IMPCL निजीकरण के खिलाफ उबाल: स्काईमैप फार्मा को कारखाना बेचने के विरोध में 1 जून को महाधरना
सल्ट/रामनगर।उत्तराखंड के सल्ट (अल्मोड़ा) और रामनगर क्षेत्र की आर्थिक ‘लाइफलाइन’ माने जाने वाले भारत सरकार के एकमात्र केंद्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा कारखाने, इंडियन मेडिसिंस फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IMPCL) को निजी हाथों में सौंपने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। ठेका मजदूर कल्याण समिति ने केंद्र सरकार द्वारा इस मुनाफे वाले संस्थान को निजी क्षेत्र की कंपनी ‘स्काईमैप फार्मास्युटिकल’ को बेचने के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है।
विनिवेश की इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग को लेकर समिति ने आगामी 1 जून, 2026 को प्रातः 11:00 बजे कारखाने के मुख्य गेट पर एक विशाल धरना प्रदर्शन की घोषणा की है। इस आंदोलन को लेकर क्षेत्र के मजदूरों, कर्मचारियों और स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है।

मजदूरों के पेट पर लात मार रही सरकार: किशन शर्मा
कारखाने के मुख्य गेट पर आयोजित एक विरोध सभा को संबोधित करते हुए ठेका मजदूर कल्याण समिति के अध्यक्ष किशन शर्मा ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आईएमपीसीएल केवल एक कारखाना नहीं है, बल्कि यह सल्ट और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों की रीढ़ है। इसे किसी निजी कंपनी को बेचना यहाँ के सैकड़ों मजदूरों, स्थायी कर्मचारियों और उन हजारों परिवारों के पेट पर लात मारने जैसा है, जिनकी आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस संस्थान से जुड़ी हुई है।
किशन शर्मा ने केंद्र सरकार की विनिवेश नीति को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया:
”सरकार अपने बजट घाटे को पूरा करने के लिए चालू वित्त वर्ष में 80 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसी अंधाधुंध निजीकरण की नीति के तहत आईएमपीसीएल जैसे लगातार लाभ कमाने वाले राष्ट्रीय संस्थान की नीलामी स्काईमैप फार्मास्युटिकल को कर दी गई है। यह केवल एक शुरुआत है, अगर आज हम चुप रहे तो क्षेत्र का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। हम इस फैसले को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।”
सालाना 20 करोड़ का शुद्ध लाभ, फिर भी बेचने की जिद क्यों?
सभा में मौजूद समाजवादी लोक मंच के वरिष्ठ नेता जमन राम ने संस्थान के आर्थिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कारखाना 35 एकड़ से अधिक की बहुमूल्य भूमि पर फैला हुआ है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घाटे में चल रही कंपनियों को बेचने का तर्क देने वाली सरकार एक ऐसी कंपनी को बेच रही है, जिसने वर्ष 2024-25 में 20 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ (Net Profit) कमाया है।
जमन राम ने याद दिलाया कि आईएमपीसीएल को बचाने की यह लड़ाई नई नहीं है। स्थानीय जनता, सामाजिक संगठन और मजदूर वर्ष 2017 से ही लगातार इस विनिवेश प्रक्रिया का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं। लेकिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार जनभावनाओं, क्षेत्रीय विकास और मजदूरों के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज कर कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने में लगी है।

आईएमपीसीएल (IMPCL) का संक्षिप्त परिचय और विवाद की वजह
| विवरण | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| संस्थान का नाम | इंडियन मेडिसिंस फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IMPCL) |
| विशेषता | भारत सरकार का एकमात्र केंद्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा कारखाना |
| स्थान | मोहन, सल्ट (रामनगर के पास), उत्तराखंड |
| कुल भूमि | 35 एकड़ से अधिक |
| वार्षिक लाभ (2024-25) | ₹20 करोड़ से अधिक का नेट प्रॉफिट |
| क्रेता कंपनी | स्काईमैप फार्मास्युटिकल (निजी क्षेत्र) |
क्षेत्रीय जनता से आंदोलन को सफल बनाने की अपील
ठेका मजदूर कल्याण समिति ने इस लड़ाई को आर-पार की लड़ाई बताते हुए क्षेत्र के समस्त बुद्धिजीवियों, व्यापारियों, किसानों, मजदूरों और युवाओं से एकजुट होने का आह्वान किया है। समिति ने अपील की है कि 1 जून को सुबह 11 बजे अधिक से अधिक संख्या में कारखाने के गेट पर पहुंचकर इस निजीकरण विरोधी आंदोलन और महाधरने को सफल बनाएं।
मजदूर नेताओं का साफ कहना है कि जब तक सरकार इस जनविरोधी विनिवेश फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं और आने वाले दिनों में इसे और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।