी अरब की न्यायिक प्रक्रिया के तहत इंद्रमणि को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही, जिस ट्रक को वे चला रहे थे, उसके बीमा और पंजीकरण कागजातों में खामियों के चलते वहां की अदालत ने कंपनी मालिक पर 9 लाख सऊदी रियाल का भारी-भरकम जुर्माना आयद कर दिया। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 2.29 करोड़ रुपये बैठती है।
कंपनी मालिक की लापरवाही और 2.29 करोड़ का बोझ
अदालत के आदेश के अनुसार यह जुर्माना कंपनी मालिक को चुकाना था, लेकिन घटना के कई साल बीत जाने के बाद भी कंपनी मालिक ने जुर्माना राशि जमा नहीं की। आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने पूरी जिम्मेदारी भारतीय ड्राइवर पर डाल दी और उन्हें बंधक जैसी स्थिति में रखकर जुर्माना भरने का दबाव बनाया जा रहा है।
विदेशी धरती पर कानूनी दांव-पेच और भारी-भरकम जुर्माने की रकम के कारण इंद्रमणि वहां से वापस नहीं आ पा रहे हैं। इस बीच भारत में रह रहा उनका परिवार बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। इंद्रमणि की पत्नी और बेटी ने अपने स्तर पर उन्हें वापस लाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाईं, प्रशासनिक चौखटों पर गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी। लंबे समय से अपने कमाने वाले मुखिया से दूर यह परिवार भारी आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेल रहा है।
उत्तराखंड सरकार का वादा: हर नागरिक की सुरक्षा सर्वोपरि
मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में आते ही राज्य सरकार तुरंत हरकत में आई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अनुरोध किया कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से इस मामले में तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए और मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करके इंद्रमणि नौटियाल को बंधक स्थिति से मुक्त कराया जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि विदेश में फंसा उत्तराखंड का कोई भी नागरिक अकेला नहीं है। राज्य सरकार अपने हर नागरिक की सुरक्षा और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विदेश मंत्रालय के प्रभावी और त्वरित हस्तक्षेप से इंद्रमणि नौटियाल जल्द ही अपने घर लौटेंगे और उनका परिवार इस कठिन संकट से बाहर निकल सकेगा।