रामनगर (उत्तराखंड)। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा कारखाने ‘इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (IMPCL) के विनिवेश (निजीकरण) के फैसले के खिलाफ ठेका मजदूरों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस विनिवेश नीति के विरोध में और अपनी लंबित मांगों को लेकर ‘ठेका मजदूर कल्याण समिति’ के बैनर तले लखनपुर स्पोर्ट्स क्लब, रामनगर में एक विशाल और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ठेका श्रमिकों ने भाजपा सरकार और कारखाना प्रबंधन के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया। मजदूरों ने आरोप लगाया कि सरकार के इस जनविरोधी फैसले ने हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर लात मारने का काम किया है।

42 दिनों से जारी है प्रदर्शन, जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से बढ़ा गुस्सा
बैठक को संबोधित करते हुए श्रमिक नेताओं ने कहा कि कारखाने के निजीकरण के विरोध में मजदूर पिछले 42 दिनों से लगातार आईएमपीसीएल कारखाना गेट पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। हाड़ कंपाने वाली ठंड और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मजदूर अपनी जायज मांगों को लेकर डटे हुए हैं, लेकिन सरकार और उसके प्रतिनिधियों का रवैया बेहद असंवेदनशील बना हुआ है।
मजदूरों ने तीखा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतने दिनों से आंदोलन चलने के बावजूद भी सत्ताधारी दल भाजपा के किसी भी सांसद, विधायक या बड़े नेता ने आंदोलन स्थल पर आकर उनकी सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधियों की यह बेरुखी क्षेत्र की जनता और मजदूरों के साथ सरासर धोखा है।
1.12 करोड़ रुपये के पीएफ घोटाले का मुद्दा गरमाया
इस बैठक में ठेका श्रमिकों ने आईएमपीसीएल प्रबंधन और सरकार के सामने अपने हक की आवाज बुलंद करते हुए ठेका श्रमिकों के भविष्य निधि (PF) की 1.12 करोड़ रुपये की राशि के तत्काल भुगतान की मांग की। श्रमिकों ने कारखाने में हुए पुराने वित्तीय भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए कहा कि वर्ष 2008 से 2014 के बीच कारखाना प्रबंधन और श्रमिक आपूर्ति करने वाली ठेकेदार फर्मों— ‘शिवालिक सर्विसेज’ व ‘सुंदर भूमि सर्विसेज’ ने मिलकर बड़ा घोटाला किया था।
इन फर्मों ने मिलीभगत करके ठेका मजदूरों के खून-पसीने की कमाई के 1.12 करोड़ रुपये हड़प लिए थे। इसके बाद, भविष्य निधि आयुक्त (PF Commissioner) कार्यालय में इस मामले पर 5 वर्षों तक लंबी कानूनी सुनवाई चली। अंततः कोर्ट के कड़े रुख के बाद कारखाना प्रबंधन को यह धनराशि दूसरी बार विभाग में जमा करानी पड़ी थी।

मजदूरों के खून-पसीने की कमाई, संघर्ष रहेगा जारी: किशन शर्मा
ठेका मजदूर कल्याण समिति के अध्यक्ष किशन शर्मा ने बैठक को संबोधित करते हुए प्रबंधन की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि दो बार पीएफ की राशि का भुगतान किए जाने के बावजूद भी आईएमपीसीएल प्रबंधन अभी तक मजदूरों को उनके हक का पैसा नहीं दे रहा है। यह पैसा किसी की खैरात नहीं, बल्कि मजदूरों की गाढ़ी कमाई और उनके खून-पसीने का अंश है। जब तक पाई-पाई वसूल नहीं हो जाती, हमारा संघर्ष थमेगा नहीं।”
किशन शर्मा ने आगे कहा कि सल्ट और आसपास के दुर्गम क्षेत्रों के सैकड़ो गरीब श्रमिक इस कारखाने में पिछले कई वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आईएमपीसीएल के विनिवेश हो जाने से इन सभी स्थानीय युवाओं के सामने बेरोजगारी का एक बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है। समिति ने पुरजोर मांग की है कि सभी ठेका श्रमिकों को तत्काल प्रभाव से नियमित कर स्थाई नियुक्ति दी जाए और आईएमपीसीएल के विनिवेश के फैसले को तुरंत रद्द किया जाए।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का मिला समर्थन
रामनगर में आयोजित इस बैठक में न केवल मजदूर बल्कि विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी एकजुटता दिखाने पहुंचे। समाजवादी लोक मंच के मुनीश कुमार ने सरकार की विनिवेश नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार सरकारी संपत्तियों को पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने पर आमादा है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में जगमोहन रावत, ख्याली राम, कैलाश, नन्द किशोर, गीता जोशी, मन्जू भट्ट, प्रभा देवी, गीता पांडे, सुनीता रावत, मनोज कुमार, भूपेंद्र कुमार, संतोष कुमार, गिरीश चंद्र समेत बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रमिक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि जब तक सरकार विनिवेश का फैसला वापस नहीं लेती और पीएफ का भुगतान नहीं होता, आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।